India-US Trade Deal पर निर्णायक दौर, कल से दिल्ली में होगी अहम बैठक; अगले महीने समझौते के पहले चरण पर लग सकती है मुहर
नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में इस सप्ताह महत्वपूर्ण प्रगति होने की उम्मीद है। दोनों देशों के शीर्ष व्यापार प्रतिनिधि 23 और 24 जून को नई दिल्ली में अहम बैठक करेंगे, जिसमें समझौते के पहले चरण से जुड़े प्रमुख मुद्दों पर चर्चा होगी।
सूत्रों के अनुसार अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर और केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के बीच होने वाली वार्ता को व्यापार समझौते के लिए निर्णायक माना जा रहा है। इससे पहले 2 से 4 जून के बीच दोनों देशों के मुख्य वार्ताकारों ने नई दिल्ली में विस्तृत बातचीत की थी।
समझौते के ढांचे को अंतिम रूप देने पर रहेगा फोकस
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल के मुताबिक मंत्रीस्तरीय बैठक का मुख्य उद्देश्य व्यापार समझौते के प्रारूप और प्रमुख शर्तों को अंतिम रूप देना है। केंद्र सरकार को उम्मीद है कि अगले महीने के मध्य तक समझौते के पहले चरण को लागू किया जा सकता है।
यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब अमेरिका द्वारा फरवरी 2026 में लागू किया गया 10 प्रतिशत अस्थायी अतिरिक्त आयात शुल्क 24 जुलाई को समाप्त होने वाला है। इसके बाद नई शुल्क व्यवस्था लागू किए जाने की संभावना है, जिससे दोनों देशों के बीच वार्ता और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।
टैरिफ व्यवस्था ने बढ़ाई चुनौती
अमेरिकी न्यायालयों के फैसलों और बदलते वैश्विक व्यापारिक परिदृश्य के कारण शुल्क संबंधी नियमों में बदलाव की स्थिति बनी हुई है। ऐसे में भारत और अमेरिका दोनों को व्यापार समझौते की शर्तों पर नए सिरे से विचार करना पड़ रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि टैरिफ से जुड़े मुद्दों पर सहमति बनने के बाद समझौते की राह काफी हद तक साफ हो सकती है।
भारत की सबसे बड़ी मांग क्या है?
भारत चाहता है कि अमेरिकी बाजार में उसे अपने प्रमुख प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में बेहतर व्यापारिक अवसर मिलें। सरकार की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि भारतीय उत्पादों पर लगने वाले शुल्क वियतनाम, बांग्लादेश, पाकिस्तान और आसियान देशों के मुकाबले कम या अधिक अनुकूल हों।
भारत का मानना है कि यदि उसे प्रतिस्पर्धी देशों के बराबर या उनसे बेहतर बाजार पहुंच नहीं मिलती, तो व्यापार समझौते का अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाएगा।
अमेरिका को बड़े खरीद प्रस्ताव का संकेत
फरवरी में भारत ने अमेरिका के कई औद्योगिक और कृषि उत्पादों पर शुल्क कम करने या समाप्त करने का प्रस्ताव दिया था। इसके साथ ही अगले पांच वर्षों में अमेरिका से 500 अरब डॉलर मूल्य के ऊर्जा उत्पाद, विमान, तकनीकी उपकरण और कोकिंग कोल खरीदने की इच्छा भी व्यक्त की गई थी।
इस कदम को दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
किन मुद्दों पर अटकी है सहमति?
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौता तब तक लागू नहीं किया जाएगा, जब तक भारत को अपने प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में बेहतर व्यापारिक लाभ सुनिश्चित नहीं हो जाता।
उन्होंने कहा था कि समझौते का व्यापक ढांचा पहले ही तय किया जा चुका है और इसकी घोषणा भी हो चुकी है, लेकिन कुछ टैरिफ संबंधी मामलों पर अभी अंतिम सहमति बनना बाकी है।
भारत ने रखी स्पष्ट शर्त
पीयूष गोयल के अनुसार भारत यह सुनिश्चित करना चाहता है कि भारतीय निर्यातकों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में नुकसान न उठाना पड़े। इसलिए शुल्क संबंधी सभी लंबित मुद्दों का समाधान होने के बाद ही व्यापार समझौते को अंतिम रूप दिया जाएगा।
अब नई दिल्ली में होने वाली दो दिवसीय बैठक पर दोनों देशों के कारोबारी जगत और निर्यात क्षेत्र की निगाहें टिकी हैं। माना जा रहा है कि इस वार्ता के नतीजे भारत-अमेरिका व्यापारिक संबंधों की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।





