UPI पेमेंट पर लग सकता है शुल्क? संसद में पेश हुआ बिल, बड़े व्यापारियों पर MDR लागू करने की तैयारी
नई दिल्ली: देश में डिजिटल भुगतान प्रणाली को लेकर बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। केंद्र सरकार ने यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) से जुड़े भुगतान कानूनों में संशोधन का विधेयक संसद में पेश किया है। प्रस्तावित बदलावों के बाद बड़े व्यापारियों से मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) वसूलने का रास्ता खुल सकता है। हालांकि फिलहाल यह शुल्क ग्राहकों पर नहीं, बल्कि व्यापारियों पर लागू करने पर विचार किया जा रहा है।
दो विकल्पों पर चल रहा विचार
सरकारी स्तर पर फिलहाल दो प्रस्तावों पर मंथन किया जा रहा है। पहला, एक तय सीमा से अधिक राशि वाले UPI लेनदेन पर MDR लागू किया जाए। दूसरा, व्यापारी के वार्षिक कारोबार के आधार पर शुल्क निर्धारित किया जाए। सूत्रों के अनुसार, प्रस्ताव यह भी है कि केवल बड़े व्यापारियों से शुल्क लिया जाए, जबकि छोटे कारोबारियों और उपभोक्ताओं के लिए UPI भुगतान पहले की तरह निशुल्क बना रहे।
कितना लग सकता है शुल्क?
सरकारी सूत्रों के अनुसार, एक प्रस्ताव में 1.5 करोड़ रुपये से अधिक वार्षिक कारोबार वाले व्यापारियों के 2,000 रुपये से अधिक के UPI लेनदेन पर 0.3 प्रतिशत से 0.5 प्रतिशत तक MDR लगाने का सुझाव दिया गया है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2,000 रुपये से अधिक के लेनदेन कुल ट्रांजैक्शन की संख्या का केवल 4 प्रतिशत हैं, लेकिन कुल लेनदेन मूल्य में इनकी हिस्सेदारी लगभग 67 प्रतिशत है।
संसद में पेश हुआ संशोधन विधेयक
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम में संशोधन संबंधी विधेयक पेश किया। उद्योग और नियामक क्षेत्र से जुड़े सूत्रों के अनुसार, इस संशोधन के जरिए डिजिटल भुगतान पर MDR लागू करने के लिए कानूनी आधार तैयार किया जा सकता है। हालांकि अभी यह तय नहीं हुआ है कि शुल्क कितना होगा और किन लेनदेन पर इसे लागू किया जाएगा।
देश में तेजी से बढ़ा UPI का इस्तेमाल
UPI आज दुनिया की सबसे बड़ी रियल-टाइम डिजिटल भुगतान प्रणालियों में शामिल है। जुलाई महीने में इसके माध्यम से 23.6 अरब लेनदेन हुए, जिनका कुल मूल्य 29.9 लाख करोड़ रुपये दर्ज किया गया। डिजिटल भुगतान के इस क्षेत्र में कई प्रमुख प्लेटफॉर्म सक्रिय हैं और देशभर में करोड़ों लोग रोजमर्रा के भुगतान के लिए UPI का उपयोग कर रहे हैं।
MDR लागू करने की जरूरत क्यों महसूस हुई?
उद्योग से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि UPI लेनदेन पर किसी प्रकार का शुल्क नहीं मिलने के कारण भुगतान सेवा प्रदाताओं के लिए लगातार निवेश करना चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। उनका मानना है कि डिजिटल भुगतान नेटवर्क के विस्तार और संचालन के लिए वित्तीय संसाधनों की आवश्यकता होती है, जिसे देखते हुए MDR लागू करने का प्रस्ताव सामने आया है।
क्या होता है MDR?
मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) वह शुल्क होता है, जो व्यापारी डिजिटल भुगतान स्वीकार करने पर बैंक और भुगतान सेवा प्रदाताओं को देते हैं। वर्तमान में भारत में क्रेडिट कार्ड लेनदेन पर सामान्य तौर पर लगभग 1.5 प्रतिशत और डेबिट कार्ड पर 0.9 प्रतिशत तक MDR लागू है, जबकि UPI लेनदेन पर अभी व्यापारियों से कोई MDR नहीं लिया जाता।





