भारतीय नौसेना को आज मिलेगी नई ताकत, स्वदेशी स्टील्थ युद्धपोत ‘महेंद्रगिरि’ होगा शामिल, जानिए इसकी बड़ी खूबियां
नई दिल्ली: भारतीय नौसेना की समुद्री ताकत को शनिवार को बड़ा बल मिलने जा रहा है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह आज 11 जुलाई 2026 को विशाखापत्तनम स्थित नौसेना डॉकयार्ड में पूर्वी बेड़े में छठे प्रोजेक्ट 17ए के स्वदेशी स्टील्थ फ्रिगेट ‘महेंद्रगिरि’ को औपचारिक रूप से शामिल करेंगे। इस अवसर पर नौसेना के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहेंगे। रक्षा मंत्री ने इसे देश और भारतीय नौसेना के लिए गौरव का क्षण बताते हुए कहा कि पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से तैयार यह आधुनिक युद्धपोत आत्मनिर्भर भारत और देश के रक्षा उद्योगों की बढ़ती क्षमता का मजबूत उदाहरण है।
अत्याधुनिक तकनीक और आधुनिक हथियारों से लैस है महेंद्रगिरि
महेंद्रगिरि का डिजाइन भारतीय नौसेना के युद्धपोत डिजाइन ब्यूरो ने तैयार किया है, जबकि इसका निर्माण मुंबई स्थित मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड ने किया है। इस युद्धपोत में उन्नत स्टील्थ तकनीक, रडार से बचने की क्षमता और उच्च स्तर की स्वचालन प्रणाली दी गई है। यह हवा, समुद्र की सतह और पानी के भीतर होने वाले खतरों का मुकाबला करने के लिए आधुनिक स्वदेशी हथियारों, सेंसर और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणालियों से सुसज्जित है।
समुद्री सुरक्षा से लेकर राहत कार्यों तक निभाएगा अहम भूमिका
महेंद्रगिरि केवल युद्ध अभियानों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि समुद्री सुरक्षा अभियान, खोज एवं बचाव अभियान, मानवीय सहायता और आपदा राहत कार्यों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने में सक्षम है। यह युद्धपोत हिंद महासागर क्षेत्र और उससे आगे तक लंबे समय तक तैनात रहकर अभियान संचालित कर सकता है।
पूर्वी घाट की पर्वत श्रृंखला के नाम पर रखा गया नाम
इस स्वदेशी युद्धपोत का नाम पूर्वी घाट की महेंद्रगिरि पर्वत श्रृंखला के नाम पर रखा गया है। भारतीय नौसेना के इतिहास में इस नाम का यह पहला युद्धपोत है। इसके निर्माण में 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल किया गया है। निर्माण प्रक्रिया में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों सहित कई भारतीय उद्योगों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया है, जिससे देश के रक्षा विनिर्माण क्षेत्र को मजबूती मिलने के साथ रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं। इस युद्धपोत का आदर्श वाक्य ‘शक्तिशाली-भव्य-अतुलनीय’ रखा गया है।
विशाखापत्तनम पहुंचे रक्षा मंत्री, नौसेना प्रमुख ने किया स्वागत
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह शुक्रवार शाम को ही विशाखापत्तनम पहुंच गए थे, जहां हवाई अड्डे पर नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन ने उनका स्वागत किया। रक्षा मंत्री ने कहा कि महेंद्रगिरि भारत के समुद्री हितों की रक्षा करने और सुरक्षित हिंद-प्रशांत क्षेत्र के संकल्प को और मजबूत करने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने विश्वास जताया कि इस युद्धपोत के नौसेना में शामिल होने से भारतीय नौसेना की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और भारत युद्धपोत निर्माण के क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान को और सुदृढ़ करेगा।





