भारत की अंतरिक्ष उड़ान को मिली नई रफ्तार, 2035 तक अपना स्पेस स्टेशन बनाने की तैयारी; निजी कंपनियों और युवाओं पर बड़ा दांव
नई दिल्ली: भारत का अंतरिक्ष क्षेत्र लगातार नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है और अब देश 2035 तक अपना अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस के मौके पर केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि 100 प्रक्षेपणों और कक्षा में 548 उपग्रह स्थापित किए जाने के साथ भारत का अंतरिक्ष क्षेत्र नई ऊंचाइयों पर पहुंच रहा है। उन्होंने अंतरिक्ष क्षेत्र में युवाओं और निजी स्टार्टअप्स की बढ़ती भागीदारी को अहम बताया।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि चंद्रयान-1 और मंगलयान से लेकर चंद्रयान-3 और आदित्य-एल1 तक भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम देश की वैज्ञानिक क्षमता, महत्वाकांक्षा और नवाचार की भावना को दर्शाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विकसित भारत की दिशा में आगे बढ़ते हुए अंतरिक्ष कार्यक्रम तकनीकी रूप से उन्नत और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
2035 तक भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन बनाने का लक्ष्य
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के चेयरमैन डॉ. वी. नारायणन ने रविवार को कहा कि भारत 2035 तक अपना अंतरिक्ष स्टेशन बनाने की दिशा में काम कर रहा है। प्रस्तावित भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन के पहले मॉड्यूल को मंजूरी भी मिल चुकी है।
अहमदाबाद में तीसरे राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि देश अब कई क्षेत्रों में अंतरिक्ष आधारित तकनीक और सेवाओं का इस्तेमाल कर रहा है, जिनका सीधा लाभ आम नागरिकों को मिल रहा है। उन्होंने बताया कि भारत ने 64 साल पहले अपना अंतरिक्ष कार्यक्रम शुरू किया था और आज 50 से अधिक क्षेत्रों में अंतरिक्ष तकनीक के जरिए आम लोगों की सेवा की जा रही है।
केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने भी समारोह में अंतरिक्ष क्षेत्र में भागीदारी बढ़ाने के लिए सरकार की ओर से किए जा रहे प्रयासों पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में निजी भागीदारी बढ़ने से भारत के सामने बड़ी संभावनाओं के दरवाजे खुले हैं।
विदेश गए वैज्ञानिकों की वापसी पर पीएम मोदी ने जताई खुशी
इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अंतरिक्ष क्षेत्र के 20 स्टार्टअप के संस्थापकों और मुख्य कार्यकारी अधिकारियों के साथ संवाद किया था। इस दौरान उन्होंने कहा कि विदेश चले गए वैज्ञानिक अब वापस स्वदेश लौट रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत में ऐसा माहौल तैयार करने की जरूरत है, जिससे दुनिया के लोगों को लगे कि अगर उन्हें अपना करियर बनाना है तो उन्हें भारत का रुख करना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने कहा कि युवा उद्यमियों की नवाचार क्षमता दुनिया के बेहतरीन प्रतिभाशाली लोगों को भारत की ओर आकर्षित कर सकती है। संवाद के दौरान एक कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने बताया कि अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोले जाने के बाद सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहे हैं और अमेरिका तथा यूरोप में काम कर रहे कई भारतीय नागरिक वापस लौटकर देश में काम करना चाहते हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में अंतरिक्ष क्षेत्र का वैश्विक केंद्र बनने की पूरी क्षमता है। उन्होंने भारत को दुनिया के लिए अंतरिक्ष नवाचार का मार्गदर्शक बनाने का लक्ष्य रखने और शोध-अनुसंधान के लिए मजबूत माहौल तैयार करने पर जोर दिया।
पीएम मोदी ने बताईं भारत की तीन बड़ी ताकतें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की तीन प्रमुख ताकतों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत किफायती और गुणवत्तापूर्ण तकनीक उपलब्ध कराने के मामले में दुनिया में मजबूत स्थिति रखता है। इसके साथ ही देश के पास वैज्ञानिकों और तकनीकी विशेषज्ञों का व्यापक प्रतिभा आधार मौजूद है।
प्रधानमंत्री ने भारतीय युवाओं की जोखिम उठाने की क्षमता को भी देश की बड़ी ताकत बताया। उनके मुताबिक, भारतीय युवाओं में नए प्रयोग करने और जोखिम लेने का स्वाभाविक साहस मौजूद है।
अंतरिक्ष में दवा बनाने की तैयारी कर रहे स्टार्टअप
प्रधानमंत्री के साथ बातचीत के दौरान अंतरिक्ष क्षेत्र के स्टार्टअप संस्थापकों ने कई नई योजनाओं की जानकारी दी। एक मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने बताया कि उनकी कंपनी ऐसे उपग्रह विकसित कर रही है, जो अंतरिक्ष में दवाओं का निर्माण करने और फिर उन्हें पृथ्वी पर वापस लाने में सक्षम होंगे।
अंतरिक्ष कंपनियों के प्रमुखों ने बताया कि उनका लक्ष्य 2027 के मध्य तक हर महीने एक प्रक्षेपण करने का है। बातचीत में यह भी बताया गया कि भारत की पहली अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी यूनिकॉर्न स्काईरूट एयरोस्पेस ने भारत का पहला निजी रॉकेट सफलतापूर्वक कक्षा में भेजा है। कंपनियों की योजना आगे हर सप्ताह और फिर प्रतिदिन कई प्रक्षेपण करने की दिशा में बढ़ने की है।
वैश्विक जमीनी स्टेशन नेटवर्क बनाने की भी तैयारी
एक अन्य स्टार्टअप प्रमुख ने प्रधानमंत्री को बताया कि उनकी कंपनी अगले डेढ़ साल में वैश्विक जमीनी स्टेशन नेटवर्क तैयार करने की दिशा में काम कर रही है। प्रधानमंत्री ने इस योजना के लिए कंपनियों को शुभकामनाएं दीं।
निवेशकों के भारतीय अंतरिक्ष स्टार्टअप पर भरोसे को लेकर पूछे गए सवाल पर एक मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने बताया कि उनकी कंपनी ने पिछले महीने आठ प्रक्षेपण अनुबंध किए हैं, जिनमें अधिकांश अंतरराष्ट्रीय अनुबंध हैं। प्रधानमंत्री ने युवा उद्यमियों को सरकार की ओर से हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया।





