PF निकालना हुआ आसान! अब खाते से 75% तक निकाल सकेंगे कर्मचारी, जानें बीमारी, शादी और घर के लिए नए नियम
नई दिल्ली: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने पीएफ खाते से आंशिक निकासी के नियमों में बदलाव किया है। नए ढांचे के तहत पात्र कर्मचारी अपने पीएफ बैलेंस का अधिकतम 75 प्रतिशत तक निकाल सकते हैं, जबकि कम से कम 25 प्रतिशत राशि खाते में बचाकर रखनी होगी। यह व्यवस्था 1 जुलाई 2026 से लागू होने की जानकारी दी गई है। बीमारी के इलाज, बच्चों की पढ़ाई, शादी और घर से जुड़ी जरूरतों के लिए पीएफ से पैसा निकालने की सुविधा मिलेगी। हालांकि, निकासी की सीमा और कितनी बार पैसा निकाला जा सकता है, यह संबंधित श्रेणी और पात्रता पर निर्भर करेगा।
पीएफ निकासी के नियमों में क्या बदला?
पहले पीएफ से आंशिक निकासी के लिए अलग-अलग जरूरतों के हिसाब से कई प्रावधान थे। इससे पात्रता और निकासी की शर्तों को समझने में मुश्किल हो सकती थी। नए ढांचे में निकासी के प्रावधानों को तीन प्रमुख श्रेणियों में बांटा गया है।
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जरूरी जरूरतें: बीमारी का इलाज, बच्चों की पढ़ाई और शादी।
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विशेष परिस्थितियां: निर्धारित नियमों के तहत अन्य जरूरतों के लिए आंशिक निकासी।
नए प्रावधानों के तहत कुछ श्रेणियों में न्यूनतम सेवा अवधि घटाकर 12 महीने कर दी गई है। निकासी की गणना में कर्मचारी और नियोक्ता, दोनों के अंशदान के साथ जमा ब्याज को शामिल किया जाता है।
पीएफ खाते में 1 लाख रुपये हैं, तो कितना निकाल सकेंगे?
नए नियमों के मुताबिक, पात्र पीएफ बैलेंस का अधिकतम 75 प्रतिशत निकाला जा सकता है और कम से कम 25 प्रतिशत रकम खाते में बचाकर रखनी होगी।
उदाहरण के लिए, यदि आपका पात्र पीएफ बैलेंस 1 लाख रुपये है, तो 75 प्रतिशत के हिसाब से अधिकतम 75,000 रुपये निकाले जा सकते हैं। शेष 25,000 रुपये खाते में रहेंगे।
हालांकि, यह केवल प्रतिशत के आधार पर समझने के लिए दिया गया उदाहरण है। वास्तविक निकासी संबंधित श्रेणी की सीमा, पात्रता और अन्य शर्तों के अनुसार तय होगी। इसलिए हर कर्मचारी के लिए 75,000 रुपये निकालना जरूरी नहीं कि संभव हो।
बीमारी, पढ़ाई और शादी के लिए कितनी बार निकाल सकते हैं पैसा?
बीमारी, बच्चों की शिक्षा और शादी को जरूरी जरूरतों की श्रेणी में रखा गया है। इन मामलों में कम से कम 12 महीने की सेवा पूरी करने के बाद निर्धारित शर्तों के अनुसार निकासी के लिए आवेदन किया जा सकता है।
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बीमारी: एक वित्तीय वर्ष में अधिकतम 3 बार निकासी।
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बच्चों की पढ़ाई: पूरी सदस्यता अवधि में अधिकतम 10 बार निकासी।
इन सीमाओं के बावजूद निकासी की अधिकतम राशि और अन्य पात्रता शर्तें लागू रहेंगी। केवल आवेदन करने के योग्य होने से खाते की पूरी रकम निकालने का अधिकार नहीं मिल जाता।
घर खरीदने, बनाने और होम लोन चुकाने के नियम
अगर कर्मचारी घर खरीदना चाहते हैं, प्लॉट लेना चाहते हैं, मकान बनवाना चाहते हैं या होम लोन चुकाना चाहते हैं, तो आवास श्रेणी के तहत पीएफ निकासी का प्रावधान है। निर्धारित शर्तों के अनुसार घर की मरम्मत, सुधार और नवीनीकरण के लिए भी पैसा निकाला जा सकता है।
इसके लिए कम से कम 12 महीने की सदस्यता पूरी होना जरूरी बताया गया है। आवास संबंधी जरूरतों के लिए पूरी सदस्यता अवधि में अधिकतम 5 बार निकासी की अनुमति है। हालांकि, आवेदन की मंजूरी संबंधित योजना के नियमों और पात्रता पर निर्भर करेगी।
पीएफ खाते में 25% रकम बचाकर रखना क्यों जरूरी है?
पीएफ का उद्देश्य केवल जरूरत के समय आर्थिक सहायता देना नहीं, बल्कि कर्मचारियों के भविष्य और सेवानिवृत्ति के लिए बचत तैयार करना भी है। बार-बार निकासी करने से रिटायरमेंट के समय खाते में कम रकम बच सकती है।
इसी वजह से न्यूनतम 25 प्रतिशत बैलेंस बनाए रखने का प्रावधान बताया गया है। खाते में बची राशि पर नियमानुसार ब्याज मिलता रह सकता है और चक्रवृद्धि ब्याज से लंबे समय में बचत बढ़ने में मदद मिल सकती है।
इसलिए पीएफ से पैसा निकालने से पहले मौजूदा जरूरत के साथ भविष्य की बचत पर पड़ने वाले असर का भी आकलन करना जरूरी है।
बेरोजगारी की स्थिति में भी निकाल सकेंगे पैसा
विशेष परिस्थितियों के तहत कुछ मामलों में सदस्य को निकासी का कारण बताने की जरूरत नहीं होती, हालांकि निर्धारित सीमाएं और शर्तें लागू रहती हैं।
बेरोजगारी की स्थिति में सदस्य तत्काल अपने पीएफ बैलेंस का 75 प्रतिशत तक निकाल सकता है। बाकी 25 प्रतिशत राशि 12 महीने की बेरोजगारी पूरी होने के बाद निकाली जा सकती है। यह सामान्य आंशिक निकासी के प्रावधानों से अलग व्यवस्था है।
इसके अलावा, सेवानिवृत्ति और कुछ अन्य निर्धारित परिस्थितियों में पीएफ की पूरी रकम के अंतिम निपटान की अनुमति हो सकती है। इनमें स्थायी विकलांगता, छंटनी, स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति और स्थायी रूप से विदेश जाने जैसी स्थितियां शामिल हैं। हर मामले में संबंधित नियमों के अनुसार पात्रता की जांच जरूरी होगी।
पीएफ निकालने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
पीएफ से जरूरत के समय पैसा निकालने की सुविधा कर्मचारियों को राहत दे सकती है, लेकिन इसे नियमित खर्चों के लिए इस्तेमाल करने से बचना चाहिए। निकाली गई रकम पर भविष्य में मिलने वाला ब्याज और चक्रवृद्धि का लाभ कम हो सकता है, जिससे रिटायरमेंट के समय मिलने वाली कुल बचत प्रभावित हो सकती है।
आवेदन करने से पहले अपनी पात्रता, निकासी की सीमा और संबंधित शर्तों की जानकारी जरूर लें। इसके लिए कर्मचारी भविष्य निधि संगठन की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध नियमों की जांच करें।





