बच्चों को कब अलग सुलाना चाहिए? सही उम्र जान लें, वरना मानसिक और शारीरिक विकास पर पड़ सकता है असर

parents

नई दिल्ली: छोटे बच्चों का अपने माता-पिता के साथ सोना सामान्य बात मानी जाती है, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार एक निश्चित उम्र के बाद बच्चों को अलग सोने की आदत डालना उनके मानसिक, भावनात्मक और शारीरिक विकास के लिए बेहतर माना जाता है। बढ़ती उम्र के साथ बच्चों की सोच, व्यवहार और निजी जरूरतों में बदलाव आता है, इसलिए समय रहते उनकी स्वतंत्र दिनचर्या विकसित करना जरूरी होता है।

किस उम्र से अलग सोने की आदत डालनी चाहिए?

जैसे-जैसे बच्चे बड़े होते हैं, उनके भीतर शारीरिक और मानसिक दोनों स्तरों पर बदलाव शुरू हो जाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार 5 से 6 वर्ष की उम्र से बच्चों को अलग बिस्तर पर सुलाने की शुरुआत की जा सकती है। वहीं, किशोरावस्था में पहुंचने के बाद बच्चों का अलग कमरे में सोना अधिक उपयुक्त माना जाता है, जिससे उनमें आत्मनिर्भरता और निजी जिम्मेदारी की भावना विकसित होती है।

बढ़ती उम्र में साथ सोने से हो सकते हैं ये असर

कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, अधिक उम्र तक माता-पिता के साथ सोने वाले बच्चों में मोटापा, थकान, अवसाद, याददाश्त कमजोर होना और ऊर्जा में कमी जैसी समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है। हालांकि इन दावों पर अलग-अलग अध्ययनों में भिन्न निष्कर्ष भी सामने आए हैं।

मानसिक विकास पर भी पड़ सकता है प्रभाव

विशेषज्ञों का मानना है कि उम्र बढ़ने के साथ बच्चे अपने आसपास की परिस्थितियों को बेहतर ढंग से समझने लगते हैं। यदि वे लंबे समय तक माता-पिता के साथ सोते हैं, तो कई बार उनके बीच होने वाले तनाव, मतभेद या विवाद को महसूस करने लगते हैं। ऐसी परिस्थितियों का असर बच्चों की मानसिक स्थिति और भावनात्मक विकास पर पड़ सकता है।

 

----------------------------------------------------------------------------------------------

एक नज़र