दूसरी तिमाही में 7.35% रह सकती है भारत की GDP ग्रोथ, वित्त मंत्रालय ने जारी किया अनुमान

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नई दिल्ली: वित्त मंत्रालय की ताजा मासिक आर्थिक समीक्षा में चालू वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) के दौरान भारत की सकल घरेलू उत्पाद (GDP) विकास दर 7.35 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया है। यह अनुमान भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूत स्थिति को दर्शाता है। खास बात यह है कि इससे पहले वित्त वर्ष की पहली तिमाही में देश ने 7.8 प्रतिशत की शानदार आर्थिक विकास दर दर्ज की थी।

वित्त मंत्रालय के नाउकास्टिंग मॉडल के अनुसार, देश में आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार लगातार बनी हुई है। औद्योगिक उत्पादन में सुधार, ऊर्जा की बढ़ती खपत और परिवहन क्षेत्र में मजबूती जैसे संकेतक अर्थव्यवस्था की बेहतर स्थिति की ओर इशारा कर रहे हैं।

औद्योगिक उत्पादन और घरेलू मांग से मिल रहा सहारा

देश के विनिर्माण और औद्योगिक क्षेत्रों में लगातार सुधार देखने को मिल रहा है। इससे उत्पादन गतिविधियों को गति मिली है। वहीं, बिजली और अन्य ऊर्जा स्रोतों की मांग में बढ़ोतरी से संकेत मिलता है कि व्यावसायिक और विनिर्माण गतिविधियां तेजी से आगे बढ़ रही हैं।

इसके अलावा बंदरगाहों पर माल की आवाजाही, वाहन उद्योग की बिक्री और वस्तु एवं सेवा कर (GST) संग्रह के आंकड़ों में भी मजबूती दर्ज की गई है। इन संकेतकों को घरेलू मांग में तेजी और आर्थिक गतिविधियों के विस्तार का प्रमाण माना जा रहा है।

पश्चिम एशिया संकट से बढ़ सकती है महंगाई की चिंता

घरेलू अर्थव्यवस्था के मजबूत संकेतों के बीच वित्त मंत्रालय ने वैश्विक परिस्थितियों से जुड़े कुछ जोखिमों को लेकर भी सतर्क किया है। पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव और भूमध्यसागरीय समुद्री मार्ग पर माल ढुलाई में आ रही बाधाओं के कारण कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। इससे उद्योगों की लागत बढ़ने का खतरा है।

वैश्विक अनिश्चितताओं को देखते हुए मंत्रालय ने कैलेंडर वर्ष 2026 के लिए खुदरा महंगाई के अनुमान में भी बदलाव किया है। पहले यह अनुमान 3.7 प्रतिशत था, जिसे बढ़ाकर अब 4.7 प्रतिशत कर दिया गया है।

रिपोर्ट में मौसम संबंधी जोखिमों का भी जिक्र किया गया है। विशेष रूप से अल नीनो के प्रभाव से रबी फसलों की बुआई के दौरान मिट्टी में नमी कम होने की आशंका जताई गई है। इसका असर कृषि उत्पादन पर पड़ सकता है, जिससे आने वाले समय में खाद्य वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी का जोखिम बना रह सकता है।

विदेशी मुद्रा भंडार से भारत को मिल रही मजबूती

वैश्विक स्तर पर जारी अनिश्चितताओं के बावजूद भारत का बाहरी आर्थिक क्षेत्र मजबूत स्थिति में बना हुआ है। भारतीय रिजर्व बैंक की नीतियों और पूंजी के बेहतर प्रवाह के चलते देश का विदेशी मुद्रा भंडार स्थिर बना हुआ है।

मौजूदा विदेशी मुद्रा भंडार लगभग 10.3 महीने के आयात की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त बताया गया है। इससे वैश्विक आर्थिक उतार-चढ़ाव के बीच भारत की बाहरी भुगतान क्षमता को मजबूती मिलती है।

वहीं, भारतीय रुपये और मुद्रा बाजार में स्थिरता बनाए रखने के लिए रिजर्व बैंक लगातार मौद्रिक नीति और नकदी प्रबंधन से जुड़े कदम उठा रहा है।

वित्त मंत्रालय के अनुमान के मुताबिक, मजबूत घरेलू मांग, निवेश गतिविधियों और सरकारी सुधारों के चलते भारतीय अर्थव्यवस्था वैश्विक चुनौतियों के बावजूद अपनी विकास गति बनाए रखने की स्थिति में है। भारत प्रमुख वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज विकास करने वाले देशों में अपनी मजबूत स्थिति कायम रखे हुए है।

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