अमेरिका में ग्रीन कार्ड प्रक्रिया पर रोक के बीच TCS का बड़ा ऐलान, अगले 5 साल में 15 हजार और लोगों को देगी नौकरी
अमेरिकी सरकार के निर्देशों का पालन करेगी TCS
टीसीएस ने शुक्रवार को अमेरिकी सरकार की ओर से स्थायी श्रम प्रमाणन कार्यक्रम यानी पीईआरएम पर की गई घोषणा के बाद अपनी स्थिति स्पष्ट की। कंपनी के मुताबिक, वह अमेरिकी श्रम विभाग के सभी लागू निर्देशों का पालन करेगी।
कंपनी ने कहा कि अमेरिका में उसकी कार्ययोजना स्थानीय लोगों को रोजगार देने पर केंद्रित है। इसके लिए वह अपने कार्यालयों और परिसर में भर्ती की व्यवस्था का भी इस्तेमाल करती है।
अमेरिका में भर्ती बंद नहीं करेगी कंपनी
टीसीएस ने अगले पांच वर्षों में अमेरिका में 15 हजार अतिरिक्त कर्मचारियों की भर्ती की योजना दोहराई है। कंपनी का कहना है कि इससे अमेरिकी कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने में मदद मिलेगी।
टीसीएस के अमेरिका में 31 कार्यालय और डिलीवरी केंद्र हैं, जहां बड़ी संख्या में स्थानीय कर्मचारी काम करते हैं। कंपनी की रणनीति में स्थानीय स्तर पर प्रतिभाओं की भर्ती को अहम स्थान दिया गया है।
पीईआरएम आवेदनों की कम संख्या से TCS को राहत की उम्मीद
टीसीएस के अनुसार, पिछले दो वर्षों में पीईआरएम कार्यक्रम के तहत उसके आवेदनों की संख्या इकाई के अंक में रही है। इसी आधार पर कंपनी को उम्मीद है कि कार्यक्रम से निलंबित किए जाने का उसकी भर्ती योजना और ग्राहकों के साथ कामकाज पर खास असर नहीं पड़ेगा।
हालांकि, कंपनी ने स्पष्ट किया है कि वह अमेरिकी श्रम विभाग के निर्देशों का पालन करेगी। अमेरिकी सरकार के इस कदम का असर रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन करने वाले विदेशी कर्मचारियों और संबंधित कंपनियों पर पड़ सकता है।
क्या है PERM कार्यक्रम और क्यों है अहम?
पीईआरएम अमेरिका में रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड हासिल करने की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके तहत नियोक्ता को यह साबित करना होता है कि किसी विदेशी कर्मचारी को नौकरी देने से अमेरिकी कर्मचारियों के वेतन, कामकाजी परिस्थितियों या रोजगार के अवसरों पर प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा।
अमेरिकी सरकार ने कथित अनियमितताओं की जांच के बीच कई बड़ी आईटी कंपनियों को इस कार्यक्रम से निलंबित किया है। इससे संबंधित कंपनियों की नई और लंबित अर्जियों पर कार्रवाई प्रभावित हो सकती है।
TCS के अलावा इन कंपनियों के नाम भी शामिल
इस कार्रवाई में टीसीएस के साथ इन्फोसिस, कॉग्निजेंट, विप्रो, एचसीएल टेक्नोलॉजीज, माइक्रोसॉफ्ट, एडोबी और कैपजेमिनी का नाम भी शामिल है। अमेरिकी श्रम मंत्री कीथ सॉन्डरलिंग के मुताबिक, इन कंपनियों से जुड़ी स्थायी श्रम प्रमाणन की नई या लंबित अर्जियों पर कार्रवाई नहीं की जाएगी।
इस घटनाक्रम से अमेरिकी रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड प्रक्रिया में शामिल विदेशी पेशेवरों की चिंताएं बढ़ सकती हैं। हालांकि, टीसीएस का कहना है कि उसकी अमेरिकी भर्ती योजना और कारोबारी कामकाज पर इसका बड़ा असर पड़ने की उम्मीद नहीं है।
H-1B वीजा पर भी छिड़ी बहस
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने एच-1बी वीजा पर अमेरिका आने वाले कर्मचारियों को ‘बंधुआ मजदूर’ बताते हुए आरोप लगाया कि विदेशी कर्मचारियों की भर्ती से अमेरिकी कर्मचारियों की नौकरियों और वेतन पर असर पड़ता है।
वहीं, भारतीय आईटी उद्योग के संगठन नैसकॉम ने कहा है कि आव्रजन नीति और कुशल कर्मचारियों की आवाजाही अलग-अलग मुद्दे हैं। संगठन के मुताबिक, भारतीय आईटी कंपनियों ने एच-1बी वीजा पर अपनी निर्भरता कम की है और अमेरिका में स्थानीय स्तर पर भर्ती बढ़ाई है।





