RBI का बड़ा फैसला! क्रेडिट डेरिवेटिव्स पर नए नियम लागू, कंपनियों और बैंकों के लिए जोखिम प्रबंधन हुआ आसान

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नई दिल्ली : भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने देश के क्रेडिट डेरिवेटिव्स बाजार को अधिक मजबूत और प्रभावी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इन नियमों का उद्देश्य भारतीय कॉर्पोरेट बॉन्ड बाजार को गहराई देना, वित्तीय संस्थानों को क्रेडिट जोखिम के बेहतर प्रबंधन की सुविधा देना और पूंजी बाजार में तरलता बढ़ाना है। केंद्रीय बजट में इस क्षेत्र को प्रोत्साहन देने की घोषणा के बाद RBI ने यह अहम फैसला लिया है।

नए नियमों के लागू होने के बाद कुछ श्रेणी के निवेशकों को क्रेडिट डेरिवेटिव्स उपकरणों के उपयोग में अधिक लचीलापन मिलेगा। इससे कंपनियों के लिए पूंजी जुटाने की प्रक्रिया आसान होने की संभावना है, वहीं वित्तीय बाजार में निवेश गतिविधियों को भी गति मिल सकती है। RBI का मानना है कि यह कदम भारतीय बॉन्ड बाजार को और अधिक प्रतिस्पर्धी तथा मजबूत बनाएगा।

किन निवेशकों को मिली राहत?

नए नियमों के तहत भारतीय निवासी गैर-रिटेल निवेशक, जिनमें बैंक, वित्तीय संस्थान और बड़ी कॉर्पोरेट कंपनियां शामिल हैं, अब क्रेडिट डिफॉल्ट स्वैप (CDS) और टोटल रिटर्न स्वैप (TRS) जैसे क्रेडिट डेरिवेटिव्स का उपयोग बिना किसी विशेष उद्देश्य की बाध्यता के कर सकेंगे। इससे उन्हें अपने वित्तीय जोखिमों का अधिक प्रभावी ढंग से प्रबंधन करने में मदद मिलेगी।

दूसरी ओर, विदेशी निवेशकों को इन साधनों का उपयोग केवल हेजिंग यानी संभावित वित्तीय नुकसान से सुरक्षा के उद्देश्य से ही करने की अनुमति दी गई है। वहीं छोटे निवेशकों के लिए पहले से लागू प्रतिबंध यथावत रखे गए हैं, ताकि उन्हें अत्यधिक जोखिम का सामना न करना पड़े।

नए नियमों में क्या-क्या बदलाव किए गए?

RBI ने स्पष्ट किया है कि व्यक्तिगत निवेशकों को छोड़कर अन्य रिटेल रेजिडेंशियल यूजर्स क्रेडिट डिफॉल्ट स्वैप का उपयोग केवल हेजिंग के लिए कर सकेंगे। इसके अलावा विदेशी निवेशकों के साथ होने वाले क्रेडिट डेरिवेटिव्स सौदों का निपटान भारतीय रुपये या विदेशी मुद्रा, दोनों में किया जा सकेगा।

हालांकि केंद्रीय बैंक ने ऋण आधारित क्रेडिट डेरिवेटिव्स को अनुमति देने की मांग को फिलहाल स्वीकार नहीं किया है। RBI का मानना है कि इससे बाजार में अतिरिक्त जोखिम पैदा हो सकता है। इसी वजह से ऐसे लेनदेन को अनुमति नहीं दी गई है, ताकि बाजार में पारदर्शिता और वित्तीय अनुशासन बना रहे।

बॉन्ड बाजार और अर्थव्यवस्था को मिलेगा फायदा

विशेषज्ञों का मानना है कि नए नियम भारतीय कॉर्पोरेट बॉन्ड बाजार के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। कंपनियां अपने क्रेडिट जोखिम को अधिक प्रभावी तरीके से दूसरे पक्षों को हस्तांतरित कर सकेंगी, जिससे बॉन्ड जारी करना आसान होगा और निवेशकों का भरोसा भी बढ़ेगा।

इसके साथ ही बाजार में तरलता बढ़ने, निवेश के नए अवसर पैदा होने और वित्तीय संस्थानों की बैलेंस शीट को अधिक सुरक्षित बनाने में मदद मिलेगी। बैंक और अन्य वित्तीय संस्थान जोखिम प्रबंधन के आधुनिक साधनों का बेहतर उपयोग कर सकेंगे, जिससे पूरे वित्तीय तंत्र की मजबूती बढ़ेगी।

वैश्विक मानकों की ओर बढ़ेगा भारतीय बाजार

RBI का यह कदम भारतीय क्रेडिट डेरिवेटिव्स बाजार को अंतरराष्ट्रीय मानकों के करीब ले जाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जानकारों का कहना है कि इससे कंपनियों की फंड जुटाने की लागत कम हो सकती है, निवेशकों के लिए नए अवसर खुल सकते हैं और भारतीय वित्तीय बाजार की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता में भी वृद्धि होगी।

 

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