फ्लाइट क्रू पर और कसेगा शिकंजा, 25% से ज्यादा सदस्यों का हो सकता है अचानक ड्रग टेस्ट; एयर इंडिया की जांच के बाद सरकार सख्त
नई दिल्ली: विमानन सुरक्षा को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार फ्लाइट क्रू के मादक पदार्थों की जांच के नियम और सख्त करने की तैयारी में है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय आकस्मिक ड्रग टेस्ट का दायरा मौजूदा 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 25 प्रतिशत से अधिक करने के प्रस्ताव पर विचार कर रहा है। फुकेत से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की उड़ान में हुई गंभीर घटना के बाद यह मुद्दा सरकार के स्तर पर फिर चर्चा में आया है।
चार अगस्त को फुकेत से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की उड़ान अचानक करीब 300 फीट नीचे आ गई थी। विमान में तीन शिशुओं समेत 137 यात्री और चालक दल के आठ सदस्य सवार थे। अचानक हुई तेज हलचल के कारण 24 लोग घायल हुए, जिनमें 20 यात्री और चालक दल के चार सदस्य शामिल थे।
जांच में पायलट के शुरुआती ड्रग टेस्ट में आया पॉजिटिव परिणाम
घटना की जांच के दौरान विमान के मुख्य पायलट का प्रारंभिक ड्रग स्क्रीनिंग टेस्ट किया गया। इसमें भांग या गांजे जैसे नशीले पदार्थ के सेवन की पुष्टि हुई। इसके बाद संबंधित नमूने को विस्तृत प्रयोगशाला जांच के लिए भेजा गया। इस घटनाक्रम के बाद उड़ान संचालन से जुड़े पायलटों और चालक दल के अन्य सदस्यों के स्वास्थ्य तथा प्रतिबंधित पदार्थों के इस्तेमाल की निगरानी को लेकर सवाल उठे हैं।
एयर इंडिया ने सभी पायलटों की अनिवार्य जांच शुरू की
घटना के बाद एयर इंडिया ने अपने सभी पायलटों की मादक पदार्थों और नियमों के तहत प्रतिबंधित दवाओं के सेवन को लेकर अनिवार्य स्क्रीनिंग शुरू करने का फैसला किया है। एयरलाइन ने 13 अगस्त से अपने सभी पायलटों की जांच शुरू कर दी है। यह प्रक्रिया उड़ान के बाद, प्रशिक्षण के दौरान या संबंधित बेस की ओर से तय स्थानों पर की जा रही है।
एयरलाइन के उड़ान परिचालन प्रमुख ने पायलटों को भेजे निर्देश में सभी की स्क्रीनिंग अनिवार्य किए जाने की जानकारी दी है। जांच में उन मादक पदार्थों और दवाओं का पता लगाया जा रहा है, जिनका विमान संचालन से जुड़े कर्मचारियों के लिए इस्तेमाल नियमों के तहत प्रतिबंधित है।
डीजीसीए के नियमों में पहले से है आकस्मिक जांच का प्रावधान
विमानन क्षेत्र में मादक पदार्थों के सेवन की जांच के लिए नागरिक उड्डयन महानिदेशालय ने पहले से नियम निर्धारित कर रखे हैं। सितंबर 2021 में जारी किए गए ये नियम जनवरी 2022 से प्रभावी हुए थे। मौजूदा व्यवस्था के तहत सभी पायलटों और चालक दल के सदस्यों की नियमित जांच अनिवार्य नहीं है। इसके बजाय आकस्मिक ड्रग टेस्ट का प्रावधान है।
अब नागरिक उड्डयन मंत्रालय इस आकस्मिक जांच का दायरा बढ़ाने पर विचार कर रहा है। प्रस्ताव लागू होने पर मौजूदा व्यवस्था की तुलना में फ्लाइट क्रू के अधिक सदस्यों की अचानक जांच की जा सकेगी। इसका उद्देश्य उड़ान संचालन से जुड़े कर्मचारियों में नियमों के पालन को सुनिश्चित करना और यात्रियों की सुरक्षा को मजबूत करना है।
फुकेत-दिल्ली उड़ान की घटना के बाद बढ़ी चिंता
फुकेत-दिल्ली उड़ान में हुई घटना ने इस मुद्दे को और गंभीर बना दिया है। विमान में बड़ी संख्या में यात्री सवार थे और अचानक ऊंचाई कम होने के कारण कई लोगों को चोटें आईं। ऐसे मामलों में पायलट और चालक दल की शारीरिक तथा मानसिक स्थिति को सुरक्षित उड़ान के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
सरकार की ओर से जांच का दायरा बढ़ाने पर विचार ऐसे समय में हो रहा है जब विमानन क्षेत्र में सुरक्षा मानकों की निगरानी बढ़ाई जा रही है। प्रस्ताव का अंतिम स्वरूप सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि 25 प्रतिशत से अधिक फ्लाइट क्रू की आकस्मिक जांच किस प्रक्रिया और कितनी नियमितता से की जाएगी। फिलहाल एयर इंडिया की ओर से सभी पायलटों की अनिवार्य स्क्रीनिंग शुरू किए जाने से विमानन क्षेत्र में ड्रग टेस्ट को लेकर सख्ती बढ़ने के संकेत मिले हैं।





