CWG 2026: शर्मिला धनखड़ ने जीता ऐतिहासिक गोल्ड, पैरा एथलेटिक्स में भारत को दिलाया पहला स्वर्ण; वल्लूरी अजय बाबू ने भी जीता रजत

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नई दिल्ली: कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत की शर्मिला धनखड़ ने शानदार प्रदर्शन करते हुए इतिहास रच दिया। उन्होंने ग्लासगो में आयोजित महिलाओं की शॉट पुट एफ57 स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर कॉमनवेल्थ गेम्स के पैरा एथलेटिक्स इतिहास में भारत को पहला गोल्ड मेडल दिलाया। शर्मिला ने 9.81 मीटर का सीजन का सर्वश्रेष्ठ थ्रो करते हुए शीर्ष स्थान हासिल किया।

शर्मिला की इस उपलब्धि के साथ ही भारत का कॉमनवेल्थ गेम्स के पैरा एथलेटिक्स में पदक जीतने का 20 साल का इंतजार भी समाप्त हो गया। उनके स्वर्ण पदक के साथ भारत को इन खेलों में दूसरा गोल्ड मेडल भी मिला।

नाटकीय घटनाक्रम के बाद शिल्पा शायला को मिला कांस्य पदक

इसी स्पर्धा में भारत की शिल्पा शायला ने भी कांस्य पदक अपने नाम किया। हालांकि उनका पदक नाटकीय घटनाक्रम के बाद तय हुआ। शिल्पा ने 7.26 मीटर का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया था, लेकिन शुरुआती परिणामों में वह चौथे स्थान पर थीं। वहीं नाइजीरिया की यूचेरिया इयियाजी को तीसरे स्थान पर रखते हुए कांस्य पदक दिया गया था।

बाद में भारत की ओर से आपत्ति दर्ज कराए जाने पर अधिकारियों ने प्रदर्शन की समीक्षा की। जांच में नाइजीरियाई खिलाड़ी का एकमात्र वैध थ्रो फाउल घोषित कर दिया गया। इसके बाद शिल्पा को चौथे स्थान से तीसरे स्थान पर पदोन्नत करते हुए कांस्य पदक प्रदान किया गया।

भावुक हुईं शिल्पा, काउंटर प्रोटेस्ट की संभावना

कांस्य पदक मिलने के बाद शिल्पा शायला भावुक हो गईं और उनकी आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। उन्होंने शर्मिला धनखड़ के साथ इस ऐतिहासिक सफलता का जश्न मनाया। हालांकि इस फैसले के खिलाफ नाइजीरिया की ओर से काउंटर प्रोटेस्ट किए जाने की संभावना भी जताई जा रही है।

एफ57 वर्ग उन पैरा एथलीटों के लिए निर्धारित है, जिनके निचले अंगों में दिव्यांगता, अंगों की कमी या मांसपेशियों की ताकत में कमी होती है। शर्मिला धनखड़ को दो वर्ष की उम्र में बाएं पैर में पोलियो हो गया था। इससे पहले वह इसी वर्ष फाजा इंटरनेशनल पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भी स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं। उन्होंने 2022 के बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स में भी हिस्सा लिया था, जहां वह चौथे स्थान पर रही थीं।

वल्लूरी अजय बाबू ने वेटलिफ्टिंग में दिलाया रजत

भारत के पदक अभियान में वेटलिफ्टर वल्लूरी अजय बाबू ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए पुरुषों की 79 किलोग्राम स्पर्धा में रजत पदक जीता। उन्होंने कुल 330 किलोग्राम वजन उठाया और स्वर्ण पदक से केवल एक किलोग्राम पीछे रह गए। मलेशिया के एरी हिदायत मुहम्मद ने 331 किलोग्राम कुल वजन उठाकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया।

पिता की विरासत को बेटे ने बढ़ाया आगे

वल्लूरी अजय बाबू की यह उपलब्धि इसलिए भी खास रही क्योंकि उन्होंने अपने पिता श्रीनिवास राव की राष्ट्रमंडल खेलों की उपलब्धि को आगे बढ़ाया। श्रीनिवास राव ने 2010 दिल्ली राष्ट्रमंडल खेलों में पुरुषों की 56 किलोग्राम वेटलिफ्टिंग स्पर्धा में कांस्य पदक जीता था। अब 16 वर्ष बाद उनके बेटे ने रजत पदक जीतकर परिवार की पदक परंपरा को नई ऊंचाई दी है।

स्वर्ण पदक के लिए मुकाबला आखिरी प्रयास तक बेहद रोमांचक रहा, लेकिन वल्लूरी अजय बाबू महज एक किलोग्राम के अंतर से शीर्ष स्थान हासिल करने से चूक गए। उनके रजत पदक के साथ भारत की कुल पदक संख्या अब 10 हो गई है, जिसमें 2 स्वर्ण पदक शामिल हैं।

 

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