फ्रांस पर कर्ज का बढ़ता पहाड़! विशेषज्ञों की बड़ी चेतावनी, सुधार नहीं हुए तो 2050 तक GDP के 203% तक पहुंच सकता है सार्वजनिक ऋण
नई दिल्ली: बढ़ते सरकारी कर्ज को लेकर अब सिर्फ अमेरिका ही नहीं, बल्कि यूरोप की प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं भी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही हैं। फ्रांस की वित्तीय स्थिति को लेकर अर्थशास्त्रियों और वैश्विक संस्थानों ने चिंता जताई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी राजकोषीय सुधार लागू नहीं किए गए तो आने वाले वर्षों में सार्वजनिक कर्ज देश की अर्थव्यवस्था पर भारी बोझ बन सकता है।
आंकड़ों के अनुसार, फ्रांस का सार्वजनिक कर्ज वर्ष की पहली तिमाही में बढ़कर 3.5 ट्रिलियन यूरो यानी करीब 4 ट्रिलियन डॉलर से अधिक हो गया है। यह देश की सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का 117.5 प्रतिशत है। जानकारों का मानना है कि राजनीतिक अनिश्चितता और सुधारों में देरी से हालात और गंभीर हो सकते हैं।
‘स्नोबॉल इफेक्ट’ से बढ़ रही चिंता
अर्थशास्त्रियों ने फ्रांस के सामने ‘स्नोबॉल इफेक्ट’ का खतरा बताया है। इसका मतलब है कि जब सरकारी बॉन्ड पर दिया जाने वाला ब्याज आर्थिक विकास दर से अधिक हो जाता है, तब कर्ज लगातार बढ़ता जाता है। यदि सरकार लगातार प्राथमिक बजट अधिशेष बनाए रखने में सफल नहीं होती, तो सार्वजनिक ऋण अर्थव्यवस्था की तुलना में तेजी से बढ़ने लगता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, शुरुआत में मामूली दिखने वाला यह वित्तीय दबाव समय के साथ बड़ी आर्थिक समस्या में बदल सकता है और सरकार के लिए इसे नियंत्रित करना कठिन हो सकता है।
2050 तक GDP के 203 प्रतिशत तक पहुंच सकता है कर्ज
एक रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि यदि मौजूदा परिस्थितियां बनी रहीं तो 2027 के राष्ट्रपति चुनाव से पहले भी कर्ज का दबाव लगातार बढ़ता रहेगा। रिपोर्ट में ओईसीडी के महासचिव मैथियास कोरमैन के बयान का हवाला देते हुए कहा गया है कि जरूरी सुधार नहीं किए गए तो वर्ष 2050 तक फ्रांस का सार्वजनिक कर्ज GDP के 203 प्रतिशत तक पहुंच सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2029 तक केवल कर्ज पर ब्याज भुगतान का खर्च ही करीब 100 अरब यूरो तक पहुंचने की आशंका है।
रेटिंग एजेंसियों और निवेशकों ने भी जताई चिंता
क्रेडिट रेटिंग एजेंसी मूडीज़ की वरिष्ठ अधिकारी सारा कार्लसन ने कहा है कि सार्वजनिक कर्ज के अनुपात में ब्याज भुगतान का दबाव फ्रांस में सबसे अधिक बढ़ने की संभावना है। वहीं निवेश बैंक मॉर्गन स्टेनली ने वित्तीय जोखिमों का हवाला देते हुए अपने ग्राहकों को फ्रांसीसी सरकारी बॉन्ड में निवेश कम करने की सलाह दी है।
कोविड के बाद भी कम नहीं हुआ कर्ज का बोझ
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, फ्रांस का सार्वजनिक कर्ज अब कोविड-19 महामारी के दौरान दर्ज स्तर के करीब पहुंच चुका है। एक रिपोर्ट के अनुसार, यूरोजोन में फ्रांस ऐसा एकमात्र देश है जिसने महामारी के बाद अपने सार्वजनिक कर्ज के बोझ में उल्लेखनीय कमी नहीं की।
ब्याज भुगतान बना सबसे बड़ा वित्तीय दबाव
वर्ष 2025 में फ्रांस ने अपने कर्ज पर ब्याज चुकाने के लिए 66 अरब यूरो खर्च किए, जो शिक्षा और रक्षा जैसे प्रमुख क्षेत्रों के बजट से भी अधिक बताया गया है। अनुमान है कि वर्ष 2029 तक यह खर्च बढ़कर 100 अरब यूरो तक पहुंच सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि मजबूत आर्थिक वृद्धि या लगातार प्राथमिक बजट अधिशेष के जरिए स्थिति में सुधार संभव है, लेकिन निकट भविष्य में इसकी संभावना बेहद सीमित दिखाई देती है।
राष्ट्रपति चुनाव से पहले बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना कर्ज
अगले वर्ष होने वाले राष्ट्रपति चुनाव से पहले बढ़ता सार्वजनिक कर्ज फ्रांस में प्रमुख राजनीतिक मुद्दा बन गया है। प्रमुख सेंट्रिस्ट नेता एडुआर्ड फिलिप और गैब्रियल अट्टल इसे अपने चुनावी अभियान का अहम विषय बना रहे हैं। सांसद केविन मौविएक्स ने भी चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सुधारों में और देरी हुई तो देश को इसके गंभीर आर्थिक परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।





