UPI यूजर्स के लिए बड़ी खबर! ₹2,000 से ज्यादा के भुगतान पर लगेगा चार्ज? जानिए सरकार का पूरा प्लान

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नई दिल्ली: गूगल पे, फोनपे, पेटीएम, व्हाट्सऐप और दूसरे माध्यमों से यूपीआई भुगतान करने वाले करोड़ों लोगों के लिए एक अहम खबर सामने आई है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, ₹2,000 या उससे अधिक के यूपीआई लेन-देन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट लागू करने की तैयारी चल रही है। इससे जुड़ी नई व्यवस्था अगले दो सप्ताह में सामने आने की संभावना जताई गई है। हालांकि, सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसका सीधा शुल्क यूपीआई ग्राहक से लेने की योजना नहीं है।

अगले सप्ताह आ सकता है नोटिफिकेशन

रिपोर्ट के अनुसार, सरकार अगले एक सप्ताह में इस संबंध में अधिसूचना जारी कर सकती है। इसमें उन इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यमों की सूची तय की जा सकती है जिन्हें मर्चेंट डिस्काउंट रेट से कानूनी संरक्षण मिलेगा।

इसके बाद भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम की अध्यक्षता वाली सेवा संचालन समिति मर्चेंट डिस्काउंट रेट की दर, सीमा और उसके दायरे को अंतिम रूप दे सकती है। हालांकि, ₹2,000 की सीमा अभी आधिकारिक तौर पर अधिसूचित मर्चेंट डिस्काउंट रेट की सीमा नहीं है।

क्या ग्राहक को देना होगा यूपीआई चार्ज?

मर्चेंट डिस्काउंट रेट वह शुल्क है जो डिजिटल भुगतान के प्रसंस्करण के बदले बैंक और भुगतान सेवा प्रदाता कारोबारी से लेते हैं। सरकार की ओर से कहा गया है कि अगर मर्चेंट डिस्काउंट रेट लागू किया जाता है तो इसका सीधा बोझ यूपीआई ग्राहक पर नहीं डाला जाएगा।

इसका मतलब है कि ₹2,000 या उससे अधिक का यूपीआई भुगतान करने वाले ग्राहक से अलग से यूपीआई शुल्क लेने की योजना नहीं है। संभावित शुल्क का भुगतान कारोबारी पक्ष से किया जाएगा।

यूपीआई पर अभी तक क्यों नहीं लगता शुल्क?

दिसंबर 2019 तक डिजिटल भुगतान पर करीब 0.3 प्रतिशत तक मर्चेंट डिस्काउंट रेट लागू था। डिजिटल भुगतान और खास तौर पर यूपीआई को बढ़ावा देने के लिए जनवरी 2020 से शून्य-मर्चेंट डिस्काउंट रेट व्यवस्था लागू की गई थी।

अब सरकार भुगतान प्रणाली से जुड़े कानून में बदलाव के जरिए सीमित दायरे में मर्चेंट डिस्काउंट रेट की अनुमति देने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

छोटे यूपीआई भुगतान पर क्या होगा असर?

अगर रिपोर्ट में बताए गए प्रस्ताव को लागू किया जाता है तो रोजमर्रा के छोटे भुगतान पर इसका सीधा असर पड़ने की संभावना कम है। किराना, दूध, सब्जी और दूसरी छोटी खरीदारी के लिए किए जाने वाले सामान्य यूपीआई भुगतान फिलहाल इस संभावित व्यवस्था से सीधे प्रभावित होते नहीं दिख रहे हैं।

बड़े कारोबारियों और बड़े मूल्य वाले लेन-देन में इसका असर ज्यादा देखने को मिल सकता है। हालांकि, अंतिम मर्चेंट डिस्काउंट रेट सीमा, शुल्क की दर और इसके दायरे की जानकारी आधिकारिक अधिसूचना तथा भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम के अंतिम नियमों के बाद ही स्पष्ट होगी।

अभी ₹2,000 से ऊपर के हर भुगतान पर चार्ज तय नहीं

फिलहाल यह कहना सही नहीं होगा कि ₹2,000 से अधिक के हर यूपीआई भुगतान पर शुल्क लगना शुरू हो गया है। अभी ₹2,000 की सीमा और प्रस्तावित व्यवस्था को लेकर अंतिम नियम अधिसूचित नहीं हुए हैं। इसलिए यूपीआई ग्राहकों को फिलहाल इस राशि से अधिक के हर भुगतान पर अलग से शुल्क देने की बात तय नहीं मानी जानी चाहिए।

 

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