भारत पर विदेशी कंपनियों का बड़ा भरोसा! कुछ महीनों में 90 अरब डॉलर निवेश का ऐलान, एआई से डेटा सेंटर तक लगी दिग्गजों की कतार

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नई दिल्ली : वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत दुनिया की बड़ी कंपनियों और संस्थागत निवेशकों के लिए सबसे आकर्षक निवेश केंद्र बनकर उभरा है। हाल के महीनों में विदेशी कंपनियों ने देश में 90 अरब डॉलर (करीब 8.60 लाख करोड़ रुपये) से अधिक के निवेश की घोषणाएं की हैं। यह निवेश कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्लाउड सेवाओं, डिजिटल अवसंरचना, विनिर्माण और औद्योगिक प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में किया जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि दुनिया के कई हिस्सों में आर्थिक चुनौतियों के बावजूद भारत की मजबूत विकास संभावनाएं, विशाल उपभोक्ता बाजार और तेजी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था वैश्विक निवेशकों को आकर्षित कर रही है। यही वजह है कि बहुराष्ट्रीय कंपनियां भारत को अपनी दीर्घकालिक रणनीति का अहम हिस्सा बना रही हैं।

एआई और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर सबसे बड़ा दांव

निवेश घोषणाओं में सबसे चर्चित नाम तकनीकी क्षेत्र की दिग्गज कंपनियों का है। फरवरी में गूगल ने अगले पांच वर्षों में भारत में कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित अवसंरचना को मजबूत करने के लिए 15 अरब डॉलर निवेश करने की योजना का ऐलान किया था। इस योजना में डेटा सेंटर विस्तार, समुद्री केबल कनेक्टिविटी, क्लाउड क्षमता बढ़ाने और डिजिटल कौशल विकास कार्यक्रम शामिल हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि एआई और डेटा आधारित सेवाओं की बढ़ती मांग को देखते हुए भारत वैश्विक तकनीकी कंपनियों के लिए रणनीतिक केंद्र बनता जा रहा है।

ऑस्ट्रेलियाई कंपनी का 30 अरब डॉलर का मेगा प्लान

मार्च में औद्योगिक प्रौद्योगिकी क्षेत्र की कंपनी एबीबी ने भारत में विनिर्माण और अनुसंधान क्षमताओं को मजबूत करने के लिए 7.5 करोड़ डॉलर के निवेश की घोषणा की। वहीं ऑस्ट्रेलिया की एयर ट्रंक ने वर्ष 2030 तक भारत में पांच गीगावाट डेटा सेंटर क्षमता विकसित करने के लिए 30 अरब डॉलर निवेश का रोडमैप पेश किया है।

इसे देश के डिजिटल अवसंरचना क्षेत्र में अब तक की सबसे बड़ी निवेश प्रतिबद्धताओं में से एक माना जा रहा है। इसके अलावा कनाडा पेंशन योजना निवेश बोर्ड ने सीटीआरएलएस डेटासेंटर्स के साथ साझेदारी में भारत के हाइपरस्केल डेटा सेंटर नेटवर्क के विस्तार के लिए 7,000 करोड़ रुपये तक निवेश करने की घोषणा की है।

फ्रांस और अमेरिका की कंपनियां भी आगे आईं

फ्रांस की निर्माण सामग्री क्षेत्र की प्रमुख कंपनी सेंट गोबेन ने अगले पांच वर्षों में भारत में अतिरिक्त एक अरब यूरो निवेश करने का फैसला किया है। कंपनी ने भारत को अपने सबसे तेजी से बढ़ते वैश्विक बाजारों में शामिल बताया है।

वहीं ई-कॉमर्स और क्लाउड सेवाओं की दिग्गज कंपनी अमेजन ने भी भारत को लेकर अपने निवेश लक्ष्य को बढ़ा दिया है। कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एंडी जेसी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के दौरान वर्ष 2030 तक भारत में कुल निवेश प्रतिबद्धता को 48 अरब डॉलर तक पहुंचाने की योजना की घोषणा की।

आखिर भारत क्यों बन रहा निवेश का केंद्र?

विश्लेषकों के अनुसार भारत की तेज आर्थिक वृद्धि, बढ़ता मध्यम वर्ग, डिजिटल क्रांति, मजबूत स्टार्टअप इकोसिस्टम और विनिर्माण क्षेत्र में बढ़ते अवसर विदेशी कंपनियों को आकर्षित कर रहे हैं। इसके अलावा वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में विविधता लाने की रणनीति के तहत भी कई कंपनियां भारत में अपनी मौजूदगी मजबूत कर रही हैं।

सूत्रों का कहना है कि निवेश की ये बड़ी घोषणाएं इस बात का संकेत हैं कि वैश्विक कंपनियां भारत को भविष्य की आर्थिक वृद्धि, तकनीकी नवाचार और औद्योगिक विस्तार के प्रमुख केंद्र के रूप में देख रही हैं। ऐसे समय में जब दुनिया के कई हिस्सों में आर्थिक और राजनीतिक अनिश्चितता बनी हुई है, भारत निवेशकों के लिए अपेक्षाकृत स्थिर और भरोसेमंद बाजार के रूप में उभर रहा है।

 

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