रात 4 बजे सोकर दोपहर 12 बजे उठना कितना सही? सिर्फ 8 घंटे की नींद नहीं, सोने का समय भी है बेहद अहम

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नई दिल्ली: अच्छी सेहत के लिए रोजाना 7 से 9 घंटे की नींद जरूरी मानी जाती है। विशेषज्ञ भी वयस्कों को औसतन 8 घंटे की नींद लेने की सलाह देते हैं। लेकिन क्या किसी भी समय सोकर 8 घंटे की नींद पूरी कर लेना पर्याप्त है? इस सवाल का जवाब स्लीप मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. अबिनाश जोशी ने दिया है। उनके अनुसार, केवल नींद की अवधि ही नहीं, बल्कि सोने का समय भी शरीर के लिए उतना ही महत्वपूर्ण होता है।

शरीर की आंतरिक घड़ी करती है नींद को नियंत्रित

विशेषज्ञों के मुताबिक, शरीर की एक प्राकृतिक जैविक घड़ी होती है, जिसे सर्कैडियन रिदम कहा जाता है। यह शरीर के हार्मोन, तापमान, ऊर्जा स्तर और कोशिकाओं की मरम्मत जैसी कई महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं को नियंत्रित करती है। आमतौर पर यह घड़ी रात 11 बजे से सुबह 7 बजे के बीच सोने और जागने के चक्र के अनुसार काम करती है।

यदि कोई व्यक्ति लगातार देर रात या सुबह के समय सोता है, तो उसकी सर्कैडियन रिदम प्रभावित हो सकती है। ऐसे में भले ही वह 8 घंटे की नींद पूरी कर ले, शरीर को नींद का पूरा लाभ नहीं मिल पाता।

सिर्फ घंटों की नहीं, नींद के समय की भी होती है अहम भूमिका

विशेषज्ञ बताते हैं कि शरीर को केवल यह फर्क नहीं पड़ता कि आपने कितने घंटे नींद ली, बल्कि यह भी महत्वपूर्ण है कि आप किस समय सोए। लंबे समय तक देर रात सोने की आदत शरीर की प्राकृतिक लय को बिगाड़ सकती है, जिसका असर शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य दोनों पर पड़ सकता है।

देर से सोने की आदत से बढ़ सकते हैं कई स्वास्थ्य जोखिम

लगातार देर रात सोने और असामान्य समय पर जागने से कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, इससे हृदय संबंधी बीमारियों और हाई ब्लड प्रेशर का जोखिम बढ़ सकता है। इसके अलावा शरीर की इंसुलिन संवेदनशीलता प्रभावित हो सकती है, जिससे प्रीडायबिटीज जैसी स्थितियां विकसित होने की आशंका बढ़ जाती है।

इतना ही नहीं, शरीर के बड़ी संख्या में जैविक जीनों की प्राकृतिक कार्यप्रणाली भी प्रभावित हो सकती है। मानसिक स्वास्थ्य पर भी इसका असर पड़ता है और डिप्रेशन तथा एंग्जायटी जैसी समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है।

नींद का समय सुधारने के लिए अपनाएं ये उपाय

विशेषज्ञों का कहना है कि सर्कैडियन रिदम को संतुलित रखने के लिए सुबह जागने के एक से दो घंटे के भीतर कम से कम 30 मिनट तक प्राकृतिक धूप लेना फायदेमंद हो सकता है। इसे नींद के समय को सही करने के सबसे प्रभावी तरीकों में से एक माना जाता है।

सोने के निर्धारित समय से दो से तीन घंटे पहले घर की रोशनी कम कर देना भी शरीर को आराम की स्थिति में लाने में मदद कर सकता है। इसके अलावा, जागने का एक निश्चित समय तय करना और उसे सप्ताहांत में भी नियमित रूप से फॉलो करना बेहतर नींद के लिए जरूरी माना जाता है।

रात में नींद नहीं आती तो क्या करें?

यदि रात में नींद आने में परेशानी होती है, तो सोने से पहले किताब पढ़ना या हल्का संगीत सुनना मददगार हो सकता है। इससे मन शांत होता है और शरीर धीरे-धीरे नींद के लिए तैयार होने लगता है।