नोएडा के डेटा सेंटर को बिजली देने के लिए अदाणी समूह को मिल सकता है समानांतर लाइसेंस, विरोध में उतरे बिजली कर्मचारी
लखनऊ। नोएडा स्थित डेटा सेंटर पार्क को बिजली आपूर्ति करने के लिए अदाणी समूह को समानांतर विद्युत वितरण लाइसेंस देने की तैयारी शुरू हो गई है। नियामक आयोग ने अदाणी समूह की ओर से दाखिल आवेदन स्वीकार कर लिया है और अब इस प्रस्ताव पर एक महीने के भीतर आपत्तियां और सुझाव मांगे गए हैं। प्रस्ताव सामने आते ही राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद और विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने इसका विरोध शुरू कर दिया है।
विरोध करने वाले संगठनों का कहना है कि समानांतर लाइसेंस दिए जाने से पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम की वित्तीय स्थिति और मौजूदा बिजली उपभोक्ताओं के हित प्रभावित हो सकते हैं। इसे विद्युत क्षेत्र में निजीकरण की दिशा में कदम भी बताया गया है।
नियामक आयोग ने आवेदन किया स्वीकार
अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस स्टेप-इलेवन लिमिटेड और अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस लिमिटेड ने नोएडा के डेटा सेंटर पार्क में बिजली आपूर्ति के लिए समानांतर वितरण लाइसेंस का आवेदन नियामक आयोग के समक्ष दाखिल किया था। परीक्षण के बाद आयोग ने आवेदन स्वीकार कर लिया।
अब आयोग ने प्रस्ताव को सार्वजनिक करते हुए एक महीने के भीतर संबंधित पक्षों से आपत्तियां और सुझाव मांगे हैं। प्राप्त आपत्तियों और सुझावों पर सुनवाई के बाद आयोग समानांतर वितरण लाइसेंस देने को लेकर अंतिम निर्णय करेगा।
ग्रेटर नोएडा में एनआईडीपी डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड को डेटा सेंटर के लिए पहले ही समानांतर वितरण लाइसेंस दिया जा चुका है। अदाणी समूह के मामले में उपभोक्ता परिषद और संघर्ष समिति ने आरोप लगाया है कि इस प्रक्रिया की जानकारी उपभोक्ताओं और अन्य हितधारकों से छिपाई गई।
उपभोक्ता परिषद ने उठाए सवाल
राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने प्रस्ताव को उपभोक्ता हितों के खिलाफ बताया है। उनका कहना है कि अदाणी समूह इससे पहले भी समानांतर वितरण लाइसेंस के लिए आवेदन कर चुका है।
उपभोक्ता परिषद की आपत्ति के बाद यह मामला वर्ष 2023 से विचाराधीन बताया जा रहा है। अब नियामक आयोग की ओर से आवेदन स्वीकार किए जाने के बाद इस पर दोबारा प्रक्रिया आगे बढ़ी है।
कर्मचारी संघर्ष समिति ने बताया निजीकरण का रास्ता
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने प्रस्ताव का विरोध करते हुए इसे पिछले दरवाजे से निजीकरण की कोशिश बताया है। उनका कहना है कि पूर्वांचल और दक्षिणांचल के निजीकरण की कोशिशों के बाद अब समानांतर वितरण लाइसेंस के माध्यम से बिजली क्षेत्र में निजी भागीदारी बढ़ाने का रास्ता तैयार किया जा रहा है।
लॉजिस्टिक्स और निर्यात तंत्र मजबूत करने की भी तैयारी
इसी बीच उत्तर प्रदेश में खराब होने वाले कृषि उत्पादों की लॉजिस्टिक्स, एयर कार्गो और निर्यात व्यवस्था को मजबूत करने के लिए लॉजिस्टिक्स शक्ति इंटरप्राइजेज के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया गया है।
राज्य परिवर्तन आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मनोज कुमार सिंह के अनुसार, यह समझौता 7वें एसीएफआई वर्ल्ड कॉन्क्लेव 2026 के दौरान हुआ। इसके तहत कोल्ड चेन बुनियादी ढांचे, एयर कार्गो विकास, बहु-माध्यम लॉजिस्टिक्स और कृषि एवं खाद्य उत्पादों के निर्यात पर काम किया जाएगा।
इस पहल का उद्देश्य उत्तर प्रदेश के कृषि, खाद्य प्रसंस्करण और विनिर्माण क्षेत्रों को बेहतर लॉजिस्टिक्स सुविधाओं से जोड़ना और वैश्विक बाजारों तक पहुंच मजबूत करना है। इसमें नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की क्षमता का भी इस्तेमाल किया जाएगा।
नोएडा एयरपोर्ट पर 22 हजार वर्ग मीटर का कार्गो क्षेत्र
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर 22 हजार वर्ग मीटर का कार्गो वेयरहाउसिंग क्षेत्र विकसित किया जा रहा है। इसके अलावा 24 घंटे संचालन के लिए दो समर्पित मालवाहक विमान तैयार किए जा रहे हैं।
वर्ष 2024-25 में भारत से ताजे फल और सब्जियों का 1.819 अरब अमेरिकी डॉलर का निर्यात हुआ था। प्रस्तावित सहयोग के तहत एकीकृत जेवर एयरो लॉजिस्टिक्स एवं पेरिशेबल एक्सपोर्ट हब विकसित करने की संभावनाओं का भी अध्ययन किया जाएगा। इसके लिए व्यवहार्यता अध्ययन, विस्तृत परियोजना रिपोर्ट, कारोबारी योजना और निवेश रणनीति तैयार करने जैसे काम किए जा सकते हैं।





