बिहार में चीनी उद्योग को बड़ा बूस्ट! 1 रुपये में मिलेगी 40 एकड़ जमीन, नई नीति से निवेशकों को करोड़ों की राहत

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पटना: बिहार सरकार ने राज्य के चीनी उद्योग को नई रफ्तार देने के लिए बड़ा फैसला लिया है। कैबिनेट ने ‘शुगरकेन इंडस्ट्रीज इन्वेस्टमेंट इंसेंटिव पॉलिसी 2026’ को मंजूरी दे दी है। नई नीति का उद्देश्य राज्य में बड़े निवेश को आकर्षित करना, बंद पड़ी चीनी मिलों को दोबारा चालू करना और नई चीनी मिलों की स्थापना को बढ़ावा देना है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इस महत्वाकांक्षी नीति पर मुहर लगाई गई।

बिहार सरकार का दावा है कि यह नीति राज्य के औद्योगिक विकास को नई दिशा देगी और चीनी उत्पादन के साथ-साथ एथेनॉल तथा हरित ऊर्जा क्षेत्र में भी बड़े निवेश का मार्ग प्रशस्त करेगी।

देश में अपनी तरह की पहली व्यापक नीति

गन्ना उद्योग मंत्री संजय कुमार ने बताया कि बिहार देश का पहला राज्य बन गया है जिसने चीनी उद्योग के लिए इतनी व्यापक और आकर्षक प्रोत्साहन नीति तैयार की है। सरकार को उम्मीद है कि इससे राज्य में औद्योगिक गतिविधियां बढ़ेंगी और गन्ना आधारित उद्योगों का तेजी से विस्तार होगा।

सिर्फ 1 रुपये में मिलेगी 40 एकड़ सरकारी जमीन

नई नीति के तहत राज्य में नई चीनी मिल स्थापित करने वाले निवेशकों को बड़ा लाभ दिया जाएगा। सरकार अधिकतम 40 एकड़ सरकारी जमीन 30 वर्ष की लीज पर मात्र 1 रुपये के प्रतीकात्मक शुल्क पर उपलब्ध कराएगी।

इसके अलावा, चीनी मिल स्थापना के लिए खरीदी गई भूमि पर लगने वाली रजिस्ट्रेशन फीस और स्टांप ड्यूटी की पूरी राशि वापस की जाएगी। साथ ही चीनी उत्पादन पर देय राज्य वस्तु एवं सेवा कर (एसजीएसटी) की 100 प्रतिशत प्रतिपूर्ति पांच वर्षों तक सरकार द्वारा की जाएगी।

नई चीनी मिलों को मिलेगा करोड़ों रुपये का अनुदान

निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार ने बड़े आर्थिक पैकेज का भी प्रावधान किया है। 5,000 टीसीडी (टन क्रशिंग क्षमता प्रतिदिन) वाली नई चीनी मिल स्थापित करने पर निवेशकों को 100 करोड़ रुपये तक का अनुदान मिलेगा।

वहीं 3,500 टीसीडी क्षमता वाली नई मिलों के लिए 70 करोड़ रुपये तक की सहायता दी जाएगी। इतना ही नहीं, पहले से संचालित चीनी मिलें यदि अपनी उत्पादन क्षमता का विस्तार करती हैं तो उन्हें भी सरकारी सहायता का लाभ मिलेगा।

एथेनॉल, बिजली और सीबीजी परियोजनाओं को भी बढ़ावा

नई नीति का दायरा केवल चीनी मिलों तक सीमित नहीं रखा गया है। सरकार ने डिस्टिलरी, एथेनॉल संयंत्र, बिजली उत्पादन परियोजनाओं और कंप्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) इकाइयों को भी विशेष प्रोत्साहन देने का फैसला किया है।

इसके साथ ही “मॉडर्न शुगर कॉम्प्लेक्स” की अवधारणा भी पेश की गई है। इस मॉडल के तहत एक ही परिसर में चीनी, एथेनॉल, बिजली और सीबीजी का उत्पादन किया जाएगा, जिससे संसाधनों का बेहतर उपयोग और लागत में कमी सुनिश्चित की जा सकेगी।

25 नई चीनी मिलें स्थापित करने का लक्ष्य

सरकार ने ‘सात निश्चय-3’ कार्यक्रम के तहत राज्य की बंद पड़ी चीनी मिलों को पुनर्जीवित करने और 25 नई चीनी मिलों की स्थापना का लक्ष्य तय किया है। सरकार का मानना है कि नई नीति से बड़े पैमाने पर निवेश आएगा, हजारों रोजगार के अवसर सृजित होंगे और गन्ना किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

राज्य सरकार को उम्मीद है कि इस पहल के जरिए बिहार आने वाले वर्षों में चीनी, एथेनॉल और हरित ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में अपनी मजबूत पहचान स्थापित करेगा।

 

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