H-1B वीजा पर अमेरिका का बड़ा एक्शन प्लान? 365 दिनों में बदल सकती है पूरी व्यवस्था, भारतीय प्रोफेशनल्स पर क्या होगा असर
वाशिंगटन: अमेरिका में नौकरी करने वाले भारतीय आईटी और अन्य पेशेवरों के लिए H-1B वीजा को लेकर नई चिंता सामने आई है। ट्रंप प्रशासन इस वीजा व्यवस्था के नियमों को और सख्त करने की तैयारी में है। इसी बीच अमेरिकी श्रम विभाग के इंस्पेक्टर जनरल एंथनी डी’एस्पोसिटो ने संकेत दिया है कि अगले 365 दिनों में विदेशी श्रम वीजा व्यवस्था का स्वरूप काफी बदल सकता है। उन्होंने वीजा से जुड़ी धोखाधड़ी करने वाले नियोक्ताओं के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई के संकेत भी दिए हैं।
भारतीय प्रोफेशनल्स पर क्यों पड़ेगा सीधा असर?
H-1B वीजा कार्यक्रम में भारतीय नागरिकों की बड़ी हिस्सेदारी है। अमेरिकी आईटी कंपनियों, टेक सेक्टर और कॉरपोरेट जगत में काम करने वाले H-1B वीजा धारकों में 70 प्रतिशत से अधिक भारतीय पेशेवर बताए जाते हैं। ऐसे में इस कार्यक्रम में बड़े बदलाव का असर अमेरिका में काम कर रहे भारतीयों के साथ-साथ वहां पढ़ रहे छात्रों और भविष्य में नौकरी के लिए जाने की तैयारी कर रहे युवाओं पर भी पड़ सकता है।
H-1B व्यवस्था में बदलाव होने की स्थिति में पहले से अमेरिका में मौजूद भारतीय पेशेवरों के वीजा नवीनीकरण और ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
365 दिनों में बदल सकता है वीजा सिस्टम
अमेरिकी कमेंटेटर और यूट्यूबर बेनी जॉनसन को दिए एक इंटरव्यू में एंथनी डी’एस्पोसिटो ने वीजा व्यवस्था में संभावित बदलाव को लेकर जानकारी दी। उन्होंने कहा कि विदेशी श्रम वीजा कार्यक्रम अगले 365 दिनों में पूरी तरह अलग नजर आ सकता है।
डी’एस्पोसिटो के मुताबिक, जांच अधिकारी वीजा के नाम पर धोखाधड़ी और शेल कंपनियों के जरिए फर्जीवाड़ा करने वालों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज करने और गिरफ्तारी की दिशा में काम कर रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि अमेरिकी सरकार H-1B वीजा कार्यक्रम से जुड़ी धोखाधड़ी, कर्मचारियों के शोषण और मानव तस्करी जैसे गंभीर आरोपों की जांच कर रही है।
कॉग्निजेंट और क्लाउडेरा से जुड़े आवेदन जांच के दायरे में
विदेशी कर्मचारियों की भर्ती में कथित अनियमितताओं को लेकर अमेरिकी जांच एजेंसियों ने कई बड़ी कंपनियों पर कार्रवाई शुरू की है। आपराधिक जांच के चलते टेक क्षेत्र की कंपनियों कॉग्निजेंट और क्लाउडेरा से जुड़े H-1B वीजा आवेदनों को फिलहाल निलंबित किए जाने की जानकारी सामने आई है।
अमेरिकी श्रम विभाग के अनुसार, जांच अधिकारियों ने कई समन जारी किए हैं और कुछ स्थानों पर सर्च वारंट के आधार पर तलाशी भी ली गई है।
क्या है प्रोजेक्ट फायरवॉल?
अमेरिका में विदेशी पेशेवरों की भर्ती के बजाय योग्य अमेरिकी नागरिकों को रोजगार में प्राथमिकता देने के उद्देश्य से कई कदम उठाए जा रहे हैं। सितंबर 2025 में अमेरिकी सरकार ने ‘प्रोजेक्ट फायरवॉल’ शुरू किया था। इसका उद्देश्य अमेरिकी कुशल कर्मचारियों के वेतन, अधिकारों और रोजगार के अवसरों की रक्षा करना बताया गया है।
इसके अलावा ट्रंप प्रशासन ने श्रम विभाग, होमलैंड सिक्योरिटी विभाग और विदेश विभाग को H-1B आवेदनों की समीक्षा के दौरान यह जांचने का निर्देश दिया है कि संबंधित कंपनी ने हाल में उसी पद पर काम करने वाले अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी तो नहीं की है।
अमेरिका ने H-1B वीजा श्रेणी के तहत कुछ विशेष वीजा धारकों के अमेरिका में प्रवेश पर लगी पाबंदी को 21 सितंबर 2027 तक बढ़ा दिया है।
क्या है H-1B वीजा और कितना है कोटा?
H-1B एक गैर-आप्रवासी वीजा है, जिसके जरिए अमेरिकी कंपनियां आईटी और अन्य तकनीकी क्षेत्रों में विशेषज्ञता रखने वाले विदेशी कुशल कर्मचारियों को नौकरी देती हैं। अमेरिकी कानून के तहत हर वित्त वर्ष में 65,000 नए H-1B वीजा जारी किए जाते हैं।
इसके अलावा अमेरिका के उच्च शिक्षण संस्थानों से मास्टर या पीएचडी की डिग्री हासिल करने वाले विदेशी छात्रों के लिए 20,000 अतिरिक्त H-1B वीजा का कोटा निर्धारित है।





