13 डॉलर में बेचते थे WhatsApp OTP, मुंबई में अंतरराष्ट्रीय साइबर गिरोह का भंडाफोड़; 669 सक्रिय सिम बरामद

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मुंबई: पश्चिम क्षेत्र साइबर पुलिस ने ‘ओटीपी फार्मिंग’ के जरिए विदेशी साइबर अपराधियों को भारतीय व्हाट्सएप नंबर उपलब्ध कराने वाले एक अंतरराष्ट्रीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। मामले में तीन आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने इनके कब्जे से 669 सक्रिय सिम कार्ड, 91 कीपैड मोबाइल फोन, नौ स्मार्टफोन और साइबर अपराध में इस्तेमाल होने वाला अन्य सामान बरामद किया है।

कंबोडिया में बैठे साइबर अपराधियों से जुड़े थे तार

गिरफ्तार आरोपितों की पहचान प्रमोद कुमार उर्फ बिपिन, धर्मेंद्र गुप्ता और राजीव कुमार गुप्ता के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, इस गिरोह के तार कंबोडिया में बैठे साइबर अपराधियों से जुड़े थे। विदेशी साइबर अपराधी भारतीय नागरिकों को शेयर बाजार में निवेश का झांसा देकर कथित तौर पर ठगी का शिकार बनाते थे।

22.30 लाख रुपये की साइबर ठगी से खुला नेटवर्क

पुलिस के मुताबिक, एक व्यक्ति से 22.30 लाख रुपये की कथित साइबर ठगी की जांच के दौरान इस नेटवर्क का पता चला। आरोपितों ने खुद को एक प्रतिष्ठित निवेश कंपनी का प्रतिनिधि बताकर व्हाट्सएप के जरिए पीड़ित से संपर्क किया था। इसके बाद अधिक रिटर्न का लालच देकर उसे निवेश के लिए तैयार किया गया।

जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि ठगी में इस्तेमाल किए गए व्हाट्सएप नंबरों के पीछे भारतीय सिम कार्ड की एक पूरी सप्लाई चेन काम कर रही थी।

लोगों की जानकारी के बिना सक्रिय किए जाते थे सिम

पुलिस के अनुसार, राजीव गुप्ता पॉइंट ऑफ सेल यानी पीओएस एजेंट था। आरोप है कि वह लोगों की जानकारी के बिना उनके दस्तावेजों का इस्तेमाल करके सिम कार्ड सक्रिय करता था।

इसके बाद ये सिम कार्ड धर्मेंद्र गुप्ता के जरिए कमीशन लेकर प्रमोद कुमार तक पहुंचाए जाते थे। इस नेटवर्क के माध्यम से भारतीय मोबाइल नंबरों की व्यवस्था की जाती थी, जिनका इस्तेमाल आगे विदेशी साइबर अपराधियों द्वारा किया जाता था।

कीपैड फोन में सिम लगाकर करते थे OTP फार्मिंग

पुलिस के मुताबिक, प्रमोद कुमार इन सिम कार्ड को साधारण कीपैड मोबाइल फोन में लगाकर ओटीपी फार्मिंग करता था। भारतीय व्हाट्सएप खातों के सत्यापन के लिए आने वाले ओटीपी कथित तौर पर टेलीग्राम के जरिए कंबोडिया में बैठे साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराए जाते थे।

जांच में सामने आया है कि इसके बदले प्रति ओटीपी 13 अमेरिकी डॉलर के बराबर क्रिप्टोकरेंसी में भुगतान किया जाता था। विदेशी साइबर अपराधी इन भारतीय व्हाट्सएप नंबरों का इस्तेमाल संभावित पीड़ितों से संपर्क करने और उन्हें ठगी के जाल में फंसाने के लिए करते थे।

किराये के बैंक खातों में भेजी जाती थी ठगी की रकम

जांच में यह भी पता चला कि साइबर ठगी से हासिल रकम ऐसे बैंक खातों में भेजी जाती थी, जिन्हें कथित तौर पर किराये पर लिया गया था। इन खातों का इस्तेमाल रकम की आवाजाही के लिए किया जाता था।

पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और विदेश में बैठे साइबर अपराधियों की भूमिका की जांच कर रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस गिरोह की गतिविधियों से और कितने लोग प्रभावित हुए हो सकते हैं।

669 सिम और 100 मोबाइल समेत अन्य सामान बरामद

साइबर पुलिस ने आरोपितों के पास से कुल 669 सक्रिय सिम कार्ड बरामद किए हैं। इसके अलावा 91 कीपैड मोबाइल फोन और नौ स्मार्टफोन भी जब्त किए गए हैं। पुलिस ने एक सीपीयू, वाई-फाई राउटर, फिंगरप्रिंट स्कैनर और साइबर गतिविधियों में इस्तेमाल होने वाला अन्य सामान भी बरामद किया है।बरामद सिम कार्ड और उपकरणों की जांच के आधार पर पुलिस गिरोह के नेटवर्क, लेनदेन और संभावित पीड़ितों से जुड़ी जानकारी जुटा रही है।

 

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