भारत में चीनी की किल्लत का डर, सरकार एक्शन में; ब्राजील से आयात की तैयारी, अक्टूबर से पहले पहुंच सकती है खेप
नई दिल्ली: देश में चीनी की उपलब्धता और बढ़ती कीमतों को लेकर चिंता के बीच केंद्र सरकार ने कदम तेज कर दिए हैं। केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने रविवार को कहा कि त्योहारों के मौसम से पहले चीनी की उपलब्धता और कीमतों को लेकर पैदा हुई चिंताओं को दूर करने के लिए सरकार कई कदम उठा रही है। उन्होंने बताया कि गन्ने की फसल में रेड रॉट बीमारी और अल नीनो की स्थिति के कारण चीनी उत्पादन प्रभावित हुआ है। इसका असर भारत के साथ-साथ दुनियाभर में कुल कृषि उत्पादन पर भी पड़ा है।
सरकार ने स्थिति को लेकर चिंता जताते हुए तत्काल कई कदम उठाए हैं। केंद्रीय मंत्री के मुताबिक, भारत में चीनी की सालाना जरूरत करीब 280 लाख टन है और मौजूदा स्थिति में देश के पास 20 से 25 लाख टन से अधिक अतिरिक्त स्टॉक उपलब्ध है।
ब्राजील से आयात पर सरकार का फोकस
सहकारी चीनी मिलों की संस्था एनएफसीएसएफ के प्रमुख ने बताया कि ब्राजील से भारत आने वाली चीनी की कुछ खेप 15 अक्टूबर से पहले देश पहुंच सकती हैं। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि कुल कितनी मात्रा में चीनी का आयात होगा। सरकार की ओर से जमाखोरी के खिलाफ सख्ती किए जाने के बाद बाजार में चीनी की कीमतों में कुछ गिरावट भी देखने को मिली है।
एनएफसीएसएफ के अध्यक्ष प्रकाश नाइकनवरे ने रविवार को बताया कि मौजूदा परिस्थितियों में ब्राजील ही चीनी आयात का सबसे व्यावहारिक स्रोत है। उन्होंने कहा कि भारत के पारंपरिक आपूर्तिकर्ता थाईलैंड में भी चीनी की कमी बनी हुई है। ब्राजील से आने वाली चीनी की सप्लाई सबसे पहले महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, गुजरात और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में पहुंचने की संभावना है। ब्राजील से भारत तक चीनी पहुंचने में करीब 40 से 45 दिन का समय लगता है।
चीनी की कीमतों में आई कुछ राहत
नाइकनवरे के अनुसार, केंद्रीय खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ने फेडरेशन और इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की थी। बैठक में बाजार में पर्याप्त चीनी की आपूर्ति बनाए रखने और कीमतों को नियंत्रित करने के निर्देश दिए गए थे।
इससे पहले चीनी की कीमत 65 से 67 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई थी। हालांकि शनिवार को खुले टेंडरों में कीमतों में करीब 5 रुपये प्रति किलोग्राम तक की गिरावट दर्ज की गई। सरकार की सख्ती और संभावित आयात के बीच बाजार में आगे भी कीमतों पर दबाव कम होने की उम्मीद जताई जा रही है।





