होर्मुज स्ट्रेट पर गहराया संकट! US-ईरान तनाव से थमा समुद्री ट्रैफिक, तेल-गैस सप्लाई पर मंडराया बड़ा खतरा

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नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर भी दिखाई देने लगा है। अमेरिकी सेना द्वारा लगातार दूसरे दिन ईरान के कई ठिकानों पर हमले किए जाने के बाद होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले समुद्री जहाजों की आवाजाही बेहद धीमी पड़ गई है। भारत समेत दुनिया के कई देशों को कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति इसी रणनीतिक समुद्री मार्ग से होती है। ऐसे में इस क्षेत्र में बढ़ते तनाव ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है।

उत्तरी समुद्री मार्ग तक सीमित हुई जहाजों की आवाजाही

रिपोर्ट के मुताबिक, होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाला समुद्री ट्रैफिक लगभग ठहर गया है। फिलहाल अधिकांश जहाज केवल उस उत्तरी समुद्री मार्ग का उपयोग कर रहे हैं, जिसे ईरान की मंजूरी प्राप्त है। वहीं ओमान और अमेरिका के समर्थन वाले दक्षिणी कॉरिडोर में जहाजों की आवाजाही बेहद सीमित हो गई है। हाल के घंटों में केवल एक अमेरिकी मंजूरी प्राप्त सुपरटैंकर और एक ईरानी कंटेनर जहाज के इस जलमार्ग से गुजरने की जानकारी सामने आई है।

सैन्य तनाव बढ़ते ही तेजी से घटी जहाजों की संख्या

डेटा फर्म केप्लर के आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच अंतरिम समझौते के बाद पिछले तीन सप्ताह में प्रतिदिन औसतन 34 कमोडिटी जहाज होर्मुज स्ट्रेट से गुजर रहे थे। 24 जून को यह संख्या बढ़कर 59 तक पहुंच गई थी। हालांकि ताजा सैन्य टकराव के बाद जहाजों की संख्या में तेजी से गिरावट दर्ज की गई और अधिकांश दिनों में 20 से भी कम जहाज इस रास्ते से गुजर सके।

होर्मुज पर नियंत्रण को रणनीतिक ताकत मानता है ईरान

अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार, सैन्य और रक्षा मामलों के विशेषज्ञ एलेक्स अलफिराज शीर्स का कहना है कि ईरान होर्मुज स्ट्रेट पर अपना नियंत्रण बनाए रखने के लिए बड़े संघर्ष का जोखिम उठाने को भी तैयार है। उनके मुताबिक, ईरान इस जलमार्ग को अपनी सबसे अहम रणनीतिक ताकत मानता है और भविष्य की किसी भी वार्ता में इसे दबाव बनाने के प्रमुख साधन के रूप में इस्तेमाल करना चाहता है।

विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि अमेरिका और खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के देशों पर यह सुनिश्चित करने का दबाव है कि होर्मुज पूरी तरह ईरान के नियंत्रण वाला समुद्री क्षेत्र न बन जाए। वहीं अमेरिका और ईरान के बीच हुआ अंतरिम समझौता अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है, लेकिन मौजूदा हालात में वह बेहद कमजोर स्थिति में पहुंच चुका है।

ईरान ने अमेरिका पर युद्धविराम उल्लंघन का लगाया आरोप

ईरान ने अमेरिका पर युद्धविराम समझौते और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उल्लंघन का आरोप लगाया है। ईरानी विदेश मंत्रालय का कहना है कि अमेरिका ने दो रेलवे पुलों समेत कई ठिकानों को निशाना बनाया और इन हमलों को होर्मुज में जहाजों पर हुए हमलों के जवाब के रूप में पेश करना महज एक बहाना है। ईरान का दावा है कि अमेरिकी हमलों में कम से कम 14 लोगों की मौत हुई है, जबकि कई अन्य घायल हुए हैं।

कतर, कुवैत और बहरीन तक पहुंचा संघर्ष

अमेरिकी कार्रवाई के बाद ईरान ने कतर, कुवैत और बहरीन में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले करने का दावा किया है। वहीं होर्मुज क्षेत्र के आसपास स्थित बुशेहर, चाबहार, बंदर अब्बास, सीरिक, जास्क और अबू मूसा द्वीप सहित कई इलाकों में विस्फोटों की खबरें सामने आई हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच तनाव जल्द कम नहीं हुआ तो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति मार्ग पर इसका लंबा असर पड़ सकता है। इसका सीधा प्रभाव कच्चे तेल की कीमतों, प्राकृतिक गैस की आपूर्ति, समुद्री परिवहन लागत और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर देखने को मिल सकता है।

 

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