मदीना में 11 करोड़ टन खनिज अयस्क का अनुमान, सऊदी अरब का बड़ा दावा; रेयर अर्थ के साथ यूरेनियम की भी संभावना

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नई दिल्ली: इस्लाम के पवित्र शहर मदीना से जुड़ी एक बड़ी खनिज खोज ने सऊदी अरब की आर्थिक और ऊर्जा रणनीति को लेकर चर्चा तेज कर दी है। सऊदी अरब ने मदीना के जबल सैयद प्रोजेक्ट में करीब 11 करोड़ टन यानी 110 मिलियन टन अयस्क संसाधन होने का अनुमान जताया है। सऊदी ऊर्जा मंत्री प्रिंस अब्दुलअजीज बिन सलमान के मुताबिक, भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण और खोज के दौरान इस अयस्क में हेवी रेयर अर्थ एलिमेंट्स की उच्च सांद्रता के साथ यूरेनियम की भी उत्साहजनक संभावनाएं सामने आई हैं।

हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि मदीना में 11 करोड़ टन शुद्ध यूरेनियम मिला है। 110 मिलियन टन का आंकड़ा कुल अनुमानित अयस्क संसाधन का है, जिसमें रेयर अर्थ तत्वों और यूरेनियम की सांद्रता मिलने की बात कही गई है। इन संसाधनों की वास्तविक मात्रा और व्यावसायिक उपयोग की संभावनाएं आगे की जांच और प्रसंस्करण के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगी।

जबल सैयद में सर्वे के बाद सामने आया बड़ा अनुमान

‘अरब न्यूज’ के मुताबिक, सऊदी ऊर्जा मंत्री ने जबल सैयद परियोजना में हुए भूवैज्ञानिक अध्ययनों के आधार पर 110 मिलियन टन अयस्क संसाधनों का अनुमान बताया है। इस खोज की सबसे अहम बात इसमें हेवी रेयर अर्थ एलिमेंट्स की उच्च सांद्रता और यूरेनियम की मौजूदगी की संभावना है।

अगर विस्तृत परीक्षणों में इन संसाधनों को बड़े पैमाने पर निकालने योग्य पाया जाता है, तो यह सऊदी अरब के लिए सिर्फ खनन क्षेत्र की उपलब्धि नहीं होगी। इससे ऊर्जा और हाई-टेक उद्योगों की भविष्य की जरूरतों को पूरा करने की दिशा में भी देश को महत्वपूर्ण बढ़त मिल सकती है।

मदीना की वजह से बढ़ा खोज का रणनीतिक महत्व

मदीना इस्लाम के सबसे पवित्र शहरों में शामिल है। पैगंबर मोहम्मद ने 622 ईस्वी में मक्का से मदीना की ओर हिजरत की थी। इसके बाद यह शुरुआती इस्लामी समुदाय का प्रमुख केंद्र बना। ऐसे धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र में रणनीतिक खनिज संसाधनों की खोज सामने आने से इसका महत्व केवल आर्थिक नहीं रह जाता।

यह खबर ऐसे समय सामने आई है जब मध्य पूर्व में सुरक्षा, ऊर्जा और परमाणु कार्यक्रमों को लेकर तनाव अंतरराष्ट्रीय चर्चा का विषय बना हुआ है। क्षेत्रीय शक्ति संतुलन में सऊदी अरब की अहम भूमिका है, जबकि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका और इजरायल लंबे समय से चिंता जताते रहे हैं। ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण और नागरिक उद्देश्यों के लिए है।

तेल पर निर्भरता घटाने की रणनीति से जुड़ी खोज

खनिज संसाधनों की यह खोज सऊदी अरब की Vision 2030 रणनीति से भी जुड़ी मानी जा रही है। दुनिया के बड़े तेल उत्पादकों में शामिल सऊदी अरब अब अपनी अर्थव्यवस्था को केवल तेल पर निर्भर रखने के बजाय खनन, अक्षय ऊर्जा और नागरिक परमाणु ऊर्जा जैसे क्षेत्रों का विस्तार करना चाहता है।

इसी रणनीति के तहत देश में घरेलू यूरेनियम संसाधनों की खोज और उनके संभावित इस्तेमाल पर भी काम किया जा रहा है। अगर रेयर अर्थ मिनरल्स के बड़े संसाधन की पुष्टि होती है, तो सऊदी अरब के लिए हाई-टेक और औद्योगिक क्षेत्र में अपनी भूमिका बढ़ाने के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।

यूरेनियम मिलने का मतलब सीधे परमाणु ईंधन तैयार होना नहीं

यूरेनियम की मौजूदगी की संभावना सामने आने के बावजूद इसे सीधे परमाणु ईंधन से जोड़ना सही नहीं होगा। प्राकृतिक अवस्था में मौजूद यूरेनियम अयस्क को पहले खनन और कई प्रसंस्करण चरणों से गुजरना पड़ता है। इसके बाद कन्वर्जन और जरूरत के अनुसार संवर्धन यानी enrichment जैसी प्रक्रियाओं के जरिए परमाणु ईंधन तैयार किया जाता है।

सऊदी अरब पहले से ही नागरिक परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। अमेरिका और सऊदी अरब के बीच इस क्षेत्र में सहयोग को लेकर बातचीत और समझौते भी हुए हैं। ऐसे में घरेलू यूरेनियम संसाधनों की उपलब्धता भविष्य की ऊर्जा रणनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

रेयर अर्थ से हाई-टेक और रक्षा उद्योग को मिल सकता है फायदा

रेयर अर्थ एलिमेंट्स को आधुनिक उद्योगों के लिए बेहद महत्वपूर्ण कच्चा माल माना जाता है। इनका इस्तेमाल इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक वाहन, पवन ऊर्जा, रक्षा उपकरण और कई हाई-टेक उत्पादों में किया जाता है।

यही वजह है कि जबल सैयद क्षेत्र में अनुमानित अयस्क संसाधनों की उपयोगिता केवल ऊर्जा क्षेत्र तक सीमित नहीं होगी। अगर आगे की जांच में इनका बड़े पैमाने पर व्यावसायिक दोहन संभव पाया जाता है, तो इससे सऊदी अरब की ऊर्जा सुरक्षा, खनन क्षमता और औद्योगिक रणनीति को एक साथ मजबूती मिल सकती है।

फिलहाल 110 मिलियन टन का आंकड़ा अनुमानित कुल अयस्क संसाधन का है। इसमें से वास्तविक रूप से कितना यूरेनियम और कितने रेयर अर्थ तत्व निकाले जा सकते हैं, इसकी तस्वीर आगे होने वाले विस्तृत मूल्यांकन और व्यावसायिक अध्ययन के बाद ही साफ होगी।

 

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