अंडरआर्म्स का कालापन सिर्फ खूबसूरती नहीं, इन गंभीर बीमारियों का भी हो सकता है संकेत; जानें कारण और बचाव के उपाय

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नई दिल्ली: अंडरआर्म्स का रंग सामान्य तौर पर शरीर की बाकी त्वचा जैसा ही होता है, लेकिन कई लोगों में यह हिस्सा धीरे-धीरे काला पड़ने लगता है। अधिकांश मामलों में यह गंभीर समस्या नहीं होती, लेकिन कई बार यह शरीर में छिपी कुछ बीमारियों का शुरुआती संकेत भी हो सकता है। चिकित्सा भाषा में इस स्थिति को अकन्थोसिस निगरिकन्स कहा जाता है, जिसमें त्वचा कुछ जगहों पर काली, मोटी और खुरदरी दिखाई देने लगती है।

किन हिस्सों में दिखाई देता है असर?

अकन्थोसिस निगरिकन्स केवल अंडरआर्म्स तक सीमित नहीं रहता। इसका असर गर्दन के पीछे, पेट और जांघ के बीच वाले हिस्से, कोहनी और घुटनों पर भी दिखाई दे सकता है। इन स्थानों पर खुजली और दुर्गंध जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।

किन बीमारियों का हो सकता है संकेत?

मोटापा: अधिक वजन होने पर शरीर में इंसुलिन के प्रति प्रतिरोध बढ़ जाता है। इससे रक्त में इंसुलिन का स्तर बढ़ सकता है, जो त्वचा की रंगत बदलने वाली कोशिकाओं को प्रभावित करता है। इसी कारण अधिक वजन वाले लोगों में अंडरआर्म्स काले पड़ने की समस्या अधिक देखने को मिलती है।

टाइप-2 डायबिटीज: मोटापे के साथ टाइप-2 डायबिटीज का खतरा भी बढ़ जाता है। जिन लोगों में ब्लड शुगर लंबे समय तक अधिक रहता है, उनमें अकन्थोसिस निगरिकन्स होने की आशंका बढ़ सकती है।

हार्मोन संबंधी समस्याएं: शरीर में हार्मोनल असंतुलन भी इस समस्या की वजह बन सकता है। पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस), कुशिंग सिंड्रोम, एक्रोमेगाली और हाइपोथायरायडिज्म जैसी स्थितियों में अंडरआर्म्स का कालापन बढ़ सकता है।

कुछ दवाइयों का असर: इंसुलिन, गर्भनिरोधक गोलियां, नियासिन का अधिक सेवन और ह्यूमन ग्रोथ हार्मोन जैसी कुछ दवाइयों के कारण भी त्वचा का रंग गहरा पड़ सकता है।

कैंसर के कुछ मामलों में भी संकेत: विशेषज्ञों के अनुसार, यदि अचानक त्वचा पर गहरे रंग के धब्बे बनने लगें तो कुछ दुर्लभ मामलों में यह पेट, लिवर या कोलन से जुड़े कैंसर का संकेत भी हो सकता है। ऐसी स्थिति में तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

घरेलू उपाय अपनाने से पहले बरतें सावधानी

अंडरआर्म्स का कालापन कम करने के लिए सी कुकुंबर एक्सट्रैक्ट, करक्यूमिन और मिल्क थिसल एक्सट्रैक्ट जैसे प्राकृतिक उत्पादों का उपयोग किया जाता है। हालांकि इनसे हर व्यक्ति को समान लाभ मिले, इसकी कोई निश्चित गारंटी नहीं है। इसलिए किसी भी उत्पाद का इस्तेमाल शुरू करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर माना जाता है।

लाइफस्टाइल में बदलाव भी है जरूरी

यदि अंडरआर्म्स का कालापन मोटापे की वजह से है, तो वजन कम करना सबसे प्रभावी उपाय हो सकता है। स्वस्थ खानपान और नियमित व्यायाम से न केवल वजन नियंत्रित रहता है, बल्कि टाइप-2 डायबिटीज का खतरा भी कम किया जा सकता है। यदि किसी दवा के सेवन के बाद यह समस्या शुरू हुई हो, तो बिना सलाह दवा बंद करने के बजाय चिकित्सक से परामर्श जरूर लें।

कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?

यदि आपको डायबिटीज, थायरॉयड या हार्मोन संबंधी कोई बीमारी है और अंडरआर्म्स का रंग लगातार गहरा होता जा रहा है, तो त्वचा विशेषज्ञ से जांच कराना चाहिए। वहीं, अगर त्वचा पर अचानक काले धब्बे बनने लगें या तेजी से बदलाव दिखाई दे, तो इसे नजरअंदाज न करें और तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।

 

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