पेट्रोल-डीजल की खपत में उछाल, LPG की मांग 12% लुढ़की; अक्टूबर के आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता

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नेशनल डेस्क: देश में अक्टूबर 2026 के दौरान पेट्रोल और डीजल की खपत में अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जबकि रसोई गैस यानी एलपीजी की मांग में बड़ी गिरावट सामने आई है। पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, अक्टूबर में पेट्रोल की खपत सालाना आधार पर 3.11 प्रतिशत बढ़कर 37.7 लाख टन पहुंच गई। वहीं, डीजल की बिक्री में 11.69 प्रतिशत का उछाल आया और यह 85.1 लाख टन रही। इसके उलट एलपीजी की खपत 12.11 प्रतिशत घटकर 26.4 लाख टन पर आ गई।

एटीएफ की मांग में भी आई कमी

अक्टूबर महीने में विमान ईंधन एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) की खपत में भी गिरावट दर्ज की गई। पिछले साल अक्टूबर की तुलना में इसकी मांग 1.34 प्रतिशत कम होकर 7.62 लाख टन रह गई। हालांकि, चालू वित्त वर्ष में अप्रैल से अक्टूबर के बीच एटीएफ की कुल खपत में मामूली बढ़ोतरी हुई है। इस अवधि में इसकी खपत 0.28 प्रतिशत बढ़कर 52 लाख टन दर्ज की गई।

पश्चिम एशिया संकट से रसोई गैस की आपूर्ति पर असर

देश में एलपीजी की मांग घटने के पीछे पश्चिम एशिया में जारी संकट और आयात संबंधी परेशानियों को प्रमुख वजह माना जा रहा है। भारत अपनी रसोई गैस की जरूरतों का बड़ा हिस्सा दूसरे देशों से आयात करता है। इस आपूर्ति के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज एक अहम समुद्री मार्ग है।

फरवरी 2026 के आखिर से पश्चिम एशिया में जारी संकट के कारण इस मार्ग से होने वाली आपूर्ति प्रभावित हुई है। इसका असर भारत में एलपीजी की उपलब्धता पर भी पड़ा है। आयात से जुड़ी चुनौतियों के चलते रसोई गैस की आपूर्ति पर दबाव बना हुआ है।

एलपीजी के बजाय पीएनजी अपनाने पर सरकार का जोर

रसोई गैस की मांग और आपूर्ति के बीच सरकार पाइप वाली प्राकृतिक गैस यानी पीएनजी के इस्तेमाल को भी बढ़ावा दे रही है। इसके लिए सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (सीजीडी) कंपनियों को घरों तक पाइपलाइन के माध्यम से गैस पहुंचाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

जिन इलाकों में पीएनजी कनेक्शन की सुविधा उपलब्ध है, वहां एलपीजी उपभोक्ताओं को पाइप वाली गैस अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इस बदलाव और एलपीजी की आपूर्ति से जुड़ी चुनौतियों के कारण हाल के महीनों में रसोई गैस की खपत में लगातार कमी देखने को मिली है।

सात महीने में एलपीजी की खपत 14.5% घटी

एलपीजी की मांग में गिरावट केवल अक्टूबर तक सीमित नहीं रही। चालू वित्त वर्ष 2026-27 में अप्रैल से अक्टूबर के बीच भी इसकी खपत में बड़ी कमी दर्ज की गई। इन सात महीनों के दौरान एलपीजी की कुल खपत 14.5 प्रतिशत घट गई।

इससे स्पष्ट है कि रसोई गैस की मांग पर आपूर्ति संबंधी मुश्किलों और पीएनजी की ओर उपभोक्ताओं के बढ़ते रुझान का असर पड़ रहा है।

पेट्रोल-डीजल की बढ़ती खपत क्या संकेत देती है?

अक्टूबर के आंकड़ों में पेट्रोल और डीजल की मांग में बढ़ोतरी सामने आई है। पेट्रोल की खपत में 3.11 प्रतिशत और डीजल की बिक्री में 11.69 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज होना परिवहन और ईंधन बाजार में मांग की मजबूती को दर्शाता है।

दूसरी ओर, एलपीजी की खपत में गिरावट रसोई गैस की आपूर्ति से जुड़ी परेशानियों और पीएनजी के बढ़ते इस्तेमाल की ओर संकेत करती है। आने वाले महीनों में एलपीजी की मांग का रुख पश्चिम एशिया के हालात, आयात की उपलब्धता और देश में पीएनजी कनेक्शन के विस्तार पर निर्भर करेगा। वहीं, पेट्रोल और डीजल की खपत में जारी बढ़ोतरी पर भी बाजार की नजर रहेगी।

 

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