डायबिटीज मरीजों के लिए फायदेमंद हैं ये 2 योगासन, नियमित अभ्यास से ब्लड शुगर कंट्रोल में मिल सकती है मदद

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नई दिल्ली: मधुमेह यानी डायबिटीज एक ऐसी बीमारी है, जिसमें केवल दवाइयों पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं माना जाता। विशेषज्ञों के अनुसार संतुलित आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि और योगाभ्यास भी ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। मॉर्निंग वॉक के साथ कुछ विशेष योगासन और प्राणायाम को दिनचर्या में शामिल करने से शरीर की कार्यप्रणाली बेहतर होती है और स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

योग विशेषज्ञों का मानना है कि कुछ योगासन और श्वास संबंधी अभ्यास पाचन तंत्र, मेटाबॉलिज्म और मानसिक तनाव को संतुलित करने में मदद करते हैं, जो मधुमेह प्रबंधन में सहायक हो सकते हैं।

मेरुवक्रासन: रीढ़ और पेट के लिए लाभकारी योगासन

मेरुवक्रासन को शरीर की लचक बढ़ाने और पेट के आसपास की मांसपेशियों को सक्रिय करने वाला आसन माना जाता है। इसे करने के लिए जमीन पर बैठकर दोनों पैरों को सामने की ओर सीधा फैलाएं।

इसके बाद दाएं पैर को घुटने से मोड़कर बाएं घुटने के पास रखें। बाएं हाथ की कोहनी को दाएं घुटने के पास ले जाते हुए पैर के पंजे को छूने का प्रयास करें। वहीं दाएं हाथ को पीछे रखते हुए शरीर को दाईं ओर मोड़ें।

कुछ समय इस स्थिति में रहने के बाद सामान्य अवस्था में लौट आएं और फिर दूसरी दिशा में यही प्रक्रिया दोहराएं। नियमित अभ्यास से रीढ़ की हड्डी और शरीर के मध्य भाग में लचीलापन बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

अग्निसार प्राणायाम: पाचन और ऊर्जा संतुलन के लिए उपयोगी

अग्निसार प्राणायाम को पाचन तंत्र को सक्रिय करने वाला महत्वपूर्ण श्वास अभ्यास माना जाता है। इसे करने के लिए पद्मासन, सिद्धासन या सुखासन में बैठ जाएं और रीढ़, गर्दन तथा सिर को सीधा रखें।

गहरी सांस लेकर पूरी तरह बाहर छोड़ें। इसके बाद सांस को बाहर रोकते हुए दोनों हाथ घुटनों पर रखें और पेट को तेजी से अंदर-बाहर करें। जब तक सहज महसूस हो, इस प्रक्रिया को जारी रखें।

असुविधा महसूस होने से पहले सामान्य स्थिति में लौट आएं और धीरे-धीरे सांस लें। इस अभ्यास को तीन से चार बार दोहराया जा सकता है। हालांकि उच्च रक्तचाप, हृदय रोग या अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित लोगों को इसे विशेषज्ञ की सलाह से ही करना चाहिए।

प्राणायाम भी हो सकते हैं लाभकारी

डायबिटीज प्रबंधन में कपालभाति, नाड़ी शोधन प्राणायाम और अन्य श्वास अभ्यासों को भी उपयोगी माना जाता है। ये मानसिक तनाव कम करने और शरीर में ऑक्सीजन के बेहतर प्रवाह में मदद कर सकते हैं।

तनाव का स्तर नियंत्रित रहने से ब्लड शुगर प्रबंधन पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

खानपान का रखें विशेष ध्यान

योग के साथ-साथ संतुलित आहार भी मधुमेह नियंत्रण का महत्वपूर्ण हिस्सा है। विशेषज्ञों के अनुसार अत्यधिक कार्बोहाइड्रेट, स्टार्च और वसा युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित करना चाहिए।

दैनिक भोजन में चोकर युक्त आटा, दही, ताजी सब्जियां और सलाद शामिल किए जा सकते हैं। भोजन हमेशा नियमित समय पर करना चाहिए और जरूरत से अधिक खाने से बचना चाहिए। बार-बार भोजन करना भी स्वास्थ्य के लिए उचित नहीं माना जाता।

योग और स्वस्थ जीवनशैली का संयोजन जरूरी

विशेषज्ञों का कहना है कि नियमित योगाभ्यास, संतुलित आहार, पर्याप्त नींद और सक्रिय जीवनशैली मिलकर डायबिटीज प्रबंधन को बेहतर बना सकते हैं। हालांकि किसी भी योगासन या प्राणायाम को शुरू करने से पहले डॉक्टर या प्रशिक्षित योग विशेषज्ञ की सलाह लेना आवश्यक है, खासकर यदि व्यक्ति पहले से किसी गंभीर बीमारी से ग्रस्त हो।

 

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