सेना प्रमुख के कार्यालय में बड़ा बदलाव! विवादित पेंटिंग हटाई गई, अब बैकड्रॉप में दिखेगा भारतीय सेना का प्रतीक चिह्न
नई दिल्ली: भारतीय सेना प्रमुख के साउथ ब्लॉक स्थित कार्यालय के लाउंज में लगी विवादित पेंटिंग को हटा दिया गया है। उसकी जगह अब भारतीय सेना का आधिकारिक प्रतीक चिह्न लगाया गया है। यही वह स्थान है, जहां सेना प्रमुख विदेशी प्रतिनिधिमंडलों, राजनयिकों और अन्य गणमान्य व्यक्तियों से मुलाकात करते हैं। इस बदलाव को लेकर कई पूर्व सैन्य अधिकारियों ने सकारात्मक प्रतिक्रिया व्यक्त की है।
डूरंड कप के वीडियो से सामने आया बदलाव
यह बदलाव उस समय सार्वजनिक रूप से सामने आया, जब ईस्टर्न कमांड ने 25 जुलाई से शुरू होने वाले डूरंड कप फुटबॉल टूर्नामेंट के 135वें संस्करण के लिए सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ का एक वीडियो संदेश जारी किया। 30 जून को सेना प्रमुख का पद संभालने वाले जनरल धीरज सेठ वीडियो में अपने कार्यालय में बैठे नजर आए। वीडियो में उनके पीछे पहले लगी विवादित पेंटिंग की जगह भारतीय सेना का आधिकारिक प्रतीक चिह्न स्पष्ट दिखाई दिया।
क्यों हुआ था पेंटिंग को लेकर विवाद?
दिसंबर 2024 में सेना प्रमुख के कार्यालय में लगाई गई इस पेंटिंग में पूर्वी लद्दाख के पैंगोंग झील क्षेत्र, सैन्य टैंक, हथियारबंद हेलिकॉप्टर और भारतीय इतिहास एवं संस्कृति से जुड़े कई प्रतीकों को दर्शाया गया था। इसमें भगवान कृष्ण को रथ चलाते हुए और चाणक्य को वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) की दिशा में संकेत करते हुए चित्रित किया गया था।
विवाद इसलिए खड़ा हुआ क्योंकि इस नई पेंटिंग को उस ऐतिहासिक चित्र की जगह लगाया गया था, जिसमें वर्ष 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान ढाका में पाकिस्तानी सेना के आत्मसमर्पण का ऐतिहासिक दृश्य दर्शाया गया था।
1971 युद्ध वाली ऐतिहासिक पेंटिंग को किया गया था स्थानांतरित
विवाद बढ़ने के बाद तत्कालीन सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी के कार्यकाल में 1971 के युद्ध में पाकिस्तान के आत्मसमर्पण को दर्शाने वाली ऐतिहासिक पेंटिंग को दिल्ली कैंट स्थित मानेकशॉ सेंटर में स्थानांतरित कर दिया गया था। सेना की ओर से उस समय कहा गया था कि मानेकशॉ सेंटर में तीनों सेनाओं के बड़े कार्यक्रम आयोजित होते हैं, जिससे अधिक लोग इस ऐतिहासिक पेंटिंग को देख सकेंगे।
पूर्व सैन्य अधिकारियों ने फैसले का किया स्वागत
सेना प्रमुख के कार्यालय में समय-समय पर सजावट और पेंटिंग बदलना सामान्य प्रक्रिया मानी जाती है। हालांकि इस बार विवादित पेंटिंग हटाकर भारतीय सेना का प्रतीक चिह्न लगाए जाने के फैसले का कई पूर्व सैन्य अधिकारियों ने स्वागत किया है।
पूर्व उत्तरी सेना कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) एच.एस. पनाग ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर प्रतिक्रिया देते हुए इस कदम की सराहना की। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में वर्ष 1971 के युद्ध में पाकिस्तान के आत्मसमर्पण को दर्शाने वाली ऐतिहासिक पेंटिंग को फिर से सेना प्रमुख के कार्यालय में स्थापित किया जा सकता है।





