अंतरिक्ष में भारत की बड़ी कामयाबी, ISRO ने लॉन्च किया NVS-03 सैटेलाइट; NavIC नेविगेशन सिस्टम को मिलेगी मजबूती

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नेशनल डेस्क: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने शुक्रवार को नौवहन उपग्रह ‘एनवीएस-03’ का सफल प्रक्षेपण कर अंतरिक्ष के क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की। इस उपग्रह में स्वदेशी और आयातित परमाणु घड़ियां लगाई गई हैं। इसके अंतरिक्ष में स्थापित होने से भारत की अपनी उपग्रह आधारित नौवहन प्रणाली ‘नाविक’ को मजबूती मिलेगी। यह प्रणाली जीपीएस के भारतीय संस्करण के रूप में काम करती है और भारत के साथ आसपास के 1,500 किलोमीटर तक के क्षेत्र में सेवाएं उपलब्ध कराती है।

ISRO प्रमुख ने वैज्ञानिकों को दी बधाई

एनवीएस-03 मिशन की सफलता पर इसरो प्रमुख वी. नारायणन ने वैज्ञानिकों, औद्योगिक साझेदारों और शिक्षाविदों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि जीएसएलवी रॉकेट ने उपग्रह को सफलतापूर्वक और सटीक तरीके से निर्धारित कक्षा में स्थापित किया। रॉकेट की सभी प्रणालियों ने उम्मीद के मुताबिक काम किया और एनवीएस-03 का मिशन सफलतापूर्वक पूरा हुआ।

दो GSLV अभियानों के बीच सबसे कम अंतराल

इसरो प्रमुख ने बताया कि लगातार दो जीएसएलवी अभियानों के बीच महज 56 दिनों का अंतर रहा, जो अब तक का सबसे कम समय है। एनवीएस-03 के सफल प्रक्षेपण के साथ ही नाविक उपग्रह समूह में न्यूनतम परिचालन क्षमता के लिए जरूरी चार उपग्रहों की संख्या फिर से पूरी हो गई है। इससे पहले इस समूह के तीन उपग्रह काम कर रहे थे। नए उपग्रह के शामिल होने से स्थिति निर्धारण, नौवहन और समय संबंधी सेवाएं फिर से बहाल हो गई हैं।

भारत के लिए रणनीतिक रूप से अहम है NavIC

इसरो प्रमुख ने नाविक उपग्रह समूह को देश की एक महत्वपूर्ण रणनीतिक संपत्ति बताया। उन्होंने कहा कि यह प्रणाली भारत को स्थिति निर्धारण, नौवहन और समय संबंधी सेवाओं तक स्वतंत्र पहुंच उपलब्ध कराती है। इससे देश इन महत्वपूर्ण सेवाओं के लिए दूसरे देशों की प्रणालियों पर निर्भर हुए बिना अपनी जरूरतें पूरी कर सकता है।

रात 11:51 बजे भरी उड़ान

50 मीटर लंबे जीएसएलवी-एफ18 रॉकेट ने 24 घंटे की उलटी गिनती पूरी होने के बाद शुक्रवार रात 11 बजकर 51 मिनट पर श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के दूसरे प्रक्षेपण स्थल से उड़ान भरी। 420 टन वजनी तीन चरणों वाले इस रॉकेट के जरिए लगभग 2,232 किलोग्राम के एनवीएस-03 उपग्रह को भू-तुल्यकालिक स्थानांतरण कक्षा में स्थापित किया गया।

अगली पीढ़ी की नौवहन प्रणाली का तीसरा उपग्रह

इसरो के मुताबिक, एनवीएस-03 अगली पीढ़ी की नौवहन उपग्रह प्रणाली का तीसरा उपग्रह है। इसे आईआरएनएसएस श्रृंखला के तहत मिलने वाली नौवहन सेवाओं की निरंतरता बनाए रखने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।

अंतरिक्ष एजेंसी के अनुसार, उपग्रह में आयातित परमाणु घड़ियों के साथ भारत में विकसित परमाणु घड़ी भी लगाई गई है। इसमें पहले से उपलब्ध एल5 और एस संकेतों के अलावा एल1 संकेत भी शामिल हैं। इससे भारतीय भूभाग और देश की भू-राजनीतिक सीमा से 1,500 किलोमीटर तक फैले क्षेत्र में नौवहन सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी।

 

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