रणबीर की ‘रामायण’ और प्रभास की ‘आदिपुरुष’ में बड़ा फर्क, राम-रावण से लेकर युद्ध तक ऐसे बदली पौराणिक दुनिया

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नई दिल्ली: नितेश तिवारी की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘रामायण’ को लेकर दर्शकों की उत्सुकता लगातार बढ़ रही है। फिल्म के सामने आए शुरुआती दृश्यों के बाद इसकी तुलना 2023 में रिलीज हुई ओम राउत की ‘आदिपुरुष’ से भी हो रही है। दोनों फिल्मों की कहानी रामायण पर आधारित है, लेकिन दृश्य शैली, किरदारों के रूप, युद्ध के चित्रण और पौराणिक दुनिया को पर्दे पर उतारने के तरीके में दोनों के बीच बड़ा अंतर नजर आता है।

‘रामायण’ में रणबीर कपूर भगवान राम और साई पल्लवी सीता की भूमिका में हैं। वहीं ‘आदिपुरुष’ में प्रभास ने राम और कृति सेनन ने सीता का किरदार निभाया था। दोनों फिल्मों में मुख्य पात्रों की प्रस्तुति को लेकर दर्शकों की अपेक्षाएं अलग रही हैं और सामने आए दृश्यों से भी इनके अलग सिनेमाई दृष्टिकोण की झलक मिलती है।

भगवान विष्णु के चित्रण में भी अलग अंदाज

‘रामायण’ में भगवान विष्णु से जुड़े दृश्य को शांत, दिव्य और ब्रह्मांडीय प्रभाव वाला दिखाया गया है। नीली आभा के बीच चार भुजाओं वाले विष्णु स्वरूप को चक्र और कमल के साथ प्रस्तुत किया गया है। दूसरी ओर ‘आदिपुरुष’ में विष्णु से संबंधित दृश्य को अधिक भव्य और दृश्य प्रभावों पर आधारित रूप में दिखाया गया था, जहां विशाल संरचना और कंप्यूटर जनित प्रभाव प्रमुख नजर आए।

राम-सीता के रिश्ते में सादगी बनाम नाटकीयता

राम और सीता के रिश्ते को पेश करने के तरीके में भी दोनों फिल्मों का अंतर दिखाई देता है। ‘रामायण’ के सामने आए दृश्यों में रणबीर कपूर और साई पल्लवी के बीच के प्रसंग को सादगी और भावनात्मक जुड़ाव पर केंद्रित रखा गया है।

इसके विपरीत ‘आदिपुरुष’ में प्रभास और कृति सेनन के दृश्यों को अधिक नाटकीय पृष्ठभूमि और कंप्यूटर जनित प्रभावों के साथ पेश किया गया था। दोनों फिल्मों में प्रेम और संबंधों की अभिव्यक्ति का तरीका उनके अलग दृश्य दृष्टिकोण को सामने रखता है।

रावण के लुक में यश और सैफ का अलग रूप

रावण के किरदार की डिजाइनिंग में भी दोनों फिल्मों के बीच बड़ा अंतर नजर आता है। ‘रामायण’ में यश का रावण पारंपरिक राजसी प्रभाव के साथ दिखाई देता है। सुनहरे परिधान और भारतीय शैली में तैयार किया गया उनका रूप किरदार को भव्यता देता है।

वहीं ‘आदिपुरुष’ में सैफ अली खान के रावण को गहरे रंगों और अपेक्षाकृत आधुनिक खलनायक वाली शैली में प्रस्तुत किया गया था। दोनों फिल्मों में रावण के रूप को लेकर अपनाया गया दृष्टिकोण एक-दूसरे से काफी अलग है।

युद्ध के दृश्यों में भी बदली सिनेमाई भाषा

युद्ध के दृश्यों में ‘रामायण’ का दृश्य उपचार अपेक्षाकृत प्राकृतिक और जमीन से जुड़ा हुआ दिखाई देता है। धूल, हथियारों और योद्धाओं की गतिविधियों को वास्तविक वातावरण के करीब रखने की कोशिश नजर आती है।

‘आदिपुरुष’ में युद्ध के दौरान गहरे रंगों और भारी दृश्य प्रभावों का इस्तेमाल अधिक प्रमुख था। इसकी वजह से फिल्म की दुनिया कई जगह आधुनिक खेलों या एनिमेशन जैसी दिखाई देती थी।

कुंभकर्ण और राक्षसी पात्रों की प्रस्तुति अलग

कुंभकर्ण समेत अन्य राक्षसी पात्रों को दिखाने में भी दोनों फिल्मों की तकनीकी शैली अलग नजर आती है। ‘रामायण’ में विशालकाय पात्रों को प्राकृतिक परिवेश, आग और धुएं जैसे तत्वों के साथ जोड़ा गया है।

वहीं ‘आदिपुरुष’ में महल, दीवारों और प्रकाश व्यवस्था के जरिए अधिक काल्पनिक और गहरे वातावरण को तैयार किया गया था। इस अंतर से दोनों फिल्मों की दृश्य कल्पना अलग-अलग दिखाई देती है।

राम के धनुष-बाण वाले अंदाज में भी अंतर

राम के धनुष-बाण वाले दृश्यों में भी दोनों फिल्मों का दृष्टिकोण अलग है। ‘रामायण’ में रणबीर कपूर का राम रूप शांत और संयमित मुद्रा में दिखाई देता है। इसके विपरीत ‘आदिपुरुष’ में प्रभास के राम को अधिक आक्रामक और आधुनिक एक्शन शैली के साथ प्रस्तुत किया गया था।

सीता के रूप और वनवास के दृश्यों में सादगी

सीता के वनवास और हरण से जुड़े दृश्यों में भी ‘रामायण’ पारंपरिक भारतीय सौंदर्य और सादगी पर जोर देती नजर आती है। साई पल्लवी का रूप मर्यादित रखा गया है, जबकि ‘आदिपुरुष’ में कृति सेनन के दृश्यों में गहरे रंगों और कंप्यूटर जनित प्रभावों का इस्तेमाल अधिक दिखाई देता था।

वनवास के दौरान राम, सीता और लक्ष्मण के परिधान भी दोनों फिल्मों की अलग सोच को दर्शाते हैं। ‘रामायण’ में सूती भगवा वस्त्र, रुद्राक्ष और सादगीपूर्ण रूप दिखाई देता है। वहीं ‘आदिपुरुष’ में परिधानों के डिजाइन और बनावट को अपेक्षाकृत आधुनिक तरीके से तैयार किया गया था।

इस तरह दोनों फिल्मों की मूल कहानी रामायण पर आधारित होने के बावजूद उनकी सिनेमाई भाषा अलग नजर आती है। ‘रामायण’ के सामने आए दृश्य पारंपरिक भारतीय सौंदर्य, प्राकृतिक वातावरण और आध्यात्मिक भाव पर ज्यादा केंद्रित दिखाई देते हैं, जबकि ‘आदिपुरुष’ ने पौराणिक कथा को आधुनिक दृश्य प्रभावों और कल्पनात्मक शैली के जरिए पर्दे पर उतारने की कोशिश की थी।

 

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