US-Iran शांति समझौते से भारत को बड़ी राहत? फिर खुल सकता है सस्ते तेल का रास्ता, चाबहार पोर्ट को भी मिलेगी नई रफ्तार
नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच लागू हुए शांति समझौते के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार में राहत की उम्मीद बढ़ गई है। लंबे समय से जारी तनाव और प्रतिबंधों के कारण प्रभावित तेल एवं गैस कारोबार में अब सुधार की संभावना जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समझौते की शर्तें पूरी तरह लागू होती हैं और प्रतिबंधों में ढील मिलती है, तो भारत को भी इसका बड़ा आर्थिक और रणनीतिक लाभ मिल सकता है।
भारत के लिए क्यों अहम है यह समझौता?
अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते में ईरानी कच्चे तेल, पेट्रोलियम निर्यात, बैंकिंग लेनदेन और परिवहन क्षेत्र से जुड़े प्रतिबंधों को चरणबद्ध तरीके से हटाने की बात कही गई है। ऐसे में भारत के लिए ईरान से कच्चे तेल का आयात दोबारा शुरू करने का रास्ता खुल सकता है।
समझौते के तहत अंतिम शर्तों को तय करने के लिए आगामी 60 दिनों तक दोनों पक्षों के बीच विस्तृत बातचीत भी प्रस्तावित है। इस दौरान समझौते के विभिन्न प्रावधानों को अंतिम रूप दिया जाएगा।
भारत को ईरानी तेल से क्या फायदा मिलता है?
अमेरिकी प्रतिबंध लागू होने से पहले ईरान भारत के प्रमुख कच्चे तेल आपूर्तिकर्ताओं में शामिल था। एक समय भारत के कुल कच्चे तेल आयात में ईरान की हिस्सेदारी करीब 10 प्रतिशत तक थी।
विशेषज्ञों का कहना है कि भौगोलिक निकटता के कारण ईरान से तेल आयात की लागत अपेक्षाकृत कम पड़ती है। इसके अलावा ईरान भारतीय कंपनियों को भुगतान के लिए अधिक समय भी उपलब्ध कराता रहा है, जिससे रिफाइनरियों को वित्तीय लचीलापन मिलता है।
यदि तेल निर्यात पर लगी पाबंदियां हटती हैं, तो भारत के लिए ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने और आयात लागत को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।
वैश्विक तेल बाजार को भी मिल सकती है राहत
ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि ईरानी तेल की वैश्विक बाजार में वापसी से आपूर्ति बढ़ेगी, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों पर दबाव कम हो सकता है। इसका असर तेल आयात करने वाले देशों की अर्थव्यवस्था पर भी सकारात्मक रूप से पड़ सकता है।
ईरान की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा ऊर्जा निर्यात पर निर्भर है, इसलिए समझौते के बाद वह अपने तेल निर्यात को तेजी से बढ़ाने की कोशिश कर सकता है।
चाबहार पोर्ट को मिलेगा नया जीवन
इस समझौते का एक महत्वपूर्ण असर भारत के रणनीतिक रूप से अहम चाबहार पोर्ट पर भी पड़ सकता है। प्रतिबंधों और क्षेत्रीय तनाव के कारण इस परियोजना पर अनिश्चितता बनी हुई थी।
यदि प्रतिबंध हटते हैं, तो भारत चाबहार पोर्ट के संचालन और विकास कार्यों को अधिक सुगमता से आगे बढ़ा सकेगा। यह बंदरगाह भारत के लिए मध्य एशिया और अफगानिस्तान तक पहुंच का महत्वपूर्ण द्वार माना जाता है।
रणनीतिक और आर्थिक दोनों मोर्चों पर लाभ की उम्मीद
विशेषज्ञों का मानना है कि शांति समझौते के सफल क्रियान्वयन से भारत को ऊर्जा सुरक्षा, व्यापारिक संपर्क और क्षेत्रीय रणनीतिक प्रभाव बढ़ाने में मदद मिल सकती है। साथ ही अरब सागर क्षेत्र में भारत की आर्थिक और सामरिक उपस्थिति को भी मजबूती मिल सकती है।
हालांकि, समझौते की सभी शर्तों के पूरी तरह लागू होने और प्रतिबंधों में वास्तविक राहत मिलने के बाद ही इसके प्रभाव का स्पष्ट आकलन संभव होगा।



