नीरव मोदी को ब्रिटेन में बड़ा झटका! बैंक फ्रॉड केस में 100 करोड़ रुपये से ज्यादा चुकाने का आदेश
नई दिल्ली: भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी की कानूनी मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। ब्रिटेन की हाईकोर्ट ने बैंक धोखाधड़ी से जुड़े मामले में उनके खिलाफ महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए 100 करोड़ रुपये से अधिक की देनदारी चुकाने का आदेश दिया है। अदालत ने माना कि नीरव मोदी द्वारा दी गई व्यक्तिगत गारंटी पूरी तरह वैध है और उसे लागू किया जा सकता है।
ब्रिटिश हाईकोर्ट के न्यायाधीश साइमन टिंकलर ने अपने आदेश में कहा कि कारोबारी की ओर से दी गई व्यक्तिगत गारंटी कानूनी रूप से प्रभावी है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, नीरव मोदी पर 4.1 मिलियन अमेरिकी डॉलर यानी करीब 38.9 करोड़ रुपये की मूल बकाया राशि है। ब्याज और अन्य देनदारियों को जोड़ने पर यह रकम 100 करोड़ रुपये से अधिक पहुंच सकती है।
अदालत में नहीं मिला ठोस बचाव
सुनवाई के दौरान नीरव मोदी या उनके कानूनी प्रतिनिधियों की ओर से ऐसा कोई ठोस तर्क प्रस्तुत नहीं किया गया, जिससे बैंक के दावे को चुनौती दी जा सके। बचाव पक्ष ने यह जरूर कहा कि संबंधित गारंटी लागू नहीं की जा सकती और बैंक द्वारा भेजे गए मांग पत्र उन्हें प्राप्त नहीं हुए थे।
हालांकि अदालत ने उपलब्ध दस्तावेजों और साक्ष्यों की समीक्षा के बाद इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया।
2012 के ऋण से जुड़ा है पूरा मामला
यह मामला जुलाई 2012 में दिए गए उस ऋण से जुड़ा है, जिसे बैंक ऑफ इंडिया ने नीरव मोदी की दुबई स्थित कंपनी फायरस्टार डायमंड एफजेडई को प्रदान किया था। इसके बाद 3 अगस्त 2013 को नीरव मोदी ने इस कर्ज के लिए व्यक्तिगत गारंटी दी थी, जिसके आधार पर बैंक ने बाद में वसूली की कार्रवाई शुरू की।
PNB घोटाले के बाद शुरू हुई वसूली प्रक्रिया
वर्ष 2018 में पंजाब नेशनल बैंक से जुड़े कथित घोटाले के सामने आने के बाद बैंक ऑफ इंडिया ने ऋण वसूली की प्रक्रिया तेज कर दी। मार्च और अप्रैल 2018 में कंपनी और नीरव मोदी को भुगतान संबंधी नोटिस भेजे गए, लेकिन उनकी ओर से कोई जवाब नहीं दिया गया।
इसके बाद बैंक ने कानूनी कार्रवाई जारी रखी और 8 मार्च 2024 को मूल राशि और ब्याज की वसूली के लिए सारांश निर्णय प्राप्त किया। अक्टूबर 2025 में भी नीरव मोदी को एक और मांग पत्र जारी किया गया था।
ईमेल बना अदालत में अहम साक्ष्य
न्यायाधीश साइमन टिंकलर ने अपने फैसले में फरवरी 2018 के बाद फायरस्टार समूह की कंपनियों की वित्तीय स्थिति का भी उल्लेख किया। अदालत ने 17 फरवरी 2018 को नीरव मोदी द्वारा बैंक को भेजे गए एक ईमेल को महत्वपूर्ण साक्ष्य माना।
इस ईमेल में कारोबारी ने स्वीकार किया था कि मीडिया में चल रहे विवादों के कारण उनका व्यवसाय प्रभावित हुआ है और बैंकों की देनदारियां चुकाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
नोटिस नहीं मिलने का दावा अदालत ने किया खारिज
नीरव मोदी ने अदालत में यह दावा किया था कि उन्हें वर्ष 2018 और 2025 में भेजे गए मांग पत्र प्राप्त नहीं हुए थे। हालांकि अदालत ने उपलब्ध रिकॉर्ड और साक्ष्यों के आधार पर इस दावे को खारिज कर दिया।
न्यायाधीश ने माना कि दोनों नोटिस विधिवत तरीके से भेजे गए थे और नीरव मोदी तक उनकी जानकारी पहुंची थी। इसी आधार पर अदालत ने व्यक्तिगत गारंटी को पूरी तरह लागू करने योग्य मानते हुए बैंक के पक्ष में फैसला सुनाया।
बढ़ सकती हैं कानूनी चुनौतियां
अदालत के इस फैसले को नीरव मोदी के लिए बड़ा कानूनी झटका माना जा रहा है। पहले से विभिन्न वित्तीय और कानूनी मामलों का सामना कर रहे कारोबारी के लिए यह आदेश भविष्य की कानूनी चुनौतियों को और जटिल बना सकता है।





