होर्मुज क्षेत्र में फिर बढ़ा तनाव, अमेरिकी हमले के बाद ईरान ने दोबारा सक्रिय किए मिसाइल ठिकाने

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तेहरान: अमेरिका और ईरान के बीच जारी कूटनीतिक प्रयासों के बावजूद तनाव कम होने के बजाय एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। दोनों देशों के बीच किसी ठोस समझौते पर सहमति नहीं बन पाई है, जबकि हालिया घटनाक्रम ने क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। अमेरिकी पक्ष ने दावा किया है कि उसने ईरान के रडार और कमांड-कंट्रोल केंद्रों को निशाना बनाते हुए सैन्य कार्रवाई की है। इससे पहले कुवैत ने भी अपनी ओर से ईरानी हमले की जानकारी दी थी।

होर्मुज क्षेत्र के द्वीप को लेकर बढ़ा विवाद

अमेरिका और ईरान के बीच औपचारिक रूप से युद्धविराम लागू है, लेकिन कई मौकों पर दोनों पक्ष एक-दूसरे पर उसके उल्लंघन के आरोप लगाते रहे हैं। इसी बीच ईरान ने आरोप लगाया है कि अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य के निकट स्थित सिरिक द्वीप पर कार्रवाई के लिए कुवैत के एक एयरबेस का इस्तेमाल कर रहा था। ईरान का कहना है कि इसी कारण उस एयरबेस को निशाना बनाया गया।

अमेरिका ने केश्म और गुरुक क्षेत्र में की बमबारी

अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, आत्मरक्षा के तहत ईरान के गुरुक और केश्म द्वीप स्थित ठिकानों पर बमबारी की गई। इन हमलों का उद्देश्य कथित रूप से ईरानी सैन्य क्षमताओं को सीमित करना बताया गया है। हालांकि इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र में तनाव और अधिक बढ़ गया है।

मरम्मत पूरी, फिर सक्रिय हुए मिसाइल अड्डे

रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका द्वारा पहले निशाना बनाए गए कई मिसाइल ठिकानों की मरम्मत का काम पूरा कर लिया गया है। सुरंगों के भीतर बनाए गए इन अड्डों को दोबारा परिचालन के लिए तैयार किया गया है और उनकी सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाया गया है। बताया जा रहा है कि प्रवेश मार्गों को सील कर संरचनाओं को सुरक्षित किया गया है।

50 से अधिक ठिकाने फिर संचालन के लिए तैयार

सैटेलाइट तस्वीरों के आधार पर सामने आई जानकारी में दावा किया गया है कि जिन 69 ठिकानों पर पहले अमेरिकी हमले हुए थे, उनमें से लगभग 50 स्थानों को दोबारा खोल दिया गया है। इन ठिकानों पर रखरखाव और मरम्मत का कार्य भी पूरा कर लिया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारी मशीनों, बुलडोजरों और ट्रकों की मदद से मलबा हटाया गया तथा क्षतिग्रस्त सड़कों को भी दुरुस्त किया गया।

लॉन्ग रेंज मिसाइल क्षमता बहाल होने का दावा

सूत्रों के अनुसार, मरम्मत कार्य पूरा होने के बाद ईरान अब फिर से लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइलों के संचालन की स्थिति में पहुंच गया है। बताया गया है कि करीब सात सप्ताह पहले हुए युद्धविराम के तुरंत बाद ही इन सैन्य ठिकानों को पुनर्जीवित करने का अभियान शुरू कर दिया गया था।

समझौते पर अब भी नहीं बनी सहमति

अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है। रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा संशोधित प्रस्ताव कई बार मध्यस्थों के माध्यम से ईरान तक पहुंचाया गया है। इस प्रक्रिया में पाकिस्तान की भूमिका भी बताई जा रही है। हालांकि अमेरिकी प्रस्ताव में किए गए संशोधनों को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, लेकिन उनकी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। वहीं, ईरान की ओर से भी अब तक कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

फारस की खाड़ी में तनाव के बीच जारी समुद्री गतिविधियां

क्षेत्रीय तनाव के बावजूद ईरान ने दावा किया है कि पिछले 24 घंटों के दौरान 28 वाणिज्यिक जहाज उसकी अनुमति के साथ होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरे हैं। इनमें तेल टैंकर और मालवाहक पोत भी शामिल बताए गए हैं। इसके अलावा दक्षिण पार्स गैस क्षेत्र के कुछ प्लेटफॉर्मों पर उत्पादन आंशिक रूप से फिर शुरू कर दिया गया है।

आर्थिक दबाव के बीच बढ़ा जन असंतोष

सुरक्षा चुनौतियों के साथ-साथ ईरान आर्थिक मोर्चे पर भी दबाव झेल रहा है। जानकारी के अनुसार, खुजेस्तान प्रांत में मजदूरों और पेंशनभोगियों ने वेतन, पेंशन और बढ़ती महंगाई को लेकर प्रदर्शन किया। इससे देश के भीतर आर्थिक हालात को लेकर बढ़ती चिंता भी सामने आई है।