JSSC-CGL के 1900 अभ्यर्थियों को बड़ी राहत, परीक्षा रद्द करने का सरकार का आदेश हाई कोर्ट ने किया निरस्त
नैसर्गिक न्याय के उल्लंघन का दिया गया था हवाला
इस मामले में सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाई कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। अभ्यर्थियों की ओर से अदालत में कहा गया था कि राज्य सरकार ने आदेश जारी कर जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा रद्द कर दी, जबकि प्रभावित अभ्यर्थियों को अपना पक्ष रखने का उचित अवसर नहीं दिया गया। उनके मुताबिक, यह कदम नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ था।
वहीं, राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई थी कि परीक्षा की निष्पक्षता और उसकी विश्वसनीयता बनाए रखने के साथ-साथ छात्रहित को ध्यान में रखते हुए परीक्षा रद्द करने का निर्णय लिया गया था।
18 अगस्त को सरकार ने रद्द की थी JSSC-CGL परीक्षा
राज्य सरकार ने 18 अगस्त को जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा 2024 को रद्द करने का आदेश जारी किया था। इस फैसले से परीक्षा में सफल हुए हजारों अभ्यर्थियों की नियुक्ति की उम्मीदों को झटका लगा था। सरकार ने परीक्षा में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं और प्रश्नपत्र लीक होने के सबूत मिलने का हवाला देते हुए इसे रद्द किया था।
दूसरी ओर, प्रभावित अभ्यर्थियों ने हाई कोर्ट में कहा था कि परीक्षा रद्द करने से पहले उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका नहीं दिया गया। अब हाई कोर्ट ने सरकार के रद्द करने संबंधी आदेश को निरस्त कर दिया है, जिससे 1900 अभ्यर्थियों को राहत मिली है।
22 भर्ती परीक्षाएं रद्द करने का भी हुआ था फैसला
परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर हुए आंदोलन के बीच हेमंत सोरेन सरकार ने वर्ष 2014 से झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC), झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) और आउटसोर्स एजेंसी टीडीपीएल की ओर से आयोजित 22 भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला किया था। इसके अलावा 23 अन्य परीक्षाओं की जांच के आदेश दिए गए थे।





