टाटा संस की कमान फिर चंद्रशेखरन के हाथ, नोएल टाटा ने किया विरोध; जानिए क्या है वजह
नई दिल्ली: टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन को एक बार फिर पांच साल के कार्यकाल के लिए कंपनी की कमान सौंपने का फैसला किया गया है। गुरुवार को हुई बोर्ड बैठक में उनके तीसरे कार्यकाल को मंजूरी दी गई। हालांकि, टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने इस प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया। बोर्ड ने टाटा संस को शेयर बाजार में सूचीबद्ध करने की दिशा में भी आगे बढ़ने का निर्णय लिया है। चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति पर अंतिम मुहर अभी सालाना आम बैठक (AGM) में लगनी बाकी है। टाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा संस की करीब 66% हिस्सेदारी है।
चंद्रशेखरन का मौजूदा कार्यकाल फरवरी 2027 में खत्म होना था। अगस्त 2026 में उन्होंने बोर्ड को बताया था कि वह मौजूदा कार्यकाल पूरा होने के बाद पद पर बने रहने के इच्छुक नहीं हैं। इसके बावजूद बोर्ड ने उन्हें पांच साल का नया कार्यकाल देने का फैसला किया। छह सदस्यीय बोर्ड में नोएल टाटा को छोड़कर बाकी सभी निदेशकों ने प्रस्ताव का समर्थन किया।
RBI के फैसले के बाद IPO की राह खुली
टाटा संस की प्रस्तावित शेयर बाजार में लिस्टिंग भी बैठक का एक अहम मुद्दा रही। भारतीय रिजर्व बैंक ने 11 सितंबर 2026 को टाटा संस की कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी (CIC) के तौर पर पंजीकरण सरेंडर करने की अर्जी खारिज कर दी थी। इसके बाद कंपनी पर लागू नियामकीय प्रावधानों के तहत शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने की दिशा में आगे बढ़ने का दबाव बढ़ गया है।
RBI ने सितंबर 2022 में टाटा संस को अपर-लेयर एनबीएफसी के तौर पर पंजीकृत किया था। नियमों के तहत इस श्रेणी की कंपनियों को तीन साल के भीतर शेयर बाजार में सूचीबद्ध होना होता है। टाटा संस के लिए यह समयसीमा सितंबर 2025 तक थी। इससे बचने के लिए कंपनी ने मार्च 2024 में CIC श्रेणी से बाहर निकलने और पंजीकरण सरेंडर करने का आवेदन किया था, जिसे RBI ने 11 सितंबर 2026 को खारिज कर दिया।
करीब 2.01 लाख करोड़ रुपये का एसेट बेस
मार्च 2026 तक टाटा संस का कुल एसेट बेस करीब 2.01 लाख करोड़ रुपये बताया गया है। यह RBI के 1 लाख करोड़ रुपये के एसेट थ्रेशोल्ड से काफी ज्यादा है। विशेषज्ञों के अनुमान के मुताबिक, IPO आने पर टाटा संस का मूल्यांकन 7 लाख करोड़ से 11 लाख करोड़ रुपये के बीच हो सकता है। इस आकार का इश्यू भारतीय शेयर बाजार के सबसे बड़े IPO में शामिल हो सकता है।
टाटा संस में टाटा ट्रस्ट्स की हिस्सेदारी करीब 66% है। शापूरजी पालोनजी ग्रुप के पास 18.37% हिस्सेदारी है और वह लिस्टिंग का समर्थन करता रहा है। इसके अलावा TCS, टाटा मोटर्स और टाटा स्टील जैसी टाटा समूह की कंपनियों की संयुक्त हिस्सेदारी करीब 13% है। टाटा संस की लिस्टिंग होने पर इन कंपनियों को भी अपनी हिस्सेदारी के मूल्य से लाभ मिलने की संभावना जताई जाती है।
करीब 40 साल से टाटा ग्रुप का हिस्सा हैं चंद्रशेखरन
एन. चंद्रशेखरन करीब 40 साल से टाटा ग्रुप से जुड़े हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत TCS से की और आगे चलकर कंपनी के CEO और प्रबंध निदेशक बने। फरवरी 2017 में उन्हें पहली बार टाटा संस का चेयरमैन नियुक्त किया गया था।
उनके कार्यकाल में टाटा ग्रुप ने एविएशन, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, बैटरी और डिजिटल कारोबार जैसे क्षेत्रों में विस्तार किया। इसी अवधि में एअर इंडिया का अधिग्रहण और टाटा डिजिटल के विस्तार जैसे बड़े फैसले भी हुए।
आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2020 में टाटा ग्रुप का राजस्व 7.89 लाख करोड़ रुपये था, जो वित्त वर्ष 2026 में बढ़कर 16.24 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया। इसी तरह समूह की सूचीबद्ध कंपनियों का बाजार पूंजीकरण 2020 में करीब 9.31 लाख करोड़ रुपये था, जो 2026 में बढ़कर 24 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया।
नोएल टाटा ने क्यों किया विरोध?
चंद्रशेखरन के कार्यकाल को पांच साल बढ़ाने के प्रस्ताव का नोएल टाटा ने विरोध किया। उनका तर्क है कि चंद्रशेखरन खुद फरवरी 2027 के बाद पद पर नहीं बने रहने की इच्छा जता चुके थे। ऐसे में बोर्ड को नए उत्तराधिकारी की तलाश की प्रक्रिया आगे बढ़ानी चाहिए थी, न कि पहले लिए गए फैसले को बदलना चाहिए था। रिपोर्टों के अनुसार, टाटा ट्रस्ट्स ने बोर्ड के इस फैसले की वैधता पर भी सवाल उठाए हैं।
नोएल टाटा का एक तर्क यह भी है कि टाटा समूह की व्यवस्था के अनुसार एग्जीक्यूटिव 65 वर्ष की उम्र में सेवानिवृत्त होते हैं। पांच साल का नया कार्यकाल मिलने पर चंद्रशेखरन करीब 70 वर्ष की उम्र तक इस पद पर रहेंगे। उनकी मौजूदा उम्र 63 वर्ष है और प्रस्तावित नया कार्यकाल 2032 में समाप्त होगा।
पिछले कुछ महीनों में दोनों पक्षों के बीच रणनीतिक और वित्तीय मुद्दों को लेकर मतभेद भी सामने आए हैं। इनमें एअर इंडिया, डिजिटल कारोबार के वित्तीय प्रदर्शन, भारी कर्ज और खर्चों से जुड़े मुद्दे शामिल हैं। नोएल टाटा ने इन क्षेत्रों में अधिक सख्त निगरानी की जरूरत पर जोर दिया था। हालिया रिपोर्टों में टाटा समूह के कुछ गैर-सूचीबद्ध कारोबारों में हुए नुकसान और पूंजी आवंटन को लेकर भी मतभेद का उल्लेख किया गया है।
टाटा संस के बोर्ड में कौन-कौन शामिल हैं?
टाटा संस के बोर्ड में कुल छह सदस्य हैं। इनमें एन. चंद्रशेखरन एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर हैं। नोएल टाटा गैर-कार्यकारी निदेशक और टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन हैं। वेणु श्रीनिवासन गैर-कार्यकारी निदेशक, सौरभ अग्रवाल एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और समूह CFO, हरीश मनवानी स्वतंत्र निदेशक तथा अनीता मारंगोली जॉर्ज स्वतंत्र निदेशक हैं। चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति के प्रस्ताव पर नोएल टाटा ने विरोध किया, जबकि बाकी निदेशकों ने इसका समर्थन किया।
नोएल टाटा के तीनों बच्चे टाटा समूह से जुड़े
नोएल टाटा की बड़ी बेटी लीया टाटा इंडियन होटल्स कंपनी लिमिटेड (IHCL) से जुड़ी हैं। वह Gateway Hotels & Resorts की वाइस प्रेसिडेंट और ब्रांड लीडर के तौर पर काम कर रही हैं। वह टाटा एजुकेशनल ट्रस्ट और टाटा सोशल वेलफेयर जैसी संस्थाओं में ट्रस्टी भी हैं।
उनकी छोटी बेटी माया टाटा ने टाटा कैपिटल से करियर की शुरुआत की और बाद में टाटा डिजिटल में काम किया। फिलहाल वह ट्रेंट लिमिटेड के Westside से जुड़े ई-कॉमर्स और डिजिटल मार्केटिंग संचालन से जुड़ी हैं। वह जेएन टाटा एंडोमेंट और आरडी टाटा में ट्रस्टी हैं।
नोएल टाटा के बेटे नेविल टाटा ट्रेंट लिमिटेड से जुड़े हैं और इसकी सुपरमार्केट श्रृंखला Star Bazaar के प्रमुख हैं। उन्होंने ट्रेंट के फैशन ब्रांड Zudio के साथ भी काम किया है। वह सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट के ट्रस्टी और टाटा इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ स्किल्स के बोर्ड में भी शामिल हैं।
टाटा ग्रुप, टाटा संस और टाटा ट्रस्ट्स में क्या अंतर है?
टाटा ग्रुप के तहत TCS, टाटा मोटर्स, टाटा स्टील, टाटा पावर, टाइटन, एअर इंडिया और ट्रेंट जैसी 30 से अधिक प्रमुख सार्वजनिक और निजी कंपनियां आती हैं। यह अलग-अलग क्षेत्रों में कारोबार करने वाली कंपनियों का समूह है।
टाटा संस टाटा ग्रुप की मुख्य होल्डिंग कंपनी और प्रमोटर है। यह समूह की प्रमुख कंपनियों में बड़ी हिस्सेदारी रखती है और रणनीतिक फैसलों, नए कारोबारों में निवेश तथा ‘टाटा’ ब्रांड के इस्तेमाल और लाइसेंस से जुड़े मामलों में अहम भूमिका निभाती है। फिलहाल टाटा संस सूचीबद्ध कंपनी नहीं है और इसका स्वामित्व मुख्य रूप से टाटा ट्रस्ट्स के पास है।
टाटा ट्रस्ट्स में सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट समेत कई सामाजिक ट्रस्ट शामिल हैं। ये शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास और समाज कल्याण जैसे क्षेत्रों में काम करते हैं। टाटा संस में करीब 66% हिस्सेदारी होने के कारण ट्रस्ट्स का कंपनी के फैसलों में महत्वपूर्ण प्रभाव है।





