भारतीय मूल के अनिल मेनन की ऐतिहासिक उड़ान आज! पहली बार ISS मिशन पर जाएंगे, डॉक्टर से NASA एस्ट्रोनॉट बनने तक का प्रेरक सफर
नई दिल्ली: भारतीय मूल के अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री अनिल मेनन आज अपने पहले अंतरिक्ष मिशन पर रवाना होने जा रहे हैं। डॉक्टर, इंजीनियर और अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के अंतरिक्ष यात्री अनिल मेनन 14 जुलाई को रूस के सोयुज एमएस-29 अंतरिक्ष यान के जरिए इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (आईएसएस) के लिए उड़ान भरेंगे। यह उनका पहला अंतरिक्ष मिशन होगा, जिसके तहत वे करीब आठ महीने तक पृथ्वी से लगभग 400 किलोमीटर ऊपर स्थित अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर रहकर वैज्ञानिक अनुसंधान करेंगे।
नासा के अनुसार, सोयुज एमएस-29 का प्रक्षेपण कजाकिस्तान के बैकोनूर कॉस्मोड्रोम से स्थानीय समयानुसार सुबह 10 बजकर 47 मिनट (बैकोनूर समयानुसार शाम 7 बजकर 47 मिनट) पर किया जाएगा। इस मिशन में अनिल मेनन के साथ रूस के अंतरिक्ष यात्री प्योत्र डबरोव और अन्ना किकिना भी शामिल होंगे।
तीन घंटे में पहुंचेगा अंतरिक्ष स्टेशन, आठ महीने तक रहेगा मिशन
नासा की जानकारी के मुताबिक, प्रक्षेपण के करीब तीन घंटे बाद सोयुज अंतरिक्ष यान इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन से जुड़ जाएगा। इसके बाद तीनों अंतरिक्ष यात्री ‘एक्सपीडिशन-74’ मिशन के तहत लगभग आठ महीने तक विभिन्न वैज्ञानिक और तकनीकी अनुसंधानों पर काम करेंगे। मिशन पूरा होने के बाद उनकी पृथ्वी पर वापसी अप्रैल 2027 में प्रस्तावित है।
डॉक्टर, इंजीनियर और सैन्य अधिकारी भी हैं अनिल मेनन
अनिल मेनन का चयन वर्ष 2021 में नासा के अंतरिक्ष यात्री के रूप में हुआ था। वे आपातकालीन चिकित्सा और एयरोस्पेस मेडिसिन के विशेषज्ञ चिकित्सक हैं। इसके साथ ही वे मैकेनिकल इंजीनियर भी हैं और अमेरिकी स्पेस फोर्स में कर्नल के पद पर कार्यरत हैं।
नासा से जुड़ने से पहले उन्होंने फ्लाइट सर्जन के रूप में अंतरिक्ष यात्रियों के स्वास्थ्य की जिम्मेदारी संभाली। इसके अलावा उन्होंने स्पेसएक्स के मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके पास न्यूरोबायोलॉजी, मैकेनिकल इंजीनियरिंग और मेडिसिन जैसे विषयों में उच्च शिक्षा की डिग्रियां हैं।
केरल से जुड़ी हैं पारिवारिक जड़ें
अनिल मेनन का जन्म अमेरिका के मिनियापोलिस शहर में हुआ था। उनके पिता भारतीय मूल के हैं और उनकी पारिवारिक जड़ें केरल के पलक्कड़ जिले से जुड़ी हैं, जबकि उनकी मां यूक्रेन मूल की हैं।
अपने करियर के शुरुआती दौर में उन्होंने अमेरिकी वायुसेना में भी सेवाएं दीं और ‘ऑपरेशन एंड्योरिंग फ्रीडम’ के दौरान अफगानिस्तान में तैनात रहे। इसके अलावा वे हिमालयन रेस्क्यू एसोसिएशन के साथ मिलकर माउंट एवरेस्ट क्षेत्र में पर्वतारोहियों को चिकित्सकीय सहायता भी दे चुके हैं।
पत्नी एना मेनन भी हैं अंतरिक्ष यात्री
अनिल मेनन का परिवार भी अंतरिक्ष विज्ञान से गहराई से जुड़ा हुआ है। उनकी पत्नी एना मेनन भी अंतरिक्ष यात्री हैं। उन्होंने सितंबर 2024 में ‘पोलारिस डॉन’ मिशन के तहत अंतरिक्ष यात्रा की थी। यह मिशन दुनिया की पहली निजी स्पेसवॉक के लिए चर्चित रहा। वर्तमान में एना नासा में प्रशिक्षण ले रही हैं। दंपति के दो बच्चे हैं और उन्हें अक्सर ‘एस्ट्रोनॉट फैमिली’ के रूप में भी जाना जाता है।
आईएसएस पर करेंगे भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों से जुड़े अहम शोध
आईएसएस पर अपने प्रवास के दौरान अनिल मेनन कई महत्वपूर्ण वैज्ञानिक प्रयोगों में हिस्सा लेंगे। इनमें अंतरिक्ष में सेमीकंडक्टर क्रिस्टल विकसित करने की तकनीक पर काम शामिल है, जिसका उपयोग भविष्य में उच्च क्षमता वाले कंप्यूटिंग सिस्टम और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित उपकरणों के विकास में किया जा सकता है।
इसके अलावा वे सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण में मानव शरीर पर पड़ने वाले प्रभावों का अध्ययन करेंगे। मिशन के दौरान रक्त प्रवाह में होने वाले बदलाव, संवहनी ऊतकों की बायोप्रिंटिंग और चंद्रमा एवं मंगल जैसे दीर्घकालिक अंतरिक्ष अभियानों के लिए आवश्यक चिकित्सा तकनीकों पर भी शोध किया जाएगा।





