NEET पेपर लीक केस में CBI का बड़ा दावा! NTA पैनल से जुड़ा पेपर-सेटर 5 लाख में बेचता था सवाल, मोबाइल में मिले 111 मैचिंग प्रश्न

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नई दिल्ली: नीट-यूजी पेपर लीक मामले की जांच कर रही केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने विशेष अदालत में बड़ा खुलासा करने का दावा किया है। जांच एजेंसी के अनुसार, पेपर लीक की कड़ी नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) के उस पैनल तक पहुंचती है, जो परीक्षा के प्रश्न तैयार करने की प्रक्रिया से जुड़ा था। सीबीआई के इस दावे के बाद परीक्षा की गोपनीयता और पारदर्शिता को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

सीबीआई के मुताबिक, लातूर के एक कोचिंग सेंटर संचालक शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर ने एनटीए के पेपर-सेटर पैनल में शामिल पी. वी. कुलकर्णी से केमिस्ट्री के प्रश्न हासिल करने के लिए 5 लाख रुपये का भुगतान किया था। जांच एजेंसी ने इस संबंध में विशेष अदालत के समक्ष डिजिटल साक्ष्य भी प्रस्तुत किए हैं।

मोबाइल से मिलीं 36 तस्वीरें, 111 सवाल प्रश्नपत्र से मिले मेल

जांच के दौरान जब्त किए गए मोबाइल फोन की जांच में गैलरी से केमिस्ट्री के हाथ से लिखे प्रश्नों की 36 तस्वीरें बरामद हुईं। इन तस्वीरों में कुल 132 प्रश्न लिखे हुए थे।

सीबीआई के अनुसार, जब इन सवालों का मिलान एनटीए के मास्टर क्वेश्चन बैंक से किया गया तो 111 प्रश्न नीट-यूजी परीक्षा के प्रश्नपत्र से हूबहू मेल खाते पाए गए। जांच एजेंसी का दावा है कि मोबाइल के मेटाडेटा के विश्लेषण से पता चला कि ये तस्वीरें 3 मई को आयोजित परीक्षा से लगभग 10 दिन पहले ली गई थीं। एजेंसी के मुताबिक, ये नोट्स कथित तौर पर शिवराज मोटेगांवकर की ही हस्तलिपि में लिखे गए थे।

5 लाख रुपये की रकम भी बरामद होने का दावा

सीबीआई ने अदालत को बताया कि इस कथित पेपर लीक की कड़ी मोटेगांवकर के बेटे के जरिए जुड़ी, जो आरोपी पेपर-सेटर पी. वी. कुलकर्णी की केमिस्ट्री ट्यूटोरियल क्लास में पढ़ता था। जांच एजेंसी का आरोप है कि इसी माध्यम से गोपनीय प्रश्न उपलब्ध कराए गए।

जांच के मुताबिक, प्रश्न हासिल करने के लिए हुई 5 लाख रुपये की डील की रकम एक अन्य आरोपी मनोज भगवानराव शिरुरे की निशानदेही पर बरामद की गई है। इस मामले में अब तक 13 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और सभी आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं।

विवाद के बाद दोबारा कराई गई थी परीक्षा

नीट-यूजी परीक्षा में पेपर लीक और अनियमितताओं के आरोप सामने आने के बाद देशभर में विरोध प्रदर्शन हुए थे। इसके बाद एनटीए ने 3 मई को आयोजित नीट-यूजी परीक्षा को 12 मई को रद्द कर दिया था। बाद में मेडिकल अभ्यर्थियों के लिए 21 जून को दोबारा परीक्षा आयोजित की गई।

सीबीआई की जांच में सामने आए इन नए दावों के बाद परीक्षा प्रणाली, प्रश्नपत्रों की सुरक्षा और गोपनीयता को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो गई है।

 

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