UPI पर नहीं लगेगा आम यूजर्स से कोई चार्ज! MDR की खबरों पर सरकार ने साफ किया पूरा मामला

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नई दिल्ली: डिजिटल भुगतान करने वाले करोड़ों लोगों के लिए केंद्र सरकार ने बड़ी राहत दी है। सरकार ने साफ कर दिया है कि आम यूजर्स के लिए यूपीआई से लेनदेन पूरी तरह मुफ्त रहेगा। वित्त मंत्रालय ने उन खबरों को भी खारिज कर दिया है, जिनमें दावा किया गया था कि किसी बाहरी दबाव के कारण यूपीआई से जुड़ी नीतियों में बदलाव किया जा रहा है।

वित्त मंत्रालय ने शनिवार को जारी बयान में कहा कि यूपीआई के जरिए भुगतान करने वाले आम ग्राहकों से कोई लेनदेन शुल्क नहीं लिया जाएगा। व्यक्ति से व्यक्ति के बीच होने वाले भुगतान यानी पी2पी लेनदेन भी पहले की तरह मुफ्त रहेंगे।

MDR लागू हुआ तो किस पर पड़ेगा असर?

सरकार ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में अगर मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी एमडीआर लागू किया जाता है, तो इसका बोझ आम यूजर्स पर नहीं डाला जाएगा। प्रस्तावित व्यवस्था में केवल तय सीमा से अधिक वाले कुछ बड़े व्यापारियों के चुनिंदा लेनदेन को इसके दायरे में लाया जा सकता है।

वित्त मंत्रालय के मुताबिक, एमडीआर की दर क्रेडिट और डेबिट कार्ड से होने वाले भुगतान पर लगने वाले शुल्क की तुलना में काफी कम और मामूली रखी जाएगी।

MDR पर फैसला कौन करेगा?

भविष्य में एमडीआर कब और कितना लागू किया जाए, इसका फैसला नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया की यूपीआई एंड सर्विसेज स्टीयरिंग कमेटी करेगी। हालांकि, इसके लिए पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007 की धारा 10ए में बदलाव करना जरूरी होगा।

सरकार का कहना है कि प्रस्तावित कानूनी बदलाव का उद्देश्य यूपीआई की तकनीक को और बेहतर बनाना, भुगतान व्यवस्था को मजबूत करना और भविष्य में सामने आने वाले जोखिमों से निपटने के लिए प्रणाली को तैयार करना है।

बाहरी दबाव की खबरों को सरकार ने बताया भ्रामक

वित्त मंत्रालय ने यूपीआई की नीतियों में किसी बाहरी दबाव के कारण बदलाव किए जाने की खबरों को पूरी तरह खारिज किया है। मंत्रालय ने इन दावों को झूठा और भ्रामक बताया।

सरकार ने कहा कि अगर किसी बाहरी दबाव का असर होता तो वर्ष 2016 में यूपीआई की शुरुआत नहीं की जाती। इसके अलावा जनवरी 2020 से व्यापारियों और आम नागरिकों के लिए यूपीआई भुगतान को मुफ्त करने का फैसला भी नहीं लिया जाता।

सरकार के अनुसार, इसी नीति के कारण यूपीआई दुनिया की सबसे बड़ी वास्तविक समय भुगतान प्रणालियों में शामिल हो सका है।

बड़े व्यापारियों के लिए क्यों हो रही MDR की चर्चा?

डिजिटल भुगतान क्षेत्र से जुड़े लोगों का मानना है कि सरकार की ओर से बताई गई तय सीमा का मतलब भविष्य में बड़े कारोबारियों के कुछ लेनदेन पर एमडीआर लागू करने से हो सकता है।

पिछले साल पेमेंट्स काउंसिल ऑफ इंडिया ने भी प्रधानमंत्री कार्यालय को पत्र लिखकर बड़े व्यापारियों के लिए 0.3 प्रतिशत की मामूली एमडीआर दर लागू करने का सुझाव दिया था। परिषद के मुताबिक, देश में करीब 6 करोड़ व्यापारी इलेक्ट्रॉनिक भुगतान का इस्तेमाल करते हैं। इनमें लगभग 90 प्रतिशत छोटे व्यापारी हैं, जिनका सालाना कारोबार 20 लाख रुपये से कम है।

परिषद के अनुसार, करीब 50 लाख व्यापारी इस सीमा से ऊपर आते हैं। इनमें ऐसे बड़े कारोबारी शामिल हैं, जिनके पास भुगतान मशीनें या ई-कॉमर्स वेबसाइट हैं और जो कार्ड के जरिए भुगतान स्वीकार करते हैं। ये कारोबारी पहले से ही कार्ड भुगतान पर एमडीआर देते हैं, जिसकी दर करीब 0.9 प्रतिशत से 2 प्रतिशत तक होती है।

RBI गवर्नर भी दे चुके हैं UPI MDR पर बयान

यूपीआई पर एमडीआर को लेकर हाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने भी अपनी बात रखी थी। उन्होंने कहा था कि यूपीआई पर एमडीआर लगाने की चर्चा अभी समय से पहले है। उनके मुताबिक, वास्तविक समय वाली भुगतान व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के लिए लगातार निवेश की जरूरत है।

 

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