भारत समेत 54 देशों पर अमेरिका का नया टैरिफ प्रस्ताव, व्यापार वार्ता के बीच बढ़ी चिंता
नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की कोशिशों के बीच एक नया विवाद सामने आ गया है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) ने भारत सहित 54 देशों पर अतिरिक्त 12.5 प्रतिशत शुल्क लगाने का प्रस्ताव रखा है। यह प्रस्ताव उन देशों के खिलाफ लाया गया है, जिन पर बंधुआ मजदूरी से निर्मित वस्तुओं के आयात को रोकने और उस पर प्रभावी कार्रवाई नहीं करने का आरोप है।
इस प्रस्ताव ने ऐसे समय में चर्चा तेज कर दी है, जब नई दिल्ली और वाशिंगटन के बीच व्यापार समझौते पर महत्वपूर्ण स्तर की बातचीत चल रही है। ऐसे में इसे दोनों देशों के आर्थिक संबंधों के लिए एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।
बंधुआ मजदूरी से जुड़े आरोपों पर कार्रवाई की तैयारी
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय के अनुसार, 60 देशों के खिलाफ शुरू की गई जांच के बाद यह प्रस्ताव सामने आया है। जांच में यह आकलन किया गया कि संबंधित देश बंधुआ मजदूरी से बनी वस्तुओं के आयात पर प्रतिबंध लगाने और उसे प्रभावी ढंग से लागू करने में कितने सक्षम हैं।
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर ने कहा कि प्रमुख व्यापारिक साझेदारों द्वारा इस तरह की वस्तुओं के आयात पर रोक लगाने में विफलता स्वीकार्य नहीं है। उनका कहना है कि इससे अमेरिकी श्रमिकों को वैश्विक बाजार में असमान प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है।
क्या है धारा 301 का प्रावधान?
यह प्रस्ताव अमेरिकी व्यापार अधिनियम 1974 की धारा 301 के तहत की गई जांच के आधार पर रखा गया है। यह प्रावधान अमेरिका को उन देशों की व्यापार नीतियों की जांच करने का अधिकार देता है, जिन्हें वह अपने व्यापारिक हितों के लिए अनुचित या भेदभावपूर्ण मानता है।
यदि जांच में किसी देश की नीतियां अमेरिकी व्यापार के लिए नुकसानदायक पाई जाती हैं, तो अमेरिका अतिरिक्त शुल्क, व्यापारिक प्रतिबंध या अन्य सुधारात्मक कदम उठा सकता है।
भारत ने आरोपों को किया खारिज
भारत ने बंधुआ मजदूरी से जुड़े आरोपों को अस्वीकार करते हुए अमेरिका से इन जांचों को समाप्त करने की मांग की है। भारत का कहना है कि ऐसे मुद्दों का समाधान दोनों देशों के बीच चल रही व्यापार वार्ताओं के माध्यम से किया जाना चाहिए।
वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार भारत इस मामले पर अमेरिका के साथ लगातार संपर्क में है और पूर्व में घोषित द्विपक्षीय समझौते के ढांचे के अनुरूप बातचीत जारी है।
अभी अंतिम नहीं है प्रस्ताव
वाणिज्य मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि प्रस्तावित अतिरिक्त शुल्क अभी अंतिम रूप से लागू नहीं किए गए हैं। प्रभावित पक्षों और हितधारकों को अपनी आपत्तियां और सुझाव प्रस्तुत करने का अवसर दिया गया है।
जानकारी के अनुसार सार्वजनिक सुनवाई में भाग लेने के लिए 22 जून 2026 तक आवेदन किए जा सकते हैं, जबकि लिखित टिप्पणियां 6 जुलाई 2026 तक जमा कराई जा सकेंगी। प्रस्ताव पर सार्वजनिक सुनवाई 7 जुलाई 2026 को आयोजित की जाएगी।
कुछ उत्पादों को मिल सकती है राहत
प्रस्ताव के तहत कुछ विशेष श्रेणी के उत्पादों को अतिरिक्त शुल्क से बाहर रखने की भी व्यवस्था की गई है। इसके अलावा कपड़ा और परिधान क्षेत्र के लिए अलग व्यवस्था का सुझाव दिया गया है, जिसके तहत कुछ देशों से निर्धारित मात्रा तक आयात को कम शुल्क पर अनुमति मिल सकती है।
भारत के लिए क्या हो सकता है असर?
यदि प्रस्तावित अतिरिक्त शुल्क लागू होता है, तो भारतीय निर्यातकों पर दबाव बढ़ सकता है। विशेष रूप से वे उद्योग प्रभावित हो सकते हैं जिनका अमेरिकी बाजार में बड़ा हिस्सा है। हालांकि अंतिम निर्णय से पहले दोनों देशों के बीच जारी व्यापार वार्ता और सार्वजनिक सुनवाई की प्रक्रिया महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते आर्थिक संबंधों को देखते हुए दोनों पक्ष किसी संतुलित समाधान की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।



