1982 के फिल्मफेयर में पलट गया था पूरा खेल, नसीरुद्दीन शाह ने अमिताभ बच्चन-राजेश खन्ना जैसे दिग्गजों को छोड़ा पीछे
नई दिल्ली: हिंदी सिनेमा के इतिहास में 1982 का फिल्मफेयर पुरस्कार समारोह उन यादगार आयोजनों में शुमार है, जब लोकप्रियता और स्टारडम से अधिक अभिनय को महत्व दिया गया। उस दौर में अमिताभ बच्चन, राजेश खन्ना, कमल हासन और दिलीप कुमार जैसे सितारों का दबदबा था, लेकिन सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार अपनी सशक्त अदाकारी के दम पर नसीरुद्दीन शाह ने हासिल किया।
‘चक्र’ के लिए मिला सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का सम्मान
साल 1981 में अमिताभ बच्चन की ‘नसीब’, ‘लावारिस’ और ‘याराना’ जैसी सुपरहिट फिल्में रिलीज हुई थीं। वहीं राजेश खन्ना, कमल हासन और अन्य बड़े सितारों की फिल्मों को भी दर्शकों का भरपूर प्यार मिला। इसके बावजूद 29वें फिल्मफेयर पुरस्कारों में फिल्म ‘चक्र’ में शानदार अभिनय के लिए नसीरुद्दीन शाह को सर्वश्रेष्ठ अभिनेता चुना गया।
कड़ी टक्कर के बीच नसीरुद्दीन शाह ने मारी बाजी
उस वर्ष सर्वश्रेष्ठ अभिनेता की श्रेणी में अमिताभ बच्चन को ‘लावारिस’ और ‘सिलसिला’, राजेश खन्ना को ‘दर्द’ तथा कमल हासन को ‘एक दूजे के लिए’ के लिए नामांकित किया गया था। हालांकि निर्णायकों ने नसीरुद्दीन शाह के यथार्थवादी और प्रभावशाली अभिनय को सबसे बेहतर माना और पुरस्कार उनके नाम किया।
स्मिता पाटिल ने भी जीता सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार
फिल्म ‘चक्र’ ने केवल सर्वश्रेष्ठ अभिनेता ही नहीं, बल्कि सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार भी अपने नाम किया। फिल्म में ‘अम्मा’ का किरदार निभाने वाली स्मिता पाटिल को इस भूमिका के लिए सम्मानित किया गया। उन्होंने हेमा मालिनी, जया बच्चन, रेखा और राखी जैसी चर्चित अभिनेत्रियों को पीछे छोड़ते हुए यह उपलब्धि हासिल की।
तीन पुरस्कार जीतकर छा गई थी ‘चक्र’
फिल्म ‘चक्र’ को कुल छह श्रेणियों में नामांकन मिला था, जिनमें से तीन पुरस्कार उसने अपने नाम किए। दिलचस्प बात यह रही कि उस वर्ष अमिताभ बच्चन की चर्चित और सफल फिल्मों को एक भी फिल्मफेयर पुरस्कार नहीं मिल सका।
समाज की सच्चाई दिखाने वाली फिल्म थी ‘चक्र’
निर्देशक रवींद्र धर्मराज के निर्देशन में बनी ‘चक्र’ मुंबई की झुग्गी-बस्तियों में रहने वाले गरीब परिवारों के संघर्ष की कहानी पर आधारित थी। फिल्म में स्मिता पाटिल ने ‘अम्मा’ की भूमिका निभाई, जो पति की मृत्यु के बाद अपने बेटे का पालन-पोषण करने के लिए संघर्ष करती है। इसी दौरान उसकी मुलाकात नसीरुद्दीन शाह द्वारा निभाए गए ‘लुक्का’ के किरदार से होती है। फिल्म ने गरीबी, सामाजिक असमानता और जीवन के कठोर यथार्थ को बेहद प्रभावशाली ढंग से पर्दे पर उतारा।
आज भी समानांतर सिनेमा की क्लासिक मानी जाती है फिल्म
‘चक्र’ को आज भी भारतीय समानांतर सिनेमा की महत्वपूर्ण फिल्मों में गिना जाता है। मजबूत कहानी, यथार्थवादी प्रस्तुति और नसीरुद्दीन शाह तथा स्मिता पाटिल के यादगार अभिनय के कारण यह फिल्म समय के साथ एक क्लासिक का दर्जा हासिल कर चुकी है।





