राम मंदिर चढ़ावा घोटाले में पहली FIR, 8 नामजद आरोपी रडार पर; SIT ने खोली कथित हेराफेरी की परतें
अयोध्या: राम मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे को लेकर सामने आए कथित गड़बड़ी के मामले में जांच अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की शिकायत पर पहली बार एफआईआर दर्ज की गई है। इस मामले में आठ लोगों को नामजद किया गया है, जबकि कई अन्य अज्ञात व्यक्तियों को भी जांच के दायरे में रखा गया है। विशेष जांच दल (SIT) अब आरोपियों की संपत्तियों, बैंक खातों और वित्तीय लेन-देन की गहन जांच कर रहा है।
मंदिर में आने वाले नकद चढ़ावे की सुरक्षा, परिवहन और गिनती की प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की शिकायत मिलने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया था। एसआईटी प्रमुख एवं लखनऊ मंडल के आयुक्त विजय विश्वास पंत ने अपनी जांच रिपोर्ट शासन को सौंपी, जिसमें आपराधिक कार्रवाई की सिफारिश की गई। इसके बाद श्रीराम जन्मभूमि थाने में मामला दर्ज किया गया।
एफआईआर के अनुसार, मंदिर में आने वाले करोड़ों रुपये के चढ़ावे की सुरक्षा, उसके परिवहन और कैश काउंटिंग प्रक्रिया के दौरान कथित हेराफेरी की गई। जांच एजेंसियों का दावा है कि दानपात्रों से लेकर बैंक में रकम जमा होने तक की प्रक्रिया के विभिन्न चरणों में अनियमितताएं हुईं।
दानपात्र से बैंक तक की प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी
राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दानपात्रों में नकद चढ़ावा डाला जाता है। इसके बाद दानपात्रों की निगरानी, उन्हें सुरक्षित स्थान तक पहुंचाना, नकदी की गिनती, रिकॉर्ड तैयार करना और रकम बैंक में जमा कराना जैसी कई प्रक्रियाएं होती हैं। जांच एजेंसियों का आरोप है कि इसी पूरी श्रृंखला के अलग-अलग चरणों में कथित गबन और हेराफेरी को अंजाम दिया गया।
किस आरोपी पर क्या आरोप?
रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू
एफआईआर के मुताबिक रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू की जिम्मेदारी मंदिर परिसर में रखे दानपात्रों की निगरानी और उन्हें बेसमेंट तक सुरक्षित पहुंचाने की थी। आरोप है कि इसी स्तर पर करोड़ों रुपये के चढ़ावे में कथित गड़बड़ी की गई और उससे अयोध्या व आसपास के क्षेत्रों में संपत्तियां अर्जित की गईं।
लवकुश मिश्रा
लवकुश मिश्रा कैश काउंटिंग टीम का हिस्सा थे। उन पर नकदी की गिनती के दौरान कथित हेराफेरी का आरोप लगाया गया है। जांच के दौरान उनके घर से करीब 12 लाख रुपये नकद मिलने का दावा किया गया है, जिसकी जांच जारी है।
अनुकल्प मिश्रा
अनुकल्प मिश्रा भी कैश काउंटिंग कक्ष में तैनात थे। एफआईआर में आरोप है कि गिनती के दौरान कथित रूप से रकम निकालकर उसका दुरुपयोग किया गया।
सुभाष चंद्र श्रीवास्तव
सुभाष चंद्र श्रीवास्तव कैश काउंटिंग स्टाफ के प्रभारी थे। उन पर पूरी प्रक्रिया की निगरानी में कथित लापरवाही बरतने और अनियमितताओं में संलिप्तता के आरोप लगाए गए हैं।
करुणेश पांडेय
करुणेश पांडेय की जिम्मेदारी दान की रकम को गिनती वाले कक्ष तक पहुंचाने की थी। जांच एजेंसियों का आरोप है कि उन्होंने कथित हेराफेरी में भूमिका निभाई और उससे संपत्ति अर्जित की।
मनीष कुमार यादव
मनीष कुमार यादव भी कैश काउंटिंग टीम में शामिल थे। जांच के दौरान उनके घर से करीब 36 लाख रुपये नकद मिलने का दावा किया गया है। एजेंसियां अब इस राशि के स्रोत की जांच कर रही हैं।
अविनाश शुक्ला
अविनाश शुक्ला पर आरोप है कि वे दान राशि को सुरक्षित रूप से काउंटिंग रूम तक पहुंचाने और प्रक्रिया में शामिल रहने के दौरान कथित गड़बड़ियों में शामिल रहे। उन पर चढ़ावे की रकम के कथित दुरुपयोग और उससे संपत्ति बनाने के आरोप हैं।
अज्ञात आरोपी भी जांच के घेरे में
एफआईआर में केवल नामजद आरोपियों का ही उल्लेख नहीं है, बल्कि कुछ अज्ञात लोगों को भी आरोपी बनाया गया है। जांच एजेंसियों का कहना है कि यदि आगे किसी और की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
ट्रस्ट सदस्य कृष्ण मोहन ने दर्ज कराई शिकायत
इस पूरे मामले की शिकायत श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन ने दर्ज कराई है। वे सितंबर 2025 में दिवंगत ट्रस्टी कामेश्वर चौपाल के निधन के बाद ट्रस्ट में शामिल किए गए थे। भारतीय वन सेवा के महाराष्ट्र कैडर के वरिष्ठ अधिकारी रह चुके कृष्ण मोहन सेवानिवृत्ति के बाद सामाजिक कार्यों में सक्रिय हैं।
इन गंभीर धाराओं में दर्ज हुआ मामला
एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई गंभीर धाराएं लगाई गई हैं। इनमें पूजा स्थल या सुरक्षित स्थान में चोरी, कर्मचारी या सेवक द्वारा चोरी, विश्वास में सौंपी गई संपत्ति का दुरुपयोग, चोरी की संपत्ति के संरक्षण और छिपाने, आपराधिक साजिश, सामूहिक अपराध में संयुक्त जिम्मेदारी समेत भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराएं शामिल हैं।
अब जांच का अगला चरण शुरू
एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस और एसआईटी ने जांच तेज कर दी है। आरोपियों से पूछताछ की जा रही है और उनकी चल-अचल संपत्तियों, बैंक खातों, नकदी तथा वित्तीय लेन-देन की पड़ताल की जा रही है। जांच में पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर चार्जशीट दाखिल की जाएगी, जिसके बाद अदालत तय करेगी कि किन आरोपों पर मुकदमा चलेगा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष होगी और दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। सरकार ने साफ कहा है कि भगवान श्रीराम के मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित दान और चढ़ावे की पवित्रता से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।





