UPI से 2000 रुपये से ज्यादा भुगतान पर 0.4% MDR का विरोध तेज, सरकार बोली- फैसला वापस नहीं होगा; जानें किसे देना होगा 5 रुपये शुल्क

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नई दिल्ली: यूपीआई (UPI) के जरिए 2000 रुपये से अधिक के कुछ कारोबारी भुगतानों पर 0.4 फीसदी मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने के फैसले का कारोबारियों और विभिन्न संगठनों की ओर से विरोध शुरू हो गया है। सरकार ने साफ कर दिया है कि 15 अक्तूबर से लागू होने वाले इस फैसले को वापस लेने पर विचार नहीं किया जा रहा है। सरकार के अनुसार, यह शुल्क ग्राहकों से नहीं बल्कि मर्चेंट भुगतान व्यवस्था के तहत लिया जाएगा।

बुधवार को यह भी सामने आया कि 0.4 फीसदी MDR पर 18 फीसदी जीएसटी लागू होगा। हालांकि, जीएसटी-पंजीकृत कारोबारी इस भुगतान पर इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा कर सकते हैं, जिससे प्रभावी कर बोझ कम हो सकता है। 0.4 फीसदी MDR की अधिकतम सीमा प्रति लेन-देन 300 रुपये रखी गई है।

एमडीआर वापस लेने से सरकार का इनकार

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, 0.4 फीसदी MDR को वापस लेने का कोई प्रस्ताव नहीं है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि फैसला पहले ही लिया जा चुका है और इसे पलटने का सवाल नहीं है। सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था का उद्देश्य यूपीआई तंत्र को आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाना और उसकी सुरक्षा व बुनियादी ढांचे को मजबूत करना है।

वित्त मंत्रालय के अनुसार, शून्य MDR व्यवस्था लंबे समय तक टिकाऊ नहीं है और यूपीआई के संचालन तथा विस्तार के लिए भुगतान तंत्र में पर्याप्त राजस्व व्यवस्था जरूरी है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि व्यक्ति से व्यक्ति (P2P) भुगतान पर कोई शुल्क नहीं लगेगा और 2000 रुपये तक के मर्चेंट भुगतान भी मुफ्त रहेंगे।

इन सेवाओं में 2000 रुपये से ज्यादा पर सिर्फ 5 रुपये MDR

रेलवे, टेलीकॉम, इंश्योरेंस और फ्यूल जैसी निर्धारित श्रेणियों में 2000 रुपये से अधिक के भुगतान पर 0.4 फीसदी के बजाय 5 रुपये का फ्लैट MDR लागू होगा। कुछ अन्य निर्धारित सेवाओं के लिए भी रियायती दर का प्रावधान किया गया है।

सुप्रीम कोर्ट में फैसले को दी गई चुनौती

यूपीआई से 2000 रुपये से अधिक के भुगतान पर MDR लागू करने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में भी चुनौती दी गई है। याचिका में नई व्यवस्था को मनमानी और भेदभावपूर्ण बताते हुए कारोबारियों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ का मुद्दा उठाया गया है।

पेट्रोल पंप कारोबारियों ने वित्त मंत्रालय को लिखा पत्र

ऑल इंडिया पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन ने MDR के खिलाफ वित्त मंत्रालय को पत्र भेजकर पेट्रोल पंपों को इस व्यवस्था से बाहर रखने की मांग की है। एसोसिएशन ने भुगतान पर अतिरिक्त लागत को लेकर अपनी आपत्ति जताई है। निर्धारित व्यवस्था के तहत 2000 रुपये से अधिक के कुछ ईंधन भुगतानों पर 5 रुपये का रियायती MDR रखा गया है।

अशोक कुमार लाहिड़ी ने चाणक्य का दिया उदाहरण

नीति आयोग के उपाध्यक्ष अशोक कुमार लाहिड़ी ने यूपीआई भुगतान पर शुल्क लगाने के फैसले का बचाव करते हुए कर संग्रह की तुलना मधुमक्खी के फूल से शहद जुटाने से की। उन्होंने कहा कि नागरिकों से कर इस तरह लिया जाना चाहिए कि धीरे-धीरे राजस्व जुटे और लोगों पर अनावश्यक बोझ न पड़े।

वित्त मंत्रालय ने विदेशी प्रभाव के दावे को नकारा

वित्त मंत्रालय ने कहा है कि यूपीआई पर MDR लागू करने का फैसला किसी विदेशी प्रभाव या दबाव में नहीं लिया गया है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि भारत अपने नीतिगत फैसले स्वतंत्र रूप से लेता है। सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था यूपीआई तंत्र को लंबे समय तक टिकाऊ बनाए रखने के उद्देश्य से लाई गई है।

 

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