जिम शुरू करने से पहले करा लें ये जरूरी जांच, छिपी बीमारी का चल सकता है पता; इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
नई दिल्ली: खुद को फिट और स्वस्थ रखने के लिए जिम और नियमित व्यायाम का चलन तेजी से बढ़ रहा है। नियमित शारीरिक गतिविधि रक्त संचार, पाचन और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के साथ कई बीमारियों के जोखिम को कम करने में मदद कर सकती है। आमतौर पर वयस्कों को सप्ताह में कम से कम 150 मिनट शारीरिक गतिविधि करने की सलाह दी जाती है। हालांकि, लंबे समय से व्यायाम नहीं करने वाले लोगों को अचानक भारी कसरत शुरू करने से पहले अपनी स्वास्थ्य स्थिति पर ध्यान देना चाहिए।
जिम शुरू करते ही थकान या चक्कर आएं तो रहें सावधान
अगर व्यायाम शुरू करने के बाद अत्यधिक थकान, चक्कर, मांसपेशियों में ऐंठन या दिल की धड़कन तेज होने जैसी समस्या महसूस हो रही है, तो इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। खासकर लंबे समय से शारीरिक गतिविधि से दूर रहने वाले, अधिक उम्र के या पहले से किसी बीमारी से जूझ रहे लोगों को भारी कसरत शुरू करने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।
सीबीसी जांच से खून की कमी का चल सकता है पता
कंप्लीट ब्लड काउंट यानी सीबीसी एक सामान्य रक्त जांच है, जिससे लाल रक्त कोशिकाओं, सफेद रक्त कोशिकाओं और प्लेटलेट्स समेत कई महत्वपूर्ण चीजों की जानकारी मिलती है।
हीमोग्लोबिन का स्तर कम होने पर कमजोरी, जल्दी थकान, सांस फूलना और चक्कर आने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। ऐसे में भारी व्यायाम करना मुश्किल हो सकता है। लगातार कमजोरी, थकान, पीलिया या सांस फूलने की शिकायत रहने पर डॉक्टर से सलाह लेकर ही जिम शुरू करना बेहतर है।
लिपिड प्रोफाइल से पता चलेगा हृदय संबंधी जोखिम
अचानक तेज कसरत शुरू करने से पहले हृदय संबंधी जोखिमों को समझना भी जरूरी है। लिपिड प्रोफाइल जांच से खराब और अच्छे कोलेस्ट्रॉल के साथ ट्राइग्लिसराइड्स के स्तर की जानकारी मिलती है।
अधिक वजन वाले लोगों, धूम्रपान करने वालों या परिवार में कम उम्र में हृदय रोग का इतिहास रखने वालों के लिए डॉक्टर इस जांच की सलाह दे सकते हैं। अगर कोलेस्ट्रॉल या ट्राइग्लिसराइड्स का स्तर बढ़ा हुआ आता है, तो व्यायाम की तीव्रता तय करने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।
सोडियम-पोटैशियम की गड़बड़ी से भी हो सकती है परेशानी
सोडियम और पोटैशियम जैसे इलेक्ट्रोलाइट्स नसों और मांसपेशियों के सामान्य कामकाज के लिए महत्वपूर्ण होते हैं। बार-बार मांसपेशियों में ऐंठन, कमजोरी या बहुत अधिक पसीना आने की स्थिति में डॉक्टर इलेक्ट्रोलाइट्स की जांच कराने की सलाह दे सकते हैं।
इनका स्तर बहुत कम या बहुत अधिक होना शरीर के लिए परेशानी पैदा कर सकता है। इसलिए लक्षण मौजूद होने पर डॉक्टर की सलाह के अनुसार इलेक्ट्रोलाइट्स की जांच कराना उपयोगी हो सकता है।
आयरन, विटामिन बी12 और विटामिन डी की कमी भी देखें
लगातार थकान, कमजोरी, हाथ-पैरों में झनझनाहट या मांसपेशियों और हड्डियों से जुड़ी परेशानी होने पर डॉक्टर आयरन, विटामिन बी12 और विटामिन डी की जांच की सलाह दे सकते हैं।
इन पोषक तत्वों की कमी होने पर व्यायाम के बाद शरीर की रिकवरी प्रभावित हो सकती है और मांसपेशियों से जुड़ी समस्याएं बढ़ सकती हैं। इसलिए लगातार ऐसे लक्षण रहने पर बिना जांच या चिकित्सकीय सलाह के भारी कसरत शुरू करने से बचना चाहिए।
हर व्यक्ति के लिए सभी जांच जरूरी नहीं
जिम शुरू करने से पहले हर स्वस्थ व्यक्ति के लिए सभी रक्त जांच कराना अनिवार्य नहीं है। उम्र, स्वास्थ्य संबंधी इतिहास, मौजूदा लक्षण, फिटनेस स्तर और प्रस्तावित कसरत की तीव्रता के आधार पर डॉक्टर यह तय कर सकते हैं कि किस व्यक्ति को कौन-सी जांच की जरूरत है।
सीने में दर्द, बेहोशी, असामान्य रूप से सांस फूलना या दिल की बहुत तेज अथवा अनियमित धड़कन जैसे लक्षण दिखाई दें तो व्यायाम रोककर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। फिटनेस बढ़ाने के लिए व्यायाम जरूरी है, लेकिन शरीर के संकेतों को नजरअंदाज करके भारी कसरत करना जोखिम भरा हो सकता है।





