महिला पत्रकार रोजी को सुप्रीम कोर्ट से राहत, दिल्ली पुलिस को निर्देश- नहीं हो कोई दंडात्मक कार्रवाई
महिला पत्रकारों की सुरक्षा का मुद्दा उठा
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह ने महिला पत्रकारों के खिलाफ कथित प्रतिशोधात्मक कार्रवाई का मुद्दा उठाया और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की। उन्होंने अदालत से कहा कि विरोध-प्रदर्शनों के दौरान महिला पत्रकारों के साथ यौन उत्पीड़न और हिंसा के आरोपों की जांच के लिए एक स्वतंत्र समिति गठित की जानी चाहिए।
जयसिंह ने सुझाव दिया कि समिति की अध्यक्षता किसी सेवानिवृत्त महिला न्यायाधीश को सौंपी जाए। इसमें एक सेवानिवृत्त महिला आईपीएस अधिकारी और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों को भी शामिल करने का प्रस्ताव रखा गया।
स्वतंत्र समिति बनाने के प्रस्ताव पर सुप्रीम कोर्ट की सहमति
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि अदालत प्रथम दृष्टया स्वतंत्र समिति गठित करने के प्रस्ताव से सहमत है। उन्होंने इंदिरा जयसिंह को प्रभावित महिला पत्रकारों का विवरण और समिति के लिए प्रस्तावित नाम अलग-अलग सीलबंद लिफाफों में जमा करने का निर्देश दिया।
पीठ ने इस बात पर जोर दिया कि महिला पत्रकारों की सुरक्षा और उनसे जुड़े संवेदनशील मामलों को सावधानीपूर्वक संभालना जरूरी है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि उसके समक्ष हर पक्ष की बात सुनी जाएगी।
3 अक्टूबर के प्रदर्शन से जुड़ा है विवाद
मामले की शुरुआत 3 अक्टूबर 2026 को हुए विरोध-प्रदर्शन से जुड़ी है। महिला पत्रकार रोजी के अनुसार, वह प्रदर्शन के दौरान एक वामपंथी कार्यकर्ता को हिरासत में लिए जाने की घटना का वीडियो बना रही थीं। इसी दौरान एसीपी विवेक भगत ने कथित तौर पर उन्हें अनुचित तरीके से छुआ और धक्का दिया।
दूसरी ओर, एसीपी विवेक भगत ने अपनी शिकायत में अलग आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि 3 अक्टूबर को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू होने के दौरान वह बुटा सिंह गोलचक्कर के पास ड्यूटी पर तैनात थे। प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने और हिरासत में लेने की कार्रवाई के बीच रोजी ने उन पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया और उनकी जाति को लेकर अपमानजनक टिप्पणियां कीं।
एसीपी की शिकायत पर छह लोगों के खिलाफ एफआईआर
एसीपी विवेक भगत के मुताबिक, उसी दिन रोजी और अन्य लोगों ने संसद मार्ग थाने के बाहर प्रदर्शन किया और उनके खिलाफ नारेबाजी की। शिकायत में आरोप लगाया गया कि उन्हें यौन दरिंदा और संभावित बलात्कारी कहा गया।
इस मामले में 13 अक्टूबर को संसद मार्ग थाने में स्वतंत्र पत्रकार रोजी, कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके और चार अन्य लोगों समेत कुल छह लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। नामजद लोगों में गजेंद्र सिंह, आशुतोष रांका, सौरव दास और रत्ना सिंह भी शामिल हैं। एफआईआर में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम तथा भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं का उल्लेख किया गया है।
दिल्ली पुलिस से धारा 163 का आदेश मांगा
सुप्रीम कोर्ट ने महिला पत्रकार की ओर से पुलिस अधिकारी पर लगाए गए आरोपों को गंभीर बताया। अदालत ने दिल्ली पुलिस से उस आदेश को पेश करने को कहा, जिसके तहत 10 अक्टूबर के विरोध-प्रदर्शनों से पहले BNSS की धारा 163 लागू की गई थी।
वहीं, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत में इस मांग का विरोध किया और जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा। मामले में आगे की सुनवाई के दौरान महिला पत्रकारों की सुरक्षा, आरोपों की जांच और प्रस्तावित स्वतंत्र समिति के गठन पर महत्वपूर्ण निर्णय होने की संभावना है।





