FPI की घर वापसी की तैयारी! विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने के लिए सरकार हटाएगी बड़ा टैक्स, कैबिनेट से मिली मंजूरी
नई दिल्ली: भारतीय शेयर बाजार से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की लगातार निकासी के बीच केंद्र सरकार ने उन्हें दोबारा निवेश के लिए आकर्षित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। जानकारी के अनुसार, भारतीय सरकारी बॉन्ड में निवेश करने वाले विदेशी निवेशकों पर लगने वाले कैपिटल गेन्स टैक्स को समाप्त करने का फैसला किया गया है। इस कदम को विदेशी पूंजी प्रवाह बढ़ाने और बाजार में विश्वास मजबूत करने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
इस वर्ष फरवरी को छोड़कर लगभग हर महीने विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से पूंजी निकाली है। लगातार बिकवाली के कारण शेयर बाजार पर दबाव बना हुआ है। ऐसे में सरकार का यह फैसला एफपीआई निवेशकों की वापसी की संभावनाओं को मजबूत करने वाला माना जा रहा है।
कैबिनेट ने प्रस्ताव को दी मंजूरी
सूत्रों के मुताबिक, नकदी प्रवाह बढ़ाने, रुपये को मजबूती देने और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले असर को कम करने के उद्देश्य से केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। सरकार इसे व्यापक आर्थिक स्थिरता बनाए रखने की दिशा में अहम कदम मान रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि विदेशी निवेशकों के लिए कर संबंधी बोझ कम होने से भारतीय बाजारों में निवेश बढ़ सकता है। इससे शेयर बाजार में तरलता मजबूत होगी और रुपये पर पड़ रहे दबाव को भी राहत मिलने की संभावना है।
आरबीआई के फैसलों पर भी टिकी निगाहें
सरकार का यह कदम भारतीय रिजर्व बैंक के साथ तैयार की गई समन्वित रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति की तीन दिवसीय बैठक बुधवार से शुरू हो चुकी है और शुक्रवार को इसके निर्णयों की घोषणा की जाएगी।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि केंद्रीय बैंक भी ऐसे कुछ वित्तीय उपायों की घोषणा कर सकता है जो सरकार के इस फैसले को और प्रभावी बनाने में मदद करेंगे। इससे निवेशकों का भरोसा बढ़ाने और वित्तीय प्रणाली को मजबूती देने का प्रयास किया जा सकता है।
अर्थव्यवस्था को वैश्विक झटकों से बचाने की कवायद
सरकार विदेशी निवेश आकर्षित करने के साथ-साथ विभिन्न उद्योगों और कारोबारी क्षेत्रों की चिंताओं को दूर करने के लिए भी कई नीतिगत विकल्पों पर काम कर रही है। आर्थिक गतिविधियों को गति देने के लिए सरकार समर्थित क्रेडिट लाइन उपलब्ध कराने पर विचार किया जा रहा है।
इसके अलावा, वैश्विक सप्लाई चेन में बाधाओं से प्रभावित भारतीय निर्यातकों के लिए विशेष राहत पैकेज तैयार किए जाने की भी जानकारी सामने आई है। इसका उद्देश्य निर्यात क्षेत्र को संभावित नुकसान से बचाना और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बनाए रखना है।
आयकर कानून में संशोधन का रास्ता साफ
इन प्रस्तावित बदलावों को लागू करने के लिए मंत्रिमंडल ने आयकर अधिनियम में संशोधन संबंधी अध्यादेश को भी मंजूरी दे दी है। राष्ट्रपति की स्वीकृति मिलने के बाद यह फैसला प्रभावी हो जाएगा और विदेशी निवेशकों को प्रस्तावित कर राहत का लाभ मिल सकेगा।
क्यों जरूरी हुआ यह फैसला?
सरकार का यह कदम ऐसे समय में सामने आया है जब पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक वित्तीय बाजारों में अनिश्चितता बढ़ी हुई है। विदेशी निवेशकों की रिकॉर्ड बिकवाली, डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी और बढ़ती ऊर्जा लागत ने भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं।
सूत्रों के अनुसार, सरकार भारतीय ऋण बाजारों में विदेशी निवेश को बढ़ावा देकर इन चुनौतियों का प्रभाव कम करना चाहती है। इसी उद्देश्य से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों द्वारा सरकारी प्रतिभूतियों में किए गए निवेश पर कैपिटल गेन्स टैक्स पूरी तरह समाप्त करने की तैयारी की गई है।
फिलहाल कितना टैक्स देना पड़ता है?
वर्तमान व्यवस्था के तहत विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों को 12 महीने से अधिक समय तक रखे गए बॉन्ड और सूचीबद्ध शेयरों पर 12.5 प्रतिशत लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स देना पड़ता है। इसके अलावा सरकारी बॉन्ड से प्राप्त ब्याज पर 20 प्रतिशत विदहोल्डिंग टैक्स भी लागू होता है।
सरकार ने वर्ष 2023 में ब्याज पर उपलब्ध 5 प्रतिशत की रियायती कर व्यवस्था को समाप्त कर दिया था, जिसके बाद विदेशी निवेशकों की कर देनदारी और बढ़ गई थी।
2026 में अब तक 2.5 लाख करोड़ रुपये की निकासी
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों का रुख इस वर्ष भारतीय बाजार के प्रति काफी कमजोर रहा है। फरवरी को छोड़कर पूरे वर्ष लगभग हर महीने बिकवाली देखने को मिली है। आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2026 में अब तक एफपीआई भारतीय बाजार से करीब 2.5 लाख करोड़ रुपये निकाल चुके हैं।
लगातार पूंजी निकासी के चलते यह वर्ष विदेशी निवेश के मोर्चे पर अब तक के सबसे चुनौतीपूर्ण वर्षों में शामिल होता दिखाई दे रहा है। ऐसे में सरकार का यह कदम निवेशकों का भरोसा लौटाने और बाजार में पूंजी प्रवाह बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।



