अनिल अंबानी से जुड़े मामले में CBI का बड़ा एक्शन, 1200 करोड़ के कथित लोन दुरुपयोग केस में पहली चार्जशीट दाखिल

00000000000000000-3

नई दिल्ली: रिलायंस समूह से जुड़े मामलों में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 16 आरोपी संस्थाओं और व्यक्तियों के खिलाफ अपनी पहली चार्जशीट दाखिल कर दी है। इस चार्जशीट में रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड और कंपनी के पांच वरिष्ठ अधिकारियों के अलावा भारतीय स्टेट बैंक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र और तत्कालीन सिंडिकेट बैंक के 10 अधिकारियों को आरोपी बनाया गया है। सभी पर आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, धन के कथित दुरुपयोग और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आपराधिक कदाचार जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। जांच एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि मामले की जांच अभी जारी है और आगे सप्लीमेंट्री चार्जशीट भी दाखिल की जा सकती हैं।

करीब 1200 करोड़ रुपये के लोन के कथित दुरुपयोग का मामला

सीबीआई अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई रिलायंस कम्युनिकेशंस को दिए गए लगभग 1,200 करोड़ रुपये के लोन के कथित दुरुपयोग से जुड़ी जांच का हिस्सा है। जांच के दायरे में भारतीय स्टेट बैंक द्वारा स्वीकृत 500 करोड़ रुपये का टर्म लोन, बैंक ऑफ महाराष्ट्र की 350 करोड़ रुपये की लेटर ऑफ क्रेडिट सुविधा और सिंडिकेट बैंक की 350 करोड़ रुपये की एलओसी सुविधा शामिल है। जांच एजेंसी का दावा है कि इन फंड्स के उपयोग में गंभीर अनियमितताओं के संकेत सामने आए हैं।

एसबीआई की शिकायत पर दर्ज हुआ था मामला

सीबीआई ने यह मामला भारतीय स्टेट बैंक की शिकायत के आधार पर दर्ज किया था। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि रिलायंस कम्युनिकेशंस के कारण बैंक को करीब 2,929.05 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। जांच एजेंसी के मुताबिक, कंपनी को 11 बैंकों के कंसोर्टियम के माध्यम से ऋण उपलब्ध कराया गया था, जिसकी अगुवाई एसबीआई कर रहा था। इस पूरे मामले से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जांच के तहत सीबीआई ने रिलायंस समूह की अन्य कंपनियों से संबंधित कुल छह एफआईआर भी दर्ज की हैं।

देश के कई शहरों में हुई थी सीबीआई की छापेमारी

इससे पहले सीबीआई ने धोखाधड़ी से जुड़े मामले में रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड के खिलाफ व्यापक तलाशी अभियान चलाया था। 14 मई को एजेंसी के प्रवक्ता ने बताया था कि मुंबई, गुरुग्राम और बेंगलुरु में कंपनी के तत्कालीन सीईओ, सीएफओ और निदेशकों के आवासीय परिसरों पर छापेमारी की गई थी। ये अधिकारी वर्ष 2015 से 2017 के दौरान कंपनी में अपनी सेवाएं दे चुके थे। इससे पहले भी सीबीआई 31 स्थानों पर तलाशी अभियान चला चुकी है और कंपनी के दो वरिष्ठ अधिकारियों को गिरफ्तार कर चुकी है।

ईडी ने भी की थी 3,034.90 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क

गौरतलब है कि अप्रैल महीने में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बैंक धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड और उसके प्रमोटर अनिल अंबानी से जुड़ी 3,034.90 करोड़ रुपये की संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया था। कुर्क की गई संपत्तियों में दक्षिण मुंबई स्थित फ्लैट, खंडाला का फार्महाउस, अहमदाबाद के साणंद में स्थित भूखंड और प्रमोटर समूह की कंपनी के पास मौजूद रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के 7.71 करोड़ शेयर शामिल थे।