भारत की 7 ऐसी जगहें जहां आम पर्यटकों की मनमानी पर रोक, बिना अनुमति एंट्री की नहीं है इजाजत
नई दिल्ली: भारत में घूमने के लिए एक से बढ़कर एक खूबसूरत और ऐतिहासिक जगहें हैं, लेकिन देश में कुछ ऐसे संवेदनशील इलाके भी हैं जहां आम पर्यटक अपनी मर्जी से प्रवेश नहीं कर सकते। कहीं राष्ट्रीय सुरक्षा बड़ा कारण है, तो कहीं दुर्लभ आदिवासी समुदायों और पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए आवाजाही पर पाबंदी लगाई गई है। कुछ स्थानों पर विशेष अनुमति के बाद प्रवेश मिलता है, जबकि कुछ इलाकों में आम लोगों की पहुंच पूरी तरह प्रतिबंधित है। आइए जानते हैं देश की ऐसी सात जगहों के बारे में, जहां सामान्य पर्यटन स्थलों जैसी आजादी नहीं है।
1. बैरन आइलैंड, अंडमान और निकोबार
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह का बैरन आइलैंड भारत के एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी के लिए जाना जाता है। पर्यटक नाव के जरिए समुद्र से इस ज्वालामुखीय द्वीप का नजारा देख सकते हैं, लेकिन आम तौर पर उन्हें द्वीप पर उतरने की अनुमति नहीं होती। गृह मंत्रालय ने बैरन आइलैंड को प्रतिबंधित पर्यटन स्थलों की सूची में रखा है। ऐसे में यहां पर्यटकों की यात्रा मुख्य रूप से समुद्र से ज्वालामुखी और द्वीप को देखने तक सीमित रहती है।
2. भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र, मुंबई
मुंबई के ट्रॉम्बे में स्थित भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र देश के प्रमुख परमाणु अनुसंधान संस्थानों में शामिल है। परमाणु अनुसंधान से जुड़ा होने के कारण यहां सुरक्षा के बेहद कड़े इंतजाम रहते हैं और यह आम लोगों के लिए कोई पर्यटन स्थल नहीं है। परिसर में प्रवेश के लिए अधिकृत कर्मचारियों और कर्मियों के लिए पास तथा अनुमति से जुड़ी प्रक्रियाएं निर्धारित हैं। इसलिए कोई आम पर्यटक बिना अनुमति के इस परिसर में प्रवेश नहीं कर सकता।
3. नॉर्थ सेंटिनल आइलैंड, अंडमान और निकोबार
नॉर्थ सेंटिनल आइलैंड दुनिया के सबसे अलग-थलग रहने वाले स्वदेशी समुदायों में से एक सेंटिनलीज जनजाति का घर है। समुदाय की सुरक्षा और बाहरी संपर्क से होने वाले संभावित नुकसान को देखते हुए इस द्वीप और इसके आसपास के क्षेत्र को जनजातीय आरक्षित क्षेत्र घोषित किया गया है। उच्च ज्वार रेखा से पांच किलोमीटर तक का समुद्री क्षेत्र भी इस आरक्षित क्षेत्र में शामिल है। गैर-आदिवासियों के यहां प्रवेश पर रोक है। बाहरी बीमारियों से समुदाय की सुरक्षा भी इस प्रतिबंध की एक प्रमुख वजह है, क्योंकि लंबे समय तक अलग-थलग रहने के कारण उनमें कई बीमारियों के प्रति प्रतिरोधक क्षमता कम हो सकती है।
4. सियाचिन ग्लेशियर, लद्दाख
सियाचिन ग्लेशियर दुनिया के सबसे ऊंचे युद्धक्षेत्रों में गिना जाता है। सामरिक दृष्टि से बेहद संवेदनशील होने के कारण यहां आम लोगों की आवाजाही सामान्य पर्यटन स्थलों की तरह नहीं हो सकती। हालांकि पूरे सियाचिन ग्लेशियर को नागरिकों के लिए पूरी तरह बंद मानना सही नहीं होगा। वर्ष 2021 में सियाचिन बेस कैंप को घरेलू पर्यटकों के लिए खोला गया था। लेकिन पर्यटक सैन्य क्षेत्र में अपनी इच्छा से कहीं भी नहीं जा सकते। संवेदनशील सीमावर्ती इलाकों में प्रवेश और आवाजाही सुरक्षा नियमों तथा प्रशासनिक अनुमति के अधीन रहती है।
5. निकोबार के जनजातीय आरक्षित क्षेत्र
निकोबार द्वीप समूह के कई हिस्से स्वदेशी समुदायों और संवेदनशील पर्यावरणीय क्षेत्रों की वजह से विशेष सुरक्षा के दायरे में हैं। यहां आम पर्यटन स्थलों की तरह स्वतंत्र रूप से घूमना संभव नहीं है। निकोबार की यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए संबंधित सरकारी अनुमति या जनजातीय पास की आवश्यकता होती है। विदेशी नागरिकों के लिए भी निकोबार द्वीप समूह की यात्रा पर विशेष प्रतिबंध लागू हैं। इन नियमों का उद्देश्य शोम्पेन समेत संवेदनशील आदिवासी समुदायों को बाहरी हस्तक्षेप से सुरक्षित रखना है।
6. इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र, कलपक्कम
तमिलनाडु के कलपक्कम में स्थित इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र परमाणु ऊर्जा विभाग के अंतर्गत महत्वपूर्ण वैज्ञानिक और अनुसंधान संस्थान है। परमाणु अनुसंधान से जुड़े इस परिसर में सुरक्षा और प्रवेश के लिए निर्धारित प्रक्रियाएं लागू रहती हैं। यही कारण है कि यह आम जनता के लिए खुले पर्यटन स्थलों की श्रेणी में नहीं आता। परिसर में प्रवेश के लिए अधिकृत अनुमति जरूरी होती है।
7. नंदा देवी आंतरिक अभयारण्य, उत्तराखंड
उत्तराखंड का नंदा देवी क्षेत्र अपनी प्राकृतिक खूबसूरती के साथ संवेदनशील हिमालयी पारिस्थितिकी के लिए भी जाना जाता है। यह क्षेत्र यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल का हिस्सा है। नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान के कुछ हिस्सों में निर्धारित मार्गों से पहुंच संभव है, लेकिन आंतरिक अभयारण्य में आम पर्यटकों को स्वतंत्र रूप से घूमने की अनुमति नहीं है। नाजुक पर्यावरण को नुकसान से बचाने के लिए यहां मानव गतिविधियों और पर्यटकों की आवाजाही पर कड़े नियम लागू हैं। कुछ क्षेत्रों में प्रवेश के लिए निर्धारित अनुमति भी आवश्यक होती है।
कहीं सुरक्षा तो कहीं आदिवासी समुदाय और पर्यावरण की वजह से पाबंदी
इन सातों जगहों पर प्रवेश नियंत्रित करने के पीछे अलग-अलग वजहें हैं। परमाणु अनुसंधान केंद्रों में राष्ट्रीय सुरक्षा प्रमुख कारण है, जबकि नॉर्थ सेंटिनल आइलैंड और निकोबार के संवेदनशील इलाकों में आदिवासी समुदायों को बाहरी संपर्क से सुरक्षित रखना प्राथमिकता है। वहीं नंदा देवी जैसे क्षेत्रों में नाजुक हिमालयी पर्यावरण की रक्षा के लिए आवाजाही नियंत्रित की जाती है। ऐसे संवेदनशील इलाकों में जाने से पहले पर्यटकों को संबंधित प्रशासन के मौजूदा नियमों और अनुमति की शर्तों की जानकारी जरूर लेनी चाहिए।





