बिजली उपभोक्ताओं को मिल सकती है बड़ी राहत! नए टैरिफ आदेश का इंतजार खत्म होने वाला, जल्द होगा ऐलान
लखनऊ: उत्तर प्रदेश के करोड़ों बिजली उपभोक्ताओं के लिए राहत भरी खबर सामने आ सकती है। बिजली दरों के नए टैरिफ आदेश को लेकर लंबे समय से चल रही प्रक्रिया अब अंतिम चरण में पहुंच गई है और माना जा रहा है कि नियामक आयोग जल्द ही नई दरों का ऐलान कर सकता है। इस बार भी बिजली दरों में बढ़ोतरी की संभावना बेहद कम बताई जा रही है, जिससे उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिल सकती है।
सूत्रों के मुताबिक, बिजली कंपनियों के प्रस्तावों पर सुनवाई और अन्य आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी हो चुकी हैं। ऐसे में अब नए टैरिफ आदेश की घोषणा कभी भी हो सकती है। यदि इस बार भी बिजली दरों में बढ़ोतरी नहीं होती है तो यह लगातार सातवां वर्ष होगा, जब उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ नहीं डाला जाएगा।
मार्च-अप्रैल में पूरी हुई थी सुनवाई प्रक्रिया
नई बिजली दरों को लेकर सभी विद्युत वितरण कंपनियों द्वारा प्रस्तुत प्रस्तावों पर मार्च और अप्रैल महीने में विस्तृत सुनवाई की गई थी। इसके बाद राज्य सलाहकार समिति की बैठक भी आयोजित की गई।
नियमों के अनुसार नई दरों की घोषणा 5 जून से पहले हो जानी चाहिए थी, लेकिन विभिन्न कारणों से इसमें देरी हुई। अब आयोग जल्द ही अंतिम आदेश जारी कर सकता है।
16,448 करोड़ रुपये के राजस्व अंतर का हवाला
पावर कॉरपोरेशन और वितरण कंपनियों ने वर्ष 2024-25 के ट्रू-अप में लगभग 3,995 करोड़ रुपये तथा वर्ष 2026-27 के लिए करीब 12,453 करोड़ रुपये के राजस्व अंतर का दावा किया है। इस प्रकार कुल 16,448 करोड़ रुपये के अंतर को आधार बनाते हुए बिजली दरों में वृद्धि की मांग की गई है।
इसके अलावा स्मार्ट प्रीपेड मीटर योजना पर होने वाले लगभग 3,838 करोड़ रुपये के खर्च को भी उपभोक्ताओं के बिल में शामिल करने का प्रस्ताव दिया गया था। हालांकि सुनवाई के दौरान उपभोक्ता संगठनों ने इसका विरोध करते हुए इसे नियमों के विरुद्ध बताया।
सिर्फ बिजली दरें नहीं, कई अहम फैसले भी होंगे
नया टैरिफ आदेश केवल बिजली दरों तक सीमित नहीं रहेगा। इसके तहत कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी फैसला लिया जाएगा।
इनमें बहुमंजिला इमारतों में साझा क्षेत्रों की बिजली खपत का अलग विवरण उपलब्ध कराना, घरों से छोटे स्तर पर व्यापार करने वालों को घरेलू कनेक्शन इस्तेमाल करने की अनुमति और स्मार्ट मीटर की लागत उपभोक्ताओं पर न डालने जैसे विषय शामिल हैं।
पुराने बकाये की वसूली पर आयोग का बड़ा फैसला
नियामक आयोग ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि पावर कॉरपोरेशन पुराने बकाया भुगतान की राशि को बिजली बिल में जोड़कर वसूली नहीं कर सकेगा।
आयोग ने कहा कि मौजूदा नियम ऐसी वसूली की अनुमति नहीं देते हैं। यह फैसला जून महीने में ईंधन अधिभार शुल्क के रूप में 10 प्रतिशत अतिरिक्त वसूली को लेकर उठे विवाद के बाद सामने आया है।
14 महीने की वसूली की होगी समीक्षा
पिछले वर्ष अप्रैल से उपभोक्ताओं के बिजली बिलों में ईंधन अधिभार शुल्क जोड़ा जा रहा था। इस अवधि में करीब 2,800 करोड़ रुपये की वसूली की गई, जबकि विभिन्न महीनों में लगभग 600 करोड़ रुपये की राहत भी दी गई।
जब मामला नियामक आयोग के पास पहुंचा तो पावर कॉरपोरेशन ने स्वीकार किया कि बकाया भुगतान की रकम को भी अधिभार की गणना में शामिल किया गया था। आयोग ने इसे नियमों के अनुरूप नहीं माना और स्पष्ट किया कि केवल संबंधित महीने में ईंधन, ऊर्जा खरीद और ट्रांसमिशन पर हुए वास्तविक खर्च के आधार पर ही अधिभार लगाया जा सकता है।
अब पिछले 14 महीनों में हुई वसूली की समीक्षा की जाएगी और अतिरिक्त वसूली गई राशि के संबंध में आगे निर्णय लिया जाएगा।
उपभोक्ताओं की नजर नए टैरिफ आदेश पर
बिजली उपभोक्ताओं की निगाहें अब नियामक आयोग के आगामी टैरिफ आदेश पर टिकी हैं। उम्मीद की जा रही है कि नए आदेश में उपभोक्ता हितों को प्राथमिकता देते हुए कई महत्वपूर्ण फैसले लिए जा सकते हैं, जिससे लाखों परिवारों को राहत मिलेगी।





