भारत-अमेरिका डील से खुलेगा 500 अरब डॉलर व्यापार का रास्ता! 2030 तक कारोबार दोगुना करने का बड़ा लक्ष्य

24A_145

नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच आर्थिक रिश्तों को नई ऊंचाई देने वाला एक बड़ा व्यापार समझौता अंतिम चरण में पहुंच गया है। दोनों देशों के बीच प्रस्तावित व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते को हाल के वर्षों का सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक करार माना जा रहा है। इस समझौते का लक्ष्य वर्ष 2030 तक दोनों देशों के बीच व्यापार को 500 अरब डॉलर के स्तर तक पहुंचाना है। इसी महत्वाकांक्षी पहल को ‘मिशन 500’ नाम दिया गया है।

अमेरिकी विदेश मंत्रालय की वरिष्ठ अधिकारी बेथनी पोलोस मॉरिसन ने एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि भारत और अमेरिका आर्थिक एवं रणनीतिक साझेदारी को नए दौर में ले जाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने बताया कि दोनों देशों की टीमें समझौते को अंतिम रूप देने के लिए लगातार काम कर रही हैं।

परिणाम आधारित साझेदारी पर फोकस

अमेरिकी अधिकारी के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में दोनों देशों ने केवल संवाद तक सीमित रहने के बजाय ठोस परिणामों पर ध्यान केंद्रित किया है। फरवरी 2026 में व्यापार समझौते की दिशा में आधिकारिक पहल के बाद से दोनों पक्ष लगातार बातचीत कर रहे हैं।

माना जा रहा है कि समझौते के लागू होने से अमेरिकी कंपनियों और निर्यातकों को भारत के विशाल उपभोक्ता बाजार तक अधिक पहुंच मिलेगी, जबकि भारत को भी निवेश, तकनीक और ऊर्जा क्षेत्र में बड़ा लाभ मिल सकता है।

भारत करेगा 500 अरब डॉलर की बड़ी खरीदारी

प्रस्तावित समझौते के तहत भारत अगले पांच वर्षों में अमेरिका से करीब 500 अरब डॉलर मूल्य के उत्पादों और सेवाओं की खरीद कर सकता है। इसमें ऊर्जा उत्पाद, विमान और उनके कलपुर्जे, कीमती धातुएं, कोकिंग कोल तथा अत्याधुनिक तकनीकी उपकरण शामिल बताए जा रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को अभूतपूर्व स्तर तक पहुंचा सकता है।

ऊर्जा और परमाणु सहयोग को मिलेगा नया आयाम

भारत और अमेरिका के बीच ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग लगातार बढ़ रहा है। दोनों देशों के बीच हाइड्रोकार्बन व्यापार में हाल के वर्षों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है और यह 14.4 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है।

इसके साथ ही नागरिक परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर विचार किया जा रहा है। दोनों देश नई नीतिगत व्यवस्थाओं के तहत ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

अमेरिका में भारतीय कंपनियों का रिकॉर्ड निवेश

व्यापार समझौते के समानांतर भारतीय कंपनियां भी अमेरिका में बड़े निवेश की तैयारी कर रही हैं। हाल ही में आयोजित निवेश सम्मेलन में भारतीय कंपनियों ने करीब 20 अरब डॉलर के नए निवेश की प्रतिबद्धता जताई है।

विशेषज्ञों के अनुसार यह अमेरिकी अर्थव्यवस्था में भारतीय निवेश की सबसे बड़ी घोषणाओं में से एक मानी जा रही है और इससे दोनों देशों के कारोबारी संबंध और मजबूत होंगे।

टैरिफ बदलाव के बाद तेज हुई बातचीत

हाल ही में अमेरिका की टैरिफ नीति में हुए बदलाव और न्यायिक फैसलों के बाद व्यापार समझौते के कुछ प्रावधानों पर नए सिरे से विचार किया जा रहा है। इसी सिलसिले में अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधिमंडल नई दिल्ली में भारतीय अधिकारियों के साथ विस्तृत चर्चा कर रहा है।

दोनों देशों की कोशिश है कि जुलाई 2026 के अंत से पहले समझौते के पहले चरण को लागू करने का रास्ता साफ हो जाए। भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भी संकेत दिए हैं कि जुलाई के मध्य तक समझौते के प्रारंभिक चरण को लागू करने की स्थिति बन सकती है।

भारत-अमेरिका व्यापार में लगातार बढ़ोतरी

वित्तीय वर्ष 2025-26 में अमेरिका भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार रहा। इस दौरान भारत का अमेरिका को निर्यात 87.3 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जबकि अमेरिका से आयात बढ़कर 52.9 अरब डॉलर हो गया।

इस वजह से भारत का व्यापार अधिशेष कुछ कम हुआ है, लेकिन दोनों देशों के बीच कुल व्यापारिक गतिविधियों में उल्लेखनीय विस्तार देखने को मिला है।

शिक्षा भी बना रही रिश्तों को मजबूत

व्यापार और निवेश के अलावा शिक्षा क्षेत्र भी भारत-अमेरिका संबंधों का महत्वपूर्ण आधार बना हुआ है। वर्तमान में 3.30 लाख से अधिक भारतीय छात्र अमेरिका के विभिन्न शिक्षण संस्थानों में अध्ययन कर रहे हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार भारतीय छात्रों की मौजूदगी न केवल शैक्षणिक सहयोग को मजबूत करती है, बल्कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था में भी महत्वपूर्ण योगदान देती है। यही कारण है कि दोनों देशों के संबंध अब केवल रणनीतिक या व्यापारिक नहीं, बल्कि बहुआयामी साझेदारी में बदलते जा रहे हैं।

 

----------------------------------------------------------------------------------------------

एक नज़र