भारत के लिए बड़ी राहत! होर्मुज स्ट्रेट पार कर सुरक्षित निकला LNG टैंकर ‘दिशा’, 62 हजार टन गैस लेकर गुजरात के लिए रवाना

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नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में हालिया शांति समझौते के बाद वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के सबसे अहम समुद्री मार्गों में शामिल होर्मुज स्ट्रेट में गतिविधियां धीरे-धीरे सामान्य होती दिखाई दे रही हैं। इसी बीच भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। भारतीय LNG टैंकर ‘दिशा’ इस संवेदनशील समुद्री मार्ग से सुरक्षित बाहर निकलने वाला पहला वाणिज्यिक जहाज बन गया है। यह टैंकर कतर से 62,370 मीट्रिक टन तरलीकृत प्राकृतिक गैस लेकर भारत की ओर बढ़ रहा है।

जानकारी के मुताबिक, फारस की खाड़ी में लंबे समय से जारी संघर्ष और सुरक्षा चिंताओं के कारण यह जहाज कई महीनों तक प्रभावित क्षेत्र में फंसा हुआ था। अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते के बाद जैसे ही समुद्री आवाजाही में सुधार शुरू हुआ, ‘दिशा’ ने सुरक्षित रूप से अपनी यात्रा आगे बढ़ाई।

सुरक्षा संकट के बीच लगातार सक्रिय रहा AIS सिस्टम

सरकारी कंपनी शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया द्वारा संचालित यह LNG टैंकर माल्टा के ध्वज के तहत संचालित हो रहा है। पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्रालय के अधिकारियों ने पुष्टि की है कि जहाज ने सफलतापूर्वक होर्मुज स्ट्रेट पार कर लिया है।

विशेष बात यह रही कि जहां सुरक्षा कारणों से कई अंतरराष्ट्रीय जहाजों ने पिछले कुछ समय से अपने ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (AIS) बंद कर दिए थे, वहीं ‘दिशा’ ने पूरी यात्रा के दौरान अपनी लाइव लोकेशन प्रणाली सक्रिय रखी और बिना किसी बाधा के आगे बढ़ता रहा।

18 जून को गुजरात के दहेज बंदरगाह पहुंचेगा टैंकर

रिपोर्ट्स के अनुसार, LNG टैंकर ‘दिशा’ 18 जून को गुजरात के दहेज बंदरगाह पर पहुंच सकता है। इसके भारत पहुंचने से देश की गैस आपूर्ति व्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

बताया जा रहा है कि क्षेत्रीय तनाव और युद्ध जैसे हालात के कारण जहाज करीब तीन महीने तक खाड़ी क्षेत्र में रुका हुआ था। अब इसके सुरक्षित निकलने को ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

तनाव के कारण प्रभावित हुई थी समुद्री आवाजाही

होर्मुज स्ट्रेट बीते कुछ महीनों से वैश्विक चिंता का केंद्र बना हुआ था। अप्रैल में क्षेत्र में सुरक्षा हालात बिगड़ने की खबरों के बाद कई अंतरराष्ट्रीय जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई थी। इसके चलते व्यापारिक गतिविधियों और ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला पर भी असर पड़ा था।

ऐसे माहौल में किसी बड़े वाणिज्यिक जहाज का सुरक्षित रूप से इस मार्ग को पार करना वैश्विक शिपिंग सेक्टर के लिए भी सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए क्यों महत्वपूर्ण है होर्मुज स्ट्रेट?

होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा व्यापार मार्गों में गिना जाता है। वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी समुद्री रास्ते से होकर गुजरता है।

भारत के लिए इसकी अहमियत और भी अधिक है। देश अपनी कुल एलपीजी जरूरतों का लगभग 90 प्रतिशत, एलएनजी आयात का करीब 60 प्रतिशत और कच्चे तेल का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा इसी मार्ग से प्राप्त करता है। ऐसे में इस रूट में किसी भी प्रकार की बाधा का सीधा असर देश की ऊर्जा आपूर्ति और ईंधन कीमतों पर पड़ सकता है।

अब भी खाड़ी क्षेत्र में फंसे हैं 13 भारतीय जहाज

हालांकि ‘दिशा’ सुरक्षित रूप से बाहर निकल चुका है, लेकिन फारस की खाड़ी क्षेत्र में अभी भी 13 भारतीय वाणिज्यिक जहाज मौजूद हैं। मार्च से अब तक केवल 10 भारतीय जहाज ही इस संवेदनशील मार्ग को पार कर पाए हैं।

शिपिंग क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि शांति समझौते के बावजूद अंतरराष्ट्रीय कंपनियां अभी पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं और सतर्कता बरत रही हैं। समुद्री सुरक्षा की स्थिति पूरी तरह सामान्य होने में अभी कुछ समय लग सकता है।

भारत सरकार ने संकेत दिए हैं कि जैसे-जैसे सुरक्षा हालात बेहतर होंगे, खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अन्य भारतीय जहाजों की आवाजाही भी चरणबद्ध तरीके से सुनिश्चित की जाएगी।

 

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