कब्ज को हल्के में न लें, पेट की इस समस्या का त्वचा पर भी दिख सकता है असर; इन आदतों से पाचन रहेगा दुरुस्त
नई दिल्ली। कब्ज को आमतौर पर पाचन तंत्र से जुड़ी परेशानी माना जाता है, लेकिन लंबे समय तक रहने वाली कब्ज का संबंध शरीर की अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से भी हो सकता है। कुछ अध्ययनों में क्रोनिक कब्ज और त्वचा संबंधी समस्याओं के बीच संबंध के संकेत मिले हैं। हालांकि, इसका यह मतलब नहीं है कि कब्ज सीधे तौर पर हर व्यक्ति में त्वचा रोग का कारण बनती है।
कब्ज होने पर मल त्याग कम या मुश्किल हो सकता है। इसके साथ पेट में भारीपन, असहजता और गैस जैसी परेशानियां भी हो सकती हैं। यदि यह समस्या लंबे समय तक बनी रहती है तो इसके पीछे मौजूद कारणों की पहचान करना जरूरी है। पानी की कमी, खानपान में फाइबर की कमी और शारीरिक गतिविधि का अभाव कब्ज की समस्या को बढ़ा सकता है।
कब्ज और एक्जिमा के बीच मिला संबंध
कब्ज और त्वचा की समस्या के संबंध को लेकर हुए कुछ अध्ययनों में महत्वपूर्ण संकेत सामने आए हैं। ताइवान में एक लाख 70 हजार से अधिक लोगों के आंकड़ों पर किए गए एक अध्ययन में कब्ज से पीड़ित लोगों में एक्जिमा का जोखिम अन्य लोगों की तुलना में अधिक पाया गया। रिपोर्ट में यह जोखिम करीब दो गुना तक बताया गया है।
हालांकि, ऐसे अध्ययनों से यह साबित नहीं होता कि कब्ज सीधे तौर पर एक्जिमा का कारण है। दोनों समस्याओं के बीच संबंध के पीछे जैविक और जीवनशैली से जुड़े कई कारक हो सकते हैं। इसलिए त्वचा पर होने वाली किसी समस्या के लिए केवल कब्ज को जिम्मेदार मानना सही नहीं होगा।
आंत और त्वचा के बीच कनेक्शन पर हो रही रिसर्च
आंत और त्वचा के बीच संबंध को लेकर चिकित्सा क्षेत्र में लगातार शोध किए जा रहे हैं। पाचन तंत्र और त्वचा शरीर की सुरक्षा व्यवस्था के महत्वपूर्ण हिस्से हैं। आंतों के स्वास्थ्य में बदलाव, सूजन और माइक्रोबायोम में असंतुलन जैसे कारक शरीर की प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं। कुछ लोगों में इसका असर त्वचा पर भी दिखाई दे सकता है।
पाचन संबंधी परेशानी के दौरान कुछ लोगों को त्वचा पर दाने, खुजली, रूखापन या अन्य बदलाव महसूस हो सकते हैं। मुंहासे और आंखों के नीचे सूजन जैसी समस्याओं को भी कई बार खराब पाचन से जोड़कर देखा जाता है। हालांकि, इन समस्याओं के पीछे कई अन्य कारण भी हो सकते हैं।
फाइबर और पानी को डाइट में करें शामिल
कब्ज से बचाव के लिए रोजमर्रा की जीवनशैली में बदलाव अहम है। भोजन में पर्याप्त फाइबर शामिल करना, पर्याप्त पानी पीना और नियमित शारीरिक गतिविधि बनाए रखना पाचन के लिए उपयोगी हो सकता है। फल, सब्जियां, साबुत अनाज और अन्य फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ संतुलित आहार का हिस्सा बनाए जा सकते हैं।
कुछ लोगों के लिए प्रोबायोटिक युक्त खाद्य पदार्थ भी आंतों के स्वास्थ्य के लिहाज से उपयोगी हो सकते हैं। हालांकि, हर व्यक्ति की पाचन संबंधी जरूरत अलग होती है। लंबे समय तक कब्ज रहने पर केवल घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय इसके कारणों की चिकित्सकीय जांच कराना बेहतर है।
इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें
यदि कब्ज लंबे समय तक बनी रहती है, मल में खून आता है, बिना किसी स्पष्ट कारण के वजन कम होता है, तेज पेट दर्द होता है या अचानक मल त्याग की आदत में बदलाव आता है तो चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है। इसी तरह त्वचा पर लगातार दाने, खुजली, सूजन या एक्जिमा जैसे लक्षण बने रहने पर त्वचा विशेषज्ञ से परामर्श किया जाना चाहिए।
कब्ज और त्वचा के बीच संबंध को लेकर शोध अभी जारी है। मौजूदा प्रमाण आंत और त्वचा के स्वास्थ्य के बीच संभावित संबंध की ओर संकेत करते हैं, लेकिन हर त्वचा समस्या को कब्ज से जोड़ना वैज्ञानिक रूप से उचित नहीं है। संतुलित आहार, पर्याप्त पानी, नियमित शारीरिक गतिविधि और जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय सलाह पाचन और त्वचा, दोनों के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण हैं।





