‘मैं रावण का वध करूंगा’ संवाद पर उठा विवाद, क्या रामायण के मूल ग्रंथों में मिलता है ऐसा उल्लेख?
नई दिल्ली: फिल्म रामायण का ट्रेलर जारी होने के बाद इसे लेकर लगातार चर्चा हो रही है। निर्माता नमित मल्होत्रा और निर्देशक नितेश तिवारी की इस बहुप्रतीक्षित फिल्म के पहले लुक को लेकर दर्शकों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। ट्रेलर में कलाकारों के लुक, अभिनय, संवाद और प्रस्तुति पर चर्चा के बीच एक संवाद सबसे ज्यादा विवाद का कारण बन गया है।
ट्रेलर के एक दृश्य में श्रीराम की भूमिका निभा रहे रणबीर कपूर धनुष उठाकर यह कहते दिखाई देते हैं कि वह तीनों लोकों के सामने रावण का वध करेंगे। इसी संवाद के बाद सोशल मीडिया पर यह सवाल उठने लगा कि क्या रामायण, रामचरितमानस या अन्य प्रमुख ग्रंथों में कहीं ऐसा उल्लेख मिलता है कि श्रीराम ने रावण वध का इस प्रकार सार्वजनिक प्रण लिया था।
ग्रंथों में श्रीराम के स्वभाव का अलग वर्णन
रामायण, रामचरितमानस और अन्य पौराणिक ग्रंथों में श्रीराम का स्वरूप शांत, मर्यादित, विनम्र और धैर्यवान बताया गया है। विभिन्न प्रसंगों में उन्हें युद्ध के दौरान भी संयमित रहने वाला, मधुर वाणी बोलने वाला और करुणा से परिपूर्ण बताया गया है। वर्णनों के अनुसार उन्होंने बड़े से बड़े राक्षस का वध भी क्रोध में नहीं किया, बल्कि अंतिम क्षण तक सुधार और चेतावनी का अवसर देने की भावना रखी।
ताड़का वध के प्रसंग में भी नहीं मिलता क्रोध का उल्लेख
रामचरितमानस के बालकांड में ताड़का वध का वर्णन करते हुए संत तुलसीदास लिखते हैं कि विश्वामित्र के संकेत पर श्रीराम ने एक ही बाण से ताड़का का वध किया। इस प्रसंग में कहीं भी श्रीराम के क्रोध, गर्जना या प्रतिशोध की भावना का उल्लेख नहीं मिलता। महर्षि वाल्मीकि की रामायण में भी ताड़का के मर्मभेदी बाण से घायल होकर धरती पर गिरने का वर्णन है, लेकिन वहां भी क्रोध या प्रतिज्ञा जैसी बात नहीं कही गई है।
अरण्यकांड में पृथ्वी को राक्षसों से मुक्त करने का संकल्प
रामचरितमानस के अरण्यकांड में एक प्रसंग आता है, जब श्रीराम वन में ऋषि-मुनियों के कंकाल देखकर करुणा से भर उठते हैं। इसके बाद वह पृथ्वी को राक्षसों से मुक्त करने का संकल्प लेते हैं। इस दोहे में ‘रावण वध’ का उल्लेख नहीं है, बल्कि समस्त पृथ्वी को निशाचरों से मुक्त करने की प्रतिज्ञा का वर्णन मिलता है।
वाल्मीकि रामायण में भी सीधे तौर पर ऐसा उल्लेख नहीं मिलता कि श्रीराम ने केवल रावण के वध का अलग से प्रण लिया हो। हालांकि ऋषि-मुनियों की रक्षा और धर्म की स्थापना के लिए उनका संकल्प कई स्थानों पर वर्णित है।
विभीषण प्रसंग में शरणागत की रक्षा को बताया अपना व्रत
युद्धकांड में विभीषण के शरण में आने के प्रसंग के दौरान श्रीराम स्पष्ट कहते हैं कि जो भी उनकी शरण में आएगा, उसे वह अभय देंगे। यहां तक कि यदि स्वयं रावण भी शरण में आ जाए तो उसे भी सुरक्षा देने की बात कही गई है। इस प्रसंग में श्रीराम अपने व्रत के रूप में शरणागत की रक्षा का उल्लेख करते हैं।
रावण के विनाश का संकल्प सुग्रीव के संवाद में मिलता है
रामायण और रामचरितमानस के किष्किंधा कांड में सुग्रीव के संवादों में रावण और उसके दल-बल के विनाश का उल्लेख मिलता है। वाल्मीकि रामायण के अनुसार सुग्रीव श्रीराम से मित्रता के समय यह संकल्प लेते हैं कि वह माता सीता की खोज कर उन्हें वापस लाएंगे और रावण सहित उसके पूरे दल का विनाश करने में श्रीराम का साथ देंगे।
रामचरितमानस में भी सुग्रीव श्रीराम को आश्वस्त करते हैं कि वह पूरी निष्ठा से उनकी सेवा करेंगे और हर संभव प्रयास करेंगे जिससे माता सीता की वापसी हो सके।
ट्रेलर के संवाद पर इसलिए हो रही है चर्चा
ट्रेलर में श्रीराम के रूप में दिखाए गए ‘मैं रावण का वध करूंगा’ जैसे संवाद को लेकर इसलिए बहस हो रही है क्योंकि प्रमुख और व्यापक रूप से प्रचलित रामायण ग्रंथों में इस स्वरूप का स्पष्ट उल्लेख नहीं मिलता। हालांकि रामकथा के अनेक संस्करण प्रचलित हैं और समय-समय पर विभिन्न रचनाकारों ने अपने दृष्टिकोण के अनुसार रचनात्मक प्रस्तुति दी है। ऐसे में फिल्म में दिखाए गए इस संवाद का आधार किस संस्करण या स्रोत से लिया गया है, इसे लेकर फिलहाल आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।





